अब इस बैंक में हुआ 250 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा, 3 निदेशक गिरफ्तार

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Updated: 19 Mar 2018, 03:09 PM IST

मुंबर्इ पुलिस के क्राइम ब्रांच में एक्सिस बैंक ने एक निजी फर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज कराया है।

अब इस बैंक में हुआ 250 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा, 3 निदेशक गिरफ्तार

नर्इ दिल्ली। मुंबर्इ पुलिस के पास एक आैर बैंंक फ्रॉड का मामला सामने आया हैं। मुंबर्इ पुलिस के क्राइम ब्रांच में एक्सिस बैंक ने एक निजी फर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज कराया है। जिसके बाद से इस कंपनी के तीन निदशकों को गिरफ्तार किया गया। इन तीनों निदेशकों पर आरोप है कि, इन्होंने लेटर्स आॅफ के्रडिट का गलत इस्तेमाल किया है। इन्होंने जाली कंपनियों के बिल दिखाकर बैंक को करीब 250 करोड़ रुपए का बट्टा लगाया है। बैंक को बट्टा लगाने वाले इस कंपनी का नाम पारेख अल्यूमिनेक्स लिमिटेड नाम है। इस कंपनी पर देनदारों ने करीब 4000 करोड़ रुपए के बकाए का आरोप लगाया है जिसकी अभी जांच चल रही है। जिन तीन निदेशकों को मुंबर्इ पुलिस ने गिरफ्तार किया है उनका नाम भंवरलाल भंडारी, प्रेमल गोरागांधी, आैर कमलेश कानूनगो है। इन्हें शुक्रवार को धोखधड़ी, फर्जीवाड़ा, ब्रीच आॅफ ट्रस्ट आैर आपराधिक साजिश के मामले में गिरफ्तार किया गया है।


जाली कंपनियों की नाम पर किया धोखाधड़ी

इस कंपनी को जिन 20 देनदारों ने एक्सपोज किया है उसमें एक्सिस बैंक भी है।गिरफ्तार किए गए तीनों निदेशकों पर फोर्ट स्थित ब्रांच में फर्जी इनवाॅइस आैर जाली कंपनियों के जरिए छेड़छाड़ किए गए बिल जमा करने का आरोप हैं। बैंक ने अपने शिकायत में अमिताभ पारेख, राजेन्द्र गोठी, देवांशु देसार्इ, किरण पारेख आैर विक्रम मोरडानी का नाम है लिया हैं। इनमें से एक आरोपी अमिताभ पारेख का साल 2013 में ही निधन हो चुका है। पारेख अल्यूमिनेक्स के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक आैर इंडियन आेवरसीज बैंक ने पहले भी शिकायत दर्ज करार्इ थी जिसकी जांच सीबीअाइ कर रही है। इन दोनों बैंको ने पारेख अल्यूमिनेक्स पर रियल स्टेट डवलपर्स को फंड डाइवर्ट करने का आरोप लगाया था।


इस तरह किया फर्जीवाड़ा

मुंबर्इ पुलिस के अनुसार इस कंपनी ने पहले एक्सिस बैंक से तीन बार शाॅर्ट टर्म के लिए 125 करोड़ रुपए का लोन लिया। फिर इस लोन का समय से चुका भी दिया। इसके बाद साल 2011 में कंपनी ने बैंक से लोन लेने के लिए कंपनी के बाेर्ड आॅफ डायरेक्टर्स की बैठक से जुड़े कुछ कागजात पेश किए। लेकिन वास्तव में बोर्ड आॅफ डायरेक्टर्स की एेसी कोर्इ बैठक हुर्इ ही नहीं। इस लोन की कुल राशि 127.5 करोड़ रुपए की थी जिसे बैंक ने कंपनी को कच्चे माल आैर अन्य उपकरण खरीदने के लिए दिया था। अमिताभ बैंक के दिए इस पैसे को अपने व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर करा लिया आैर इसकी कंपनी के लिए सामान खरीदने का फर्जी बिल बैंक में जमा कर दिया। असल मे जिस कंपनी से सामान खरीदने को दावा किया गया वो कंपनी जाली निकली।

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