सुब्रत राॅय को लगा बड़ा झटका, नहीं मिल रहा एंबी वैली को खरीदार

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Updated: 13 Jul 2018, 09:02 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट के ऑफिशियल लिक्विडेटर ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सहारा की पूणे स्थित एंबी वैली को अभी तक कोई खरीदार नहीं मिला है।

सुब्रत राॅय को लगा बड़ा झटका, नहीं मिल रहा एंबी वैली को खरीदार

नई दिल्ली। निवेशकों का रुपया वापस करने के मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को अभी राहत नहीं मिलती दिख रही है। सहारा की पूणे स्थित एंबी वैली को अभी तक कोई खरीदार नहीं मिला है। यह बात बंबई हाईकोर्ट के ऑफिशियल लिक्विडेटर ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कही है। लिक्विडेटर ने कहा है कि नोटिस देने के बाद भी कोई बोली लगाने नहीं पहुंचा है।

सुप्रीम कोर्ट दे चुका है एंबी वैली की नीलामी की इजाजत

पिछले साल बंबई हाईकोर्ट ने निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए सहारा समूह की पूणे स्थित एंबी वैली की नीलामी करने के आदेश दिए थे। इस संबंध में हाईकोर्ट ने एक ऑफिशियल लिक्वि़डेटर भी तैनात कर दिया था। बंबई हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बंबई हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुई 16 मई को एंबी वैली की नीलामी के आदेश दिए थे।

सहारा जमा नहीं कर पाया रुपया

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को एंबी वैली का एक हिस्सा बेचने की इजाजत दी थी। लेकिन सहारा ऐसा करने में विफल रहा। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को 750 करोड़ रुपए जमा करने को कहा था लेकिन एंबी वैली के नहीं बिकने के कारण वह रुपया जमा नहीं कर पाया। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि अगर एंबी वैली की नीलामी नहीं हो पाई तो पैसे के लिए सहारा के शेयर बेचने की मंजूरी दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान सेबी ने कहा कि सहारा समूह ने ब्याज समेत 18197 करोड़ रुपए जमा किए हैं। अभी 980 करोड़ रुपए बकाया हैं। 681 करोड़ रुपए की एक बैंक गारंटी भी है जिसकी समय सीमा 2019 है।

दो फर्मों को बेचने की मिली मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को मुंबई के वसई स्थित उसकी 300 एकड़ भूमि बेचने की इजाजत दे दी है। इसके लिए सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छा जताई थी। सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस जमीन के लिए दो फर्में 1000 हजार करोड़ रुपए देने को तैयार हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दोनों फर्मों की ओर से जमा किए गए 99 करोड़ रुपए स्वीकार कर लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वे 24 जुलाई तक 200 करोड़ रुपए जमा करें। शीर्ष कोर्ट ने दोनों फर्मों को 12 सितंबर तक 980 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया।

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