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उठो... हार के बाद ही जीत है

By Shailendra Tiwari

Apr, 26 2017 11:51:00 (IST)

मुनि प्रणम्य सागर ने मंगलवार को एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों को असफलता से कभी न हारने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विफलता को अवसर समझें और अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास करें।

मुनि प्रणम्य सागर ने ली कोचिंग विद्यार्थियों की क्लास, अध्यात्म के साथ बताए सफलता के सूत्र 


मुनि प्रणम्य सागर ने मंगलवार को एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों को असफलता से कभी न हारने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विफलता को अवसर समझें और अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास करें। मानकर चलें कि हार के बाद जीत ही है। यह जीत कई गुना सुखद होती है। 


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संत वाणी को भावी डॉक्टर-इंजीनियर एकाग्रता से आत्मसात करते रहे।  संत ने विद्यार्थियों को ध्यान योग का अभ्यास भी करवाया। उन्होंने कहा कि विफलता के बाद हम हताश हो जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को निरोगी रहने के लिए प्रकृति के आधार पर अपनी दिनचर्या निर्धारित करने को कहा। 


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पर्याप्त विश्राम करने और समय पर जागने को कहा।  मुनि ने कहा कि रामभक्त हनुमान से सेवाभाव व भगवान महावीर स्वामी से दयाभाव सीखना चाहिए।  संत ने विद्यार्थियों से संवाद भी किया। विद्यार्थियों को देश की सभ्यता संस्कृति का आदर करने की सीख दी और कहा कि अच्छाई को ग्रहण करने का मन में भाव रखें। अच्छाई व बुराई में भेद करना सीखें। सद्भाव परिसर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी व शिक्षक मौजूद थे। 


अध्यात्म देता है प्रेरणा

इन्द्रविहार में एलन समर्थ कैम्पस स्थित सद्भाव  परिसर में निदेशक नवीन माहेश्वरी ने जैन मुनि की अगवानी की। इस मौके उन्होंने बच्चों से कहा कि मोटिवेशनल टॉक के साथ-साथ आध्यात्मिक अनुभव  प्रेरणादायी सिद्ध होते हैं। संत द्वारा दिया गया मंत्र विद्यार्थियों को प्रेरित करेगा। 


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योग से रहें तरोताजा

मुनि प्रणम्य सागर ने  विद्यार्थियों को योग मुद्राएं भी करवाई। उन्होंने अरिहन्त मुद्रा, सिद्ध मुद्रा, उपाध्याय मुद्रा व साधु मुद्रा के अभ्यास करवाया।  इनके लाभ बताते हुए कहा कि इससे एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। नियमित रूप से इन योगाभ्यासों को दोहराएं। बच्चे संत के बताए अनुसार तन्मयता से योग करते नजर आए।