यहां सोशियल डिस्टेंसिंग के निर्देश तार-तार, वेडिय़ा में दवाई की दुकानों पर नीम-हकीम कर रहे इलाज

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Published: 02 Apr 2020, 10:41 AM IST

एक साथ पांच-पांच मरीजों को कर रखा है कक्ष में भर्ती, चिकित्सा प्रभारी व बीसीएमओ ने जताई लाचारी
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यहां सोशियल डिस्टेंसिंग के निर्देश तार-तार, वेडिय़ा में दवाई की दुकानों पर नीम-हकीम कर रहे इलाज

वेडिय़ा. कोरोना पर अंकुश लगाने को लेकर कलक्ट की ओर से जारी एडवाइजरी कागजी शेर साबित हो रही है। कोरोना पर लगाम लगाने के तमाम प्रयासों को कुछ लोग धत्ता बताते हुए इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला जालोर जिले के वेडिय़ा गांव का है। यहां दवाइयों की दुकानों व निजी क्लीनिक पर नीम-हकीमों को बिठा रखा है। चिंता की बात यह है कि सोशियल डिस्टेंसिंग को दरकिनार कर ये एक ही कक्ष में पांच-पांच मरीजों को भर्ती कर रहे हैं। इस बारे में प्रभारी डूंगरी चिकित्सक व बीसीएमओ भी लाचारी जताते नजर आए। बीसीएमओ तो इसे काफी हल्के में ले रहे थे। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि वेडिय़ा में एक भी एमबीबीएस प्रेक्टिस में नहीं होने से इमरजेंसी में आने वाले मरीज मजबूरी में इन नीम-हकीमों का शिकार हो रहे हैं।
सरकारी अस्पताल नहीं होने से भुगत रहे लोग
वेडिय़ा में सरकारी स्वस्थ्य केंद्र नहीं होने से आमजन को काफी परेशानी का सामना करन पड़ता है। यहां से 8 से 10 किमी दूर डूंगरी में सरकारी अस्पताल है। मरीजों की इसी मजबूरी का फायदा झोलाछाप उठा रहे हैं। एक दिन पूर्व एक निजी क्लीनिक पर कई मरीजों का एक साथ इलाज किया जा रहा था, लेकिन कोरोना को लेकर सोशल डिस्टेंस का असर यहां कहीं देखने को नहीं मिला।
बेड पर भी गंदगी
इन मेडिकल स्टोर पर मरीजों को लिटाने के लिए व्यवस्थित बेड तक नहीं हैं। बेड की अस्त व्यस्त दशा मरीजों की तकलीफें कम करने की बजाय और बढ़ा रही है। पंखे और उजाले के बिना तो रात में वो ही मरीज यहां रुक पाते हैं, जिनके पास झोलाछाप की मोटी फीस का जुगाड़ हो। कारण कि रात में यहां ना तो झोलाछाप मिलता है और ना ही दवा। इसके बावजूद चिकित्सा महकमा इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
ऐसे थे जिम्मेदारों के जवाब
पत्रिका की ओर से इस मामले में प्रभारी अधिकारी डूंगरी डॉ. रामलाल विश्नोई व बीसीएमओ से भी बातचीत की गई। पेश है बातचीत के कुछ अंश...
पत्रिका : वेडिया में कई मेडिकल स्टोर्स पर नीम हकीम अवैध रूप से मरीजों का उपचार कर रहे हैं। कार्रवाई कब करेंगे।
बीसीएमओ : लोगों को सरकारी अस्पताल में जाने से किसने रोका है। वहां डॉक्टर हैं और सभी सुविधाएं भी हैं, लेकिन वे समझते ही नहीं।
पत्रिका : कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। कोरोना के बावजूद यहां एक साथ कई मरीजों का उपचार हो रहा है।
बीसीएमओ : ऐसा मामला है तो कल परसों में आकर देखता हूं।
पत्रिका : वेडिय़ा गांव में चार-पांच नीम हकीम लोगों का लापरवाही पूर्ण इलाज कर रहे हैं। आपके क्षेत्राधिकार में आता है आप कुछ करते क्यों नहीं?
डूंगरी पीएचसी प्रभारी : कोरोना से पहले भी हमने उन्हें समझाया था। कई बार बीसीएमओ को टीम गठित करने के लिए लेटर भी लिख चुका हूं। फिर भी एकबार भी टीम गठित नहीं की।