सरकार नही अब अंबानी, टाटा, बिड़ला करेंगे सुस्त होती इकोनॉमी का इलाज, बना है ये प्लान

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Updated: 17 Dec 2019, 05:59 PM IST

  • सरकार निवेश बढ़ाने के लिए औद्योगिक घरानों से कर रही है बातचीत
  • बड़े घराने से बड़ा निवेश जुटाने की हो रही है कवायद

नई दिल्ली। लगातार सुस्त होती इकोनॉमी ( Economy ) सरकार के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। वित्त मंत्रालय को इस सुस्ती से निपटने के लिए कोई ठोस प्लान सूझ नही रहा है। इसलिए अब इसके इलाज के लिए सरकार ने देश के बड़े औद्दोगिक घरानों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। सरकार ने इसके लिए देश के 25 टॉप औद्दोगिक घरानों से बातचीत शुरू कर दी है। जिसमें टाटा, रिलायंस ( Reliance ) , महिंद्रा अडाणी ( Gautam Adani ) समेत देश कई घराने शामिल हैं।

ये है पूरा प्लान

दरअसल वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक घरानों से बातचीत की यह पहल शुरू की है। इसके तहत एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सेल का गठन किया गया है जिसमें औद्योगिक घरानों से विचार विमर्श किया जाएगा। इस योजना के तहत कंपनियों से उनके ऑपरेशन और विस्तार के बारे में जानकारी ली जा रही है। कंपनियों की ओर से उठाए गए मुद्दों को मैनेजमेंट सेल ने दूसरे मंत्रालयों और संबंधित राज्यों की सरकारों के साथ साझा किया है।

इन सेक्टर्स पर चर्चा

इस पहल के तहत औद्योगिक घरानों से जिन सेक्टर्स पर बातचीत की जा रही है उनमें रिटेल, विमानन, सड़क. टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन, रेलवे, खनन, वकालत शामिल है।

इसलिए बनाया गया है प्लान

सरकार को उम्मीद है कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद कंपनियां निवेश को बढ़ावा देंगी। खासतौर पर नई मेन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना करेंगी। इसका कारण यह है कि तीन साल में लगने वाली नई मेन्युफैक्चरिंग यूनिट को मात्र 15 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स देना है। निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने औद्योगिक घरानों से पांच साल के लिए निवेश प्लान और छोटी अवधि के लिए विस्तार प्लान मांगे हैं।