Salute : श्वानों को बचाने गए तीन जने बाढ़ व मगरमच्छों के बीच पांच घंटे फंसे रहे

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Updated: 04 Aug 2021, 10:39 PM IST

खुद का जीवन संकट में डाल बेजुबानों को बचा लाए

कोटा.

भारी बरसात के कारण बुधवार सुबह कोटा शहर में पानी ही पानी नजर आ रहा था। इस विकट समय में कुछ लोग ऐसे भी थे, जो बेसहाराजीवों की करुण पुकार महसूस कर उन्हें बचाने के लिए चले गए। श्वानों को बचाने गए तीन जने तो खुद पानी व मगरमच्छों के बीच फंस गए, लेकिन नगर निगम व एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम को बुलाकर श्वानों को बचा लिया।

हिम्मत नहीं हारी
बोरखंडी क्षेत्र में बुधवार सुबह चंद्रलोई नदी के उफान पर शेल्टर में श्वानों को बचाने गए नवनीत हाड़ा सहित तीन जने पानी में फंस गए। उन्होंने करीब 12 श्वानों को पानी में डूबने से बचा लिया। सभी श्वानों को शेल्टर के टीन शेड पर चढ़ा दिया। इस बीच नदी का पानी ज्यादा बढ़ गया और मगरमच्छ दिखाई देने पर तीनों ने भी शेल्टर पर चढ़कर अपना बचाव किया। पानी का स्तर बढ़ता ही चला गया। इस पर नवनीत ने बेसहारों की मेजर प्रमिलासिंह के जरिए राजस्थान पत्रिका तक सूचना पहुंचाई। पत्रिका ने जिला कलक्टर उज्ज्वल राठौड़ और महापौर मंजू मेहरा को अवगत कराया। उन्होंने एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम भेजी। अजमेर एसडीआरएफ टीम के लीडर विमल कुमार ने मौके पर पहुंचकर तीनों को श्वानों के साथ सुरक्षित निकाल लिया। करीब पांच घंटे से ज्यादा समय तक बरसात में भीगने के कारण तीनों की तबीयत भी खराब हो गई।

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बेटी व पिता ने 30 श्वानों को बचाया-
कोटा के श्रीनाथपुरमनगर निवासी सेवानिवृत मेजर प्रमिलासिंह व उसके पिता श्यामवीरसिंह बुधवार सुबह बरसात के दौरान बेसहारा श्वानों को बचाने सड़कों पर निकले। उन्होंने दादाबाड़ी क्षेत्र में जलभराव के बीच परेशान श्वानों को देखा। श्वान बरसात से बचने के लिए लोहे पाइप और पेड़ों के तनों का सहारा लेने की कोशिश कर रहे थे। मेजर प्रमिला ने अपने पिता के साथ उन सभी श्वानों को सहारा दिया और पास ही खाली पड़े सरकारी आवासों में सुरक्षित जगह सूखी जगह पर बैठाया और उनको भोजन खिलाया। शाम तक करीब 30 बेसहारा श्वानों को सुरक्षित जगह पहुंचाया। गौरतलब है कि मेजर व उनके पिता पिछले कई वर्षों से कोटा में बेसहारा जीवों का सहारा बने हुए हैं। कोरोनाकाल में भी बेजुबानों को खाना-पानी देकर उन्हें बचाया था। कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक पत्र जारी कर कोटा की बेटी मेजर प्रमिलासिंह व उनके पिता श्यामवीरसिंह के सेवा कार्यों की सराहना की थी।