लक्ष्मण रेखा में रहे राम, पुजारी के अलावा कोई अंदर नहीं आया

|

Published: 02 Apr 2020, 08:05 PM IST

ऐसा पहली बार...
-न शोभायात्रा न पूजन-दर्शन, मंदिरों के पट तो खुले लेकिन सामान्य पूजा-आरती ही हुई, समारोह रहे स्थगित

लक्ष्मण रेखा में रहे राम, पुजारी के अलावा कोई अंदर नहीं आया

खरगोन.
तिथि के अनुसार गुरुवार को रामनवमीं रही। सामान्य तौर पर इस दिन शहर भगवा पताकाओं से पटा रहता है। शोभायात्राएं निकलती हैं। राम मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ता है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं रहा। कोरोना को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंध इस आयोजन पर भी लागू रहे। भगवान राम खुद भी लक्ष्मण रेखा के दायरे में रहे। मंदिरों में केवल पुजारियों ने जन्मोत्सव पर पूजा-आरती की। न कोई समारोह न शोभायात्रा। सामान्य रूप में रामनवमीं मनाई गई।
नर्मदा नगर में स्थित रामकृष्ण नर्मदा मंदिर में भी पंडित काशीनाथ तारे ने ही पूजन किया। पंडित तारे ने बताया हर राम रामनवमीं पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सामूहिक आयोजन रद्द कर दिए गए। गुरुवार को भी भगवान का विशेष पूजन कर पंडित तारे ने ही आरती की। यह पहला अवसर था जब राम मंदिर में रामनवमीं पर इस तरह एकांत में पूजन हुआ है।

श्रीरामद्वारा मंदिर में भी नहीं आए श्रद्धालु
कुंदा नदी तट स्थित भावसार क्षत्रिय समाज के श्रीराम द्वारा मंदिर में भी गुरुवार को रामनवमीं का पूजन हुआ। पंडित सुशील अत्रे ने बताया दोपहर 12 बजे भगवान राम का पूजन आरती कर पट बंद कर दिए। हर साल यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन इस बार वैसा माहौल नहीं बना।

अन्य मंदिरों में भी ऐसा ही रहा माहौल
शहर के अन्य राम मंदिरों में भी रामनवमीं पर इसी तर्ज पर आयोजन हुए। रामनवमीं पर हर साल यहां शोभायात्रा निकलती है लेकिन कोरोना वायरस के चलते इसकी रूपरेखा ही तैयार नहीं हो पाई।

बिनासनी मंदिर का भंडारा भी नहीं हुआ
रामनवमीं पर हर साल कसरावद रोड स्थित बिनासनी माता मंदिर में भंडारा होता है। यहां एक दिनी मेला भी लगता है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं लेकिन यह आयोजन गुरुवार को नहीं हुआ। पूजारी पंडित सतानंद बार्चे ने यहां पूजन किया। यहां कुछ सालों से सामूहिक विवाह के कार्यक्रम भी रामनवमीं पर होते हैं, लेकिन इस बार वह भी नहीं हो पाए।