इस महिला अस्पताल में लौटा पुराना जमाना, ताकि बिना ऑपरेशन के हो प्रसव

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Updated: 27 Feb 2020, 12:52 PM IST

खान-पान और कामकाज से लेकर उठने बैठने का तरीका भी बदला गया
पुराने समय की दिनचर्या से गर्भवती महिलाओं में मिल रहे बेहतर नतीजे

कानपुर। आज के समय में गर्भधारण करने वाली ८० फीसदी महिलाओं में नौंवा महीना आते-आते ऐसी समस्याएं बढ़ जाती हैं कि आखिर में उन्हें ऑपरेशन से सही प्रसव करना पड़ता है। पर इसमें दोष महिलाओं का ही होता है। आज की दिनचर्या और उपलब्ध संसाधनों के चलते शरीर खुद ब खुद ऐसा हो जाता है कि सामान्य प्रसव की स्थिति नहीं रह पाती, जबकि ग्रामीण इलाकों में ऑपरेशन से प्रसव की नौबत कम ही आती है, ऐसा केवल शहरों में होता है। मतलब साफ है कि आधुनिक शहरी दिनचर्या से ही ऐसा होता है, इसलिए अपर इंडिया जच्चा-बच्चा अस्पताल में अब पुराना जमाना लौट आया है।

नियमित दिया जा रहा प्रशिक्षण
अपर इंडिया जच्चा-बच्चा अस्पताल की डॉक्टर, गर्भवती महिलाओं को सीजेरियन से बचाने के लिए पुराने जमाने के तरीके अपना रही हैं। पुराने जमाने के खान-पान, उठने-बैठने के तौर तरीके, व्यायाम का अस्पताल में ही नियमित प्रशिक्षण शुरू किया गया है, जिसके नतीजे बेहतर मिले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं से केस हिस्ट्री लेने पर 70 फीसदी महिलाओं में खान-पान को लेकर लापरवाही मिली है। प्रोटीन, विटामिन और खाने में कैलोरी की जानकारी उन्हें नहीं है।

खान-पान का प्लेसेंटा पर होता असर
शोधकर्ता प्रो. सीमा द्विवेदी के मुताबिक खान-पान खराब होने से प्लेसेंटा का विकास प्रभावित होता है। प्लेसेंटा कमजोर बनता है। प्लेसेंटा में ट्यूमर बनने की आशंका हो जाती है। इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। यूट्रस में बच्चे के फंसने की आशंका बढ़ जाती है। कई दिक्कतें यूट्रस में पैदा हो जाती हैं, जिससे सीजेरियन करने की जरूरत पड़ जाती है। प्रो.द्विवेदी के मुताबिक परम्परागत खानपान को लोग भूलते जा रहे हैं। सिर्फ खान-पान और व्यायाम से सीजेरियन से बचा जा सकता है।

एक घंटे के प्रशिक्षण से सुधार
अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का प्रशिक्षण एक घंटे के लिए चलता है। नॉर्मल डिलीवरी के लिए यह प्रशिक्षण शिविर काफी फायदेमंद है। चारमहीने की एक्सरसाइज से सीजेरियन से राहत मिल सकती है। आज कल ७० फीसदी गर्भवती महिलाएं खान-पान और व्यायाम को लेकर लापरवाह होती है। ऐसी महिलाओं को यहां खान-पान से लेकर उठने बैठने तक का प्रशिक्षण दिया गया। जिसका असर यह हुआ कि करीब दो सैकड़ा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी महिलाओं को सीजेरियन से बचाया गया। इस समय ३०० हाई प्रेग्नेंसी महिलाओं को रिसर्च में शामिल किया गया है।

काम आती यह सलाह
गर्भवती महिलाओं को प्रशिक्षण में पांच रंग के फल और दूसरी चीजों को खाने की सलाह गर्भवती महिलाओं को दूध, चोकर, दलिया समेत पांच रंग के फल और दूसरे विटामिन से भरपूर चीजों को खाने की सलाह प्रशिक्षण में दी जा रही है। प्रो. सीमा द्विवेदी के मुताबिक हरा, पीला, लाल, सफेद और भूरे रंगों वाले फल सब्जियों को खाने की सलाह दी जाती है। रंगों वाली सब्जियों, फलों में विटामिन, प्रोटीन, फाइबर उच्च गुणवत्ता वाली होती है।