जानिए क्या है IVF जिससे जन्में थे आकाश और ईशा, 7 साल बाद लौटी थीं मुकेश अंबानी की खुशियां

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Published: 02 Feb 2019, 01:47 PM IST

शादी के बाद ईशा अंबानी ने एक बड़ा खुलासा किया है। दरअसल ईशा अंबानी ने शादी के बाद पहली बार वोग (Vogue) मैगजीन के लिए फोटोशूट करवाया और फोटोशूट के बाद ईशा ने वोग फैशन मैगजीन को अपना पहला इंटरव्यू भी दिया। ईशा ने बताया कि वह और उनका भाई आकाश आईवीएफ (IVF) तकनीक से जन्मे थे।

नई दिल्ली। हाल ही में भारत के सबसे अमीर घराने की बेटी ईशा अंबानी की शादी आनंद पीरामल के साथ हुई है। लंबे समय से सुर्खियों में रहने वाली ये शादी दशकों की सबसे महंगी शादियों में से एक थी। अब शादी के बाद ईशा अंबानी ने एक बड़ा खुलासा किया है। दरअसल ईशा अंबानी ने शादी के बाद पहली बार वोग (Vogue) मैगजीन के लिए फोटोशूट करवाया और फोटोशूट के बाद ईशा ने वोग फैशन मैगजीन को अपना पहला इंटरव्यू भी दिया। इंटरव्यू के दौरान ईशा ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए।


एसे जन्मे थे ईशा और आकाश

ईशा ने बताया कि वह और उनका भाई आकाश आईवीएफ (IVF) तकनीक से जन्मे थे। ईशा ने बताया कि, पैरेंट्स की शादी के सात साल बाद घर में किलकारियां गूंजी थी। मैं और मेरा जुड़वा भाई आकाश आईवीएफ तकनीक से जन्मे थे। हमारे जन्मे के बाद मेरी मां सिर्फ इसी किरदार में रहना चाहती थी। हालांकि बाद में वह काम पर भी लौटीं। उस समय हमारी उम्र करीब पांच साल की रही होगी। लेकिन उसके बाद भी उन्होंने कोई कमी नहीं रखी।


कुछ ऐसा बीता ईशा अंबानी का बचपन

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि, 'मैंने अपने पिता, मुकेश अंबानी को काम करते देखा है। वह अपने सपनों और रिलायंस को आज की स्थिति में लाने के लिए कड़ी मेहनत करते थे। वह काम करते कभी समय नहीं देखते थे। हालांकि इस दौरान भी वह हमारी जरूरत पर हमेशा खड़े रहते थे। हमें हमेशा से ही पैसे की कद्र करना सिखाया गया। इसके साथ ही कड़ी मेहनत और मानवता के बारे में भी पिता बचपन से ही कहते हैं।' ईशा ने ये भी बताया कि पापा से ज्यादा मां कड़क स्वभाव की थीं ।


क्या है IVF ?

IVF यानी विट्रो फर्टिलाइजेशन के तहत पति-पत्नी अपना बच्चा पैदा कर सकते हैं। इस टेक्नोलॉजी में सबसे पहले अंडों के उत्पादन के लिए महिला को फर्टिलिटी दवाइयां दी जाती हैं। इसके बाद सर्जरी के माध्यम से अंडो को निकाल कर प्रयोगशाला में कल्चर डिश में तैयार पति के शुक्राणुओं के साथ मिलाकर फर्टिलाइजेशन के लिए रख दिया जाता है। लैब में इसे दो या तीन दिन रखा जाता है, फिर पूरी जांच के बाद इससे बने भ्रूण को वापिस महिला के गर्भ में इम्प्लांट कर दिया जाता है। आईवीएफ की इस प्रक्रिया में दो से तीन हफ्ते का समय लग जाता है। पूरी प्रक्रिया को अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया जाता है।

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