इस युवक को लगी अजब-गजब की बीमारी, 24 दफा आग तो 12 बार लगा चुका फांसी

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Updated: 06 Oct 2019, 05:35 PM IST


डेढ़ साल पहले अचाकन पड़ा था बीमार, इलाज के बाद नहीं मिला आराम, डाॅक्टरों के मुताबिक विनोद मानसिक रोग से है ग्रसित।

कानपुर। जाको राखे साइयां मार सके न कोई...यह कहावत बांदा जिला निवासी एक युवक पर सटीक बैठती है। पिछले डेढ़ माह के दौरान युवक ने 24 दफा आंग तो 12 बार फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया, बावजूद उसकी मौत नहीं हुई। शनिवार को वह नीम के पेड़ पर फांसी का फंडा डालकर जैसे ही झूला, वैसे ही कुछ दूरी पर मौजूद लोगों ने किसी तरह से उसे पकड़ कर नीचे उतारा। कसाव ज्यादा होने के चलते वह बेहोश हो गया तो परिजन अस्पताल लेकर आए। प्राथमिक इलाज के बाद डाॅक्टरों ने कानपुर रेफर कर दिया। यहां एक प्राईवेट अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

नीम के पेड़ पर झूल गया
बांदा जिले के तिंदवारी थाना क्षेत्र अंतर्गत बेेंदा का निवासी विनोद कुमार (40) पुत्र बाबूलाल शनिवार को नीम के पेड़ पर फांसी का फंडा डालकर झूल गया। उसकी सांसें थमती, उससे पहले लोग दौड़ पड़े और किसी तरह से उसे नीचे उतारा और परिजनों को सूचना दी। परिजन जिला अस्पताल लेकर भागे। हालत गंभीर होने पर डाॅक्टरों ने कानपुर के लिए रेफर कर दिया। यहा एक प्राईवेट अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। डाॅक्टरों ने युवक की हालत ठीक बताई है।

कई डाॅक्टरों से करा चुके हैं इलाज
अस्पताल में मौजूद भाई राम खेलावन ने बताया कि विनोद का मेंटल हॉस्पिटल सहित कई जगह इलाज कराया लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ है। डेढ़ साल में करीब दर्जनों बार उसने आग लगाने व फांसी लगाकर जान देने का प्रयास किया, लेकिन हर बार परिजनों की सतर्कता से बच गया है। विनोद को अक्सर घर के अंदर ही रखते हैं और परिवार का एक सदस्य उसकी निगरानी करता है। लेकिन शनिवार को वह छत के जरिए घर के बाहर निकल गया और फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की।

मरने का हावी रहता जुनून
विनोद की शादी सात साल पहले हुई थी। उसके दो बच्चे भी हैं। शादी के छह साल तक तो विनोद ठीक रहा। लेकिन फिर उसे जान देने का जुजून सवार हो गया। राम खेलावन ने बताया कि घर में वह किसी के साथ मारपीट नहीं करता। समय से उठता है और बच्चों को खिलाता भी है। इस बीमारी से पहले विनोद प्राईवेट नौकरी करता था। पर इस बीमारी की चपेट में आने से वह हरदिन करने का प्लाॅन बनाता है। रामखेलावन ने बताया कि कानपुर, लखनऊ के कई डाॅक्टरों को दिखाया, लेकिन विनोद ठीक नहीं हुआ। वर्तमान में विनोद का इलाज ग्वालियर में चल रहा है।

मानसिक रोगी है विनोद
इस बारे में भागर्व अस्पताल के डाॅक्टर अशोक निगम बताते हैं, मानसिक रोग के लक्षण, हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। ये इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। मानसिक रोग किसी को भी हो सकता है, फिर चाहे वह आदमी हो या औरत, जवान हो या बुजुर्ग, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़। अगर मानसिक रोगी अच्छी तरह अपना इलाज करवाए, तो वह ठीक हो सकता है। वह एक अच्छी और खुशहाल जिंदगी जी सकता है। लेकिन ज्यादातर केस में लोग काउंसलिंग करवाने से डरते हैं कि लोग उन्हें पागल समझेंगे और समस्या बढ़ जाती है। विनोद भी इसी बीमारी से ग्रसित है। समय पर इलाज के बाद योगा करवाएं तो वह ठीक हो सकता है।