ICICI bank ने चंदा कोचर को दी क्लीन चिट, कहा-सभी आरोप बेबुनियाद

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Updated: 30 Mar 2018, 11:19 AM IST

ICICI बैंक के चेयरमैन एम. के. शर्मा ने वीडियोकॉन मसले पर गुरुवार को कहा कि बैंक की एमडी व सीईओ चंदा कोचर पर कुनबापरस्ती का आरोप बेबुनियाद है।

ICICI bank ने चंदा कोचर को दी क्लीन चिट, कहा-सभी आरोप बेबुनियाद

नर्इ दिल्ली। ICICI बैंक के चेयरमैन एम. के. शर्मा ने वीडियोकॉन मसले पर अपना रुख दोहराते हुए गुरुवार को कहा कि बैंक की प्रबंध निदेशक (एमडी) व सीईओ चंदा कोचर पर कुनबापरस्ती का आरोप बेबुनियाद और द्वेषपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ICICI के बारे में वीडियोकॉन समूह (वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और उसके 12 सहायक) को कर्ज समेकन कार्यक्रम और समूह के तेल व गैस पूंजी खर्च कार्यक्रम के तहत तकरीबन 40,000 करोड़ रुपये देने का जो खुलासा किया गया है वह 10 फीसदी से भी कम है।


किसी भी कर्मी में बैंक की क्रेडिट को प्रभावित करने की क्षमता नहीं

शर्मा ने दावा किया कि बैंक के किसी भी कर्मी को इसके किसी क्रेडिट को प्रभावित करने की क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि कोचर ने वीडियोकॉन को कर्ज देने वाली कमेटी की अध्यक्षता नहीं की थी। वह कमेटी का हिस्सा थी। मुंबई में शर्मा ने कहा, "सभी प्रकार के कर्ज मंजूर करने वाली बनाई क्रेडिट कमेटी, जिसमें स्वतंत्र निदेशकों को शामिल किया गया है, में बैंक के किसी भी कर्मी को बैंक द्वारा क्रेडिट प्रदान करने के फैसलों पर कोई प्रभाव डालने की क्षमता नहीं होती है चाह वह कितना भी बड़ा पद क्यों न धारण करता हो।


कोचर ने नहीं की कर्ज देने वाली कमेटी की अध्यक्षता

उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यू पावर रिन्यूबल्स ICICI बैंक से उधारी लेते हैं और कोचर ने उस कमेटी की अध्यक्षता नहीं की थी जिसने ने वीडियोकॉन को कर्ज दिया। उन्होंने कहा, "कोचर उस क्रेडिट कमेटी का हिस्सा थी जिसने वीडियोकॉन को कर्ज की सुविधा मंजूर की। बोर्ड इसे हितों के टकराव के रूप में नहीं देखता है क्योंकि वीडियोकॉन न्यूपावर रिन्यूबल्स में निवेशक नहीं है।" शर्मा ने यह भी कहा कि कोचर ने कंपनी अधिनियम और बैंकिंग अधिनियम के तहत विनियामक दिशानिर्देशों के अनुपालन में अपने सभी खुलासे किए।


अफवाहों में लगाया गया आरोप बेबुनियाद

शर्मा ने कहा, "ICICI बैंक इस कंसोर्टियम का प्रमुख बैंक नहीं था और बैंक ने तकरीबन 3,250 करोड़ की सुविधाओं में सिर्फ अपनी हिस्सेदारी को मंजूरी दी, जोकि अप्रैल 2012 में कंसोर्टियम की कुल सुविधा के 10 फीसदी से कम थी।" बैंक ने बुधवार को एक बयान में कहा, "बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि विभिन्न अफवाहों में जैसा आरोप लगाया गया है उस तरह का कोई गड़बड़ या कुनबापरस्ती या हितों का टकराव नहीं है। बोर्ड को बैंक की एमडी व सीईओ चंदा कोचर पर पूरा विश्वास व भरोसा है।"

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