इस जिले में 78 फीसदी बच्चे डिजीलैप शिक्षा से थे वंचित, अब हमारा घर-हमारा विद्यालय व मोहल्ला क्लास से कर रहे पढ़ाई

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Published: 13 Jul 2020, 11:07 AM IST

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते बच्चों का भविष्य भी अंधेरे में है। जुलाई माह से स्कूलों में बच्चों का शोरगुल शुरू हो जाता था। पढ़ाई चालू हो जाती थी, लेकिन महामारी के कारण स्कूल नहीं खुल रहे। ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए नई पहल शुरू की है। जिले के 1851 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में 1 लाख 34 हजार बच्चे दर्ज है।

Students' education started in homes

कटनी. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते बच्चों का भविष्य भी अंधेरे में है। जुलाई माह से स्कूलों में बच्चों का शोरगुल शुरू हो जाता था। पढ़ाई चालू हो जाती थी, लेकिन महामारी के कारण स्कूल नहीं खुल रहे। ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए नई पहल शुरू की है। जिले के 1851 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में 1 लाख 34 हजार बच्चे दर्ज है। पहले बच्चों को डिजीलैप के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही थी। बच्चों को डिजिटल मैटेरियल दे रहे थे। इसमें यह बात सामने आई कि 22 प्रतिशत बच्चों के पास ही मोबाइल है। शेष के पास नहीं है। 78 प्रतिशत बच्चे डिजिटल शिक्षा से वंचित थे। अब हमारा घर हमारा विद्यालय के नाम से अभियान चलाया जा रहा है। पाठ्यपुस्तक घर-घर जाकर पुस्तकें पहुंचाई गईं। अभिभावकों को भी मैसेज दिया गया। शिक्षकों ने भी पुस्तकें पहुंचाईं है। उन बच्चों को घर में पढऩे के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राज्य शासन के निर्देश पर से सुबह 10 बजे से घर में पढ़ाई कराई जा रही है। शासन ने अभिभावकों से कहा है कि घर में घंटी बजाकर कक्षा की शुरुआत कराएं। तीन समूहों में बच्चों को बांटकर पढ़ाई कराई जा रही है। अंकुर में कमजोर, तरुण में मध्यम और उमंग में बच्चे इबारती सवाल तक व अनुच्छेद की जानकारी वाले बच्चे शामिल किए गए हैं। बच्चों को वर्क बुक का भी वितरण किया गया। बुक के अनुसार तीनों समूहों के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इसमें एक पेज हिंदी, एक पेज अंग्रेजी, गणित, पहाड़ा याद कराया जा रहा है।

शिक्षक निभा रहे यह भूमिका
प्रत्येक शिक्षक कक्षा के पांच बच्चों से प्रतिदिन टेलीफोन से बात कर रहे हैं। जिनके पास मोबाइल नहीं है या अंकुर समूह के हैं उनके घर जाकर संपर्क कर रहे हैं। रिकॉर्ड भी डायरी में संधारित की जा रहा है। फील्ड में जिलेभर में 51 जन शिक्षक मॉनीटरिंग कर रहे हैं। इसमें देख रहे हैं शिक्षक काम कर रहे हैं कि नहीं, क्रॉस चेक भी किया जा रहा है। बच्चे भी पढ़ते मिल रहे हैं। जन शिक्षक भी मिल रहे हैं। मोहल्ला क्लास भी लगाए जाने के लिए पहल की जा रही है। यह पहले इसलिए की जा रही है जिसके यह पढ़ाई लायक माहौल नहीं है या उचित घर नहीं है वहां पर शिक्षकों द्वारा मोहल्ला क्लास से भी बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है।

इनका कहना है
हमारा घर हमारा विद्यालय व मोहल्ला क्लास के माध्यम से कक्षा एक से लेकर 8 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू करा दी गई है। लगभग सभी बच्चे इससे जुडऩे लगे हैं। लगातार मॉनीटरिंग भी की जा रही है। अभिभावकों को भी जागरुक किया जा रहा है।
विवेक दुबे, बीआरसी व नोडल अधिकारी।

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