यहां काम करने के लिए कर्मचारियों को चढऩा पड़ता है पहाडिय़ों पर, जहां मिलता है नेटवर्क वहां चारपाई डाल बना लेते हैं चलता-फिरता ऑफिस

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Published: 17 Mar 2021, 07:59 PM IST

नौकरी का सवाल है...
पहाड़ी अंचल के ऐसे गांव जहां नेटवर्क नहीं, काम के लिए लेपटॉप लेकर पहाडिय़ां चढ़ते हैं कर्मचारी, ऊंचाई पर बैठते हैं
-काकोड़ा, मलगांव, कोठा बुजुर्ग में खेत, पहाड़ी या किसी ऊंचे स्थान पर बैठकर किया जा रहा काम, पीएम आवास के फार्म व आयुष्मान कार्ड भी ऐसे ही बनाए जा रहे हैं

यहां काम करने के लिए कर्मचारियों को चढऩा पड़ता है पहाडिय़ों पर, जहां मिलता है नेटवर्क वहां चारपाई डाल बना लेते हैं चलता-फिरता ऑफिस

खरगोन.
जिले का झिरन्या क्षेत्र। ऐसा इलाका जहां नेटवर्क की समस्या है। लेपटॉप, कम्प्यूटर व मोबाइल पर काम करने वालों के लिए यहां बड़ी चुनौतियां है। इसके बावजूद यहां कर्मचारी रोजाना नित नए हथकंडे अपनाकर अपनी नौकरी चला रहे हैं। आयुष्मान कार्ड बनाना हो, पीएम आवास योजना के फार्म भरना हो या खुद की अटेंडेंस, कर्मचारियों को लेपटॉप व मोबाइल लेकर पहाडिय़ों पर दौड़ते देखना कोई नई बात नहीं। सबसे ज्यादा दिक्कते ब्लॉक के काकोड़ा, मलगांव, कोठा बुजुर्ग में है। यहां शासकीय काम करने वाले कर्मचारी खेतों, पहाडिय़ों व ऊंचे पेड़ों पर चढ़कर अजीबो गरीब ढंग से काम को अंजाम दे रहे हैं।
कर्मचारियों ने बताया नेटवर्क की हर समय समस्या होने के बावजूद भी यहां पर मजदूरों को समय पर मजदूरी का भुगतान किया जाता है। गत वर्षों में भी समय पर भुगतान करने पर पूरे देश में झिरन्या जनपद को सम्मानित किया जा चुका है। आज भी यहां पहाड़ी अंचल में नेटवर्क की कमी के कारण ऐसी समस्या बनी रहती है।

जहां नेटवर्क वहां लगाई चारपाई और शुरू हो जाता है ऑफिस
जनपद सीईओ महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया पहाड़ी अंचलों में जहां नेटवर्क होता है, वहीं छाव में चारपायी या एक टेबल पर चौपाल लगाकर हितग्राहियों को भुगतान करते हैं। बुधवार को काकोड़ा, मलगांव व कोठा बुजुर्ग में खेत, पहाड़ी या किसी ऊंचे स्थान पर जहां नेटवर्क मिल जाता है, वहां लेपटॉप और डोंगल या मोबाइल नेटवर्क का उपयोग कर पीएम आवास और आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए।