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अमित शाह का इस चाणक्य ने संभाली कमान, मुलायम-मायावती के किले में खिलाएंगे कमल

By Vinod Nigam

Sep, 12 2018 11:02:27 (IST)

कानपुर-बुंदेलखंड की 10 में 9 पर बीजेपी का कब्जा, 18 लख दलितों के बुंदेलखंड की चार सीटों पर पार्टी ने फिर से झोंकी ताकत

कानपुर। लोकसभा चुनाव की डुगडुगी बच चुकी है और राजनीतिक दल एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए रणनीति बनाने में जुट चुके हैं। सत्ताधारी दल बीजेपी भी अपने गढ़ों को बचाने के लिए धुरंधरों की फौज लगानी शुरू कर दी है। लोकसभा चुनाव 2014 और विधानसभा चुनाव 2017 में मायावती के किले बुंदेलखंड को ढहाने वाले चाणक्य परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को एक फिर 10 लोकसभा सीटों में कमल खिलाने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सौंपी है। इसी के बाद से मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह एक्शन में आ गए हैं और 17 जिलों के बूथ प्रमुखों के अलावा विस्तारकों के साथ मंथन कर मुलायम और मायावती के अभेद किले में पार्टी को जिताने के लिए पसीना बहा रहे हैं।

हाथी का किया था सफाया
अखिलेश यादव और मायावती के बीच गठबंधन की आहट से बीजपी नेता खासे डरे हुए हैं और बुंदेलखंड और कानपुर जोन की जीती हुई सीटों पर कब्जा बरकरार रखने के लिए एड़ी चोटी को जोर लगा रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने आरएसएस से आए स्वतंत्रदेव सिंह को कानपुर-बुंदेलखंड परिक्षेत्र की जिम्मेदारी दी थी। करीब 18 लाख दलित बाहूल्य बुंदेलखंड की 4 सीटों पर स्वतंत्रदेव सिंह ने कमल खिलाने में अहम योगदान दिया था। स्वतंत्रदेव सिंह के कहने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली महोबा में कराई गई थी, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज की गई। रैली में करीब पांच लाख लोग पीएम मोदी को सुनने के लिए आए थे। लोकसभा की तर्ज पर अमित शाह ने विधनसभा चुनाव लड़ा और 19 की 19 सीटों पर भगवाध्वज फहराया।

कौन हैं स्वतंत्रदेव सिंह
स्वतंत्रदेव सिंह बुंदेलखंड के जलौन के रहने वाले हैं और पिछले 20 सालों से बीजेपी के सगंठन में कार्य कर रहे हैं। स्वतंत्रदेव सिंह आरएसएस ज्वाइन की और इस दौरान बतौर संघ प्रचारक नरेंद्र मोदी के साथ थैला लेकर गांव, गली, मोहल्लों का दौरा किया करते थे। स्वतंत्रदेव सिंह यूपी के अलावा पीएम मोदी के बुलावे पर गुजरात में भी जाकर पार्टी के लिए काम किया। बतौर प्रचारक नरेंद्र मोदी राममंदिर आंदोलन के पहले कानपुर आते थे तो स्वतंत्रदेव सिंह के घर जलौन में ठहरते थे। दोनों नेता वहां से कानपुर आते अैर गुरूदेव स्थित एक प्राईवेट स्कूल में बगैठकर बीजेपी के लिए जमीन तैयार करते थे। स्वतंत्रदेव सिंह ने कभी चुनाव नहीं लड़ा और पिछले साल जब बीजेपी यूपी में प्रर्चउ बहुमत के साथ जीती तो सीएम की दावेदारी में उनका भी प्रमुख तौर पर नाम सामने आया था।

अनुसूचित मोर्चा सक्रिय
स्वतंत्रदेव सिंह के आगवाई में कानपुर-बुंदेलखंड में पार्टी में दलितों का जनाधार बढ़ाने के लिए पार्टी का अनुसूचित मोर्चा सक्रिय हो गया है। आगामी लोकसभा चुनाव में दलित वोट बैंक बढ़ाने के लिए बूथ स्तर पर अनुसूचित जाति से जुड़े कार्यकर्ताओं को सेक्टर अध्यक्ष और बूथ अध्यक्ष की भूमिका में रखा जा रहा है। अनुसूचित मोर्चा की जिम्मेदारी प्रदेश सह प्रभारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को सौंपी गई है। सह प्रभारी ने बताया कि बीजेपी मतदाता सूची में नए नाम जुड़वाने के लिए अभियान चला रही है। विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं को इस संबंध में जुटने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर दलित मतदाताओं के नाम जुड़वाने में भाजपाई जुटे हैं। कार्यकर्ताओं को निर्देश हैं कि वे कागजी खानापूरी करवाने में लोगों का सहयोग करें। इसके साथ ही गलत नाम मतदाता सूची से हटवाने के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं।

गैर जाटव पर फोकस
बीजपी गैर जाटव मतदाताओं पर ज्यादा फोकस कर रही है। पार्टी में दलितों की भागेदारी बढ़ाने के लिए भाजपा की ओर से क्षेत्रीय स्तर पर सात घोषणाएं की गई। सभी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। तय किया गया कि क्षेत्र के सभी 17 जिलों में मोर्चे के जिलाध्यक्ष और कार्य समिति का गठन इसी महीने की 6 सितंबर तक कर लिया जाए। इसी तरह मंडलों की कार्यकारिणी की घोषणा भी 15 तक करने को कहा गया है। प्रदेश सह प्रभारी ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि 15 से 25 सितंबर के बीच जिला स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएं। इन बैठकों के जरिए लोगों को पार्टी से जोड़ने और आगामी चुनाव को लेकर रणनीति तैयार करने को कहा गया।

सेवा सप्ताह मनाएंगे मोर्चा
ओमप्रकाश ने बताया कि 17 से 25 सितंबर के बीच मोर्चा सेवा सप्ताह मनाएगा। इसके तहत दलित बस्तियों में सेवा कार्य करना और वहां रहने वालों को सुविधाएं दिलाने का काम किया जाएगा। बताया कि सभी बूथों में पांच-पांच युवाओं का जोड़ा जाएगा। कानपुर-बुंदेलखंड के मीडिया प्रभारी मोहित पांडेय ने बताया कि मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह की क्षवि इमानदार नेताओं में गिनी जाती है और उनकी पकड़ दलित वोटर्स में है। पार्टी उनके आदेशों के तहत कार्य कर रही है। कानपुर-बुंदेलखंड के 17 जिलों की 10 लोकसभा और 52 विधानसभा सीटों पर बूथों को पूरी तरह से मजबूत कर दिया है। हमारे पास 20 हजार से ज्यादा बूथ प्रमुख, 28 विस्तारक और 147 मंडल अध्यक्ष हैं। पार्टी के पास सवर्ण, दलित और ओबीसी मतदाताओं के पास अपनी बात पहुंचाने के लिए अगल-अगल संगठन है।