लॉकडाउन में शिक्षकों के लिए चलाया 'पठेतपुस्तकं' अभियान

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Published: 23 Apr 2020, 10:09 AM IST

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लॉकडाउन में शिक्षकों के लिए चलाया 'पठेतपुस्तकं' अभियान

जालोर. आज विश्व पुस्तक दिवस है। पुस्तकों का मानव जीवन और वैश्विक इतिहास में महत्व सभी जानते हैं। ऐसे में वैश्विक महामारी कोरोना जैसी संकट की इस घड़ी में जालोर के एक शिक्षक ने ऐसा नवाचार किया है जिससे ना केवल लोग घरों में रहकर पुस्तकें पढऩे में रुचि ले रहे हैं, बल्कि औरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के सदस्य जालोर निवासी संदीप जोशी की। इन्होंने इससे पहले भी नौनिहालों के बस्ते का बोझ कम करने के उपाय सुझाए और शासकीय स्तर पर मान्य भी हुए। इसी कड़ी में लॉकडाउन के दौरान जोशी ने 'पठेत पुस्तकम्Ó नाम से पुस्तक पढऩे का एक अभियान सोशल मीडिया पर शुरू किया जो काफी लोकप्रिय भी हुआ है। वहीं इस अभियान की जानकारी मिलने पर निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर सौरभ स्वामी ने भी छुट्टियों में शिक्षकों के लिए जारी की गई एडवाइजरी में पुस्तक पढऩे के आग्रह को प्रमुखता से स्थान दिया है। वहीं पाली मंडल के संयुक्त निदेशक श्यामसुंदर सोलंकी ने भी इस अभियान की सराहना कर पुस्तक पढ़ते हुए अपनी फोटो शेयर की है। ऐसे में राजस्थान समेत देशभर के कई शिक्षक इन दिनों समय निकालकर पुस्तकों का अध्ययन करने में जुटे हुए हैं। ये शिक्षक ना केवल पुस्तकें पढ़ रहे हैं, वरन उसमें से उपयोगी व प्रेरणादायक बातें निकाल कर उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर कर उनका संकलन भी कर रहे हैं।
14 मार्च से शुरू हुआ अभियान
दरअसल, राज्य के स्कूलों में बच्चों के लिए 14 मार्च से ही अवकाश घोषित हो गए थे, लेकिन शिक्षकों को विद्यालय जाना था। बिना बच्चे शिक्षक विद्यालय में करते भी क्या। ऐसे में पहले ही दिन 14 मार्च से प्राध्यापक जोशी ने यह अभियान शुरू कर दिया। जिसका नाम 'पठेत पुस्तकम्Ó आइए एक पुस्तक पढ़ें... रखा गया। इसके बाद 22 मार्च को सम्पूर्ण लॉकडाउन के बाद इस अभियान को अच्छी गति मिली। अभियान में शिक्षकों से अपनी रुचि की कोई भी एक पुस्तक पढऩे का आग्रह किया गया। इसके लिए सोशल मीडिया का पूरा उपयोग किया गया। वॉट्सएप पर विभिन्न समूहों व ब्रॉडकास्ट लिस्ट के माध्यम से कई शिक्षकों को व्यक्तिगत संदेश भेजे गए। वहीं फेसबुक से इसे एक जन अभियान का रूप दिया गया।
दो चरणों में चल रहा अभियान
अभियान के पहले चरण में शिक्षकों को पुस्तक पढ़ते हुए अपना फोटो भेजना था। जिसे फेसबुक पेज पर लगाया गया। कई शिक्षकों ने ऐसे फोटो भी भेजे। वहीं दूसरे चरण में लोगों को अपने द्वारा पढ़ी हुई पुस्तक में से 10 श्रेष्ठ प्रेरणादायक पंक्तियां निकाल कर शेयर करने को कहा गया। जिसके बाद पिछले तीन दिन में 25 से अधिक पुस्तकों का सारांश प्राप्त हो चुका है। अभियान में निबंध, कविता, कहानी, उपन्यास, आत्मकथा, जीवनी, यात्रा वृतांत, प्राचीन भारतीय साहित्य, समकालीन विमर्श, विज्ञान, गणित, इतिहास, महाकाव्य, अर्थशास्त्र दर्शन आदि भी पढ़ी जा सकती हैं।
बेहतर है अभियान...
इस अभियान के बाद शिक्षकों के लिए इसे उपयोगी मानते हुए एक विस्तृत आदेश भी निकाला था। प्रत्येक जिले से बेस्ट आने वाले के बारे में विभागीय शिविरा मैग्जीन में उसका प्रकाशन भी किया जाएगा और उसे इनाम भी दिया जाएगा। मैंने भी इसमें एक पुस्तक का सारांश लिखा है। यह बहुत अच्छा अभियान है। अगर सारे चार लाख शिक्षक ऐसा करते हैं तो हमें साढ़े चार लाख किताबों का एक सारांश मिलेगा जो राज्य ही नहीं, पूरे देश में सबसे बेहतर होगा।
- सौरभ स्वामी, निदेशक, शिक्षा विभाग, बीकानेर
कोरोना महामारी में तनावमुक्त रहकर मनोबल बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुस्तकें इस कार्य में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकती हैं। इसीलिए इस अभियान की शुरुआत की गई थी। वैसे 100 से अधिक पुस्तकों का सार प्राप्त होने पर उनका संकलन कर एक पुस्तक निकालने की भी योजना है।
- संदीप जोशी, सदस्य, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद