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सड़क हादसे कैसे रुकेंगे, रिफ्लेक्टर ही नहीं बांटे?

By Shailendra Agarwal

Sep, 12 2018 09:43:04 (IST)

- लोकायुक्त ने राजस्थान पत्रिका की खबर पर लिया प्रसंज्ञान
- पुलिस महानिदेशक, परिवहन उपायुक्त से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब

लोकायुक्त ने बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी व ट्रेक्टर ट्रोली के कारण रात को होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए 2 साल पहले खरीदे गए एक करोड़ रुपए के रिफ्लेक्टर उपयोग में नहीं आने पर सवाल उठाया है। रिफ्लेक्टरों के नहीं बंटने पर लोकायुक्त ने स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर पुलिस महानिदेशक व परिवहन उपायुक्त (सड़क सुरक्षा) से 8 अक्टूबर तक तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।
लोकायुक्त एस एस कोठारी ने राजस्थान पत्रिका में 28 अगस्त को 'सांसों की भी परवाह नहीं, रिफ्लेक्टर खरीदे मगर बांटे नहींÓ शीर्षक से प्रकाशित समाचार पर स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया है। समाचार में उजागर किया कि बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी एवं टेक्टर ट्रोली से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने लिए दो साल पहले एक करोड़ रुपए के उपकरण खरीदे गए, लेकिन इनका वितरण अब तक जयपुर के आसपास के इलाकों में भी नहीं हुआ है। सवाई माधोपुर जिले में रिफ्लेक्टर थानों में जमा हैं, जबकि परिवहन विभाग व पुलिस मुख्यालय के केंद्रीय भंडार को रिफ्लेक्टरों के वितरण की जानकारी ही नहीं है। समाचार में यह भी बताया कि ट्रेक्टर ट्रोली के पीछे रिफ्लेक्टर नहीं लगे होने से नागौर-जयपुर हाइवे पर सड़क दुर्घटना में कार सवार पांच दोस्तों में से 4 की मौत होने मा मामला सामने आ चुका है।
लोकायुक्त ने मानी लोकसेवकों की कर्तव्यहीनता
लोकायुक्त कोठारी ने माना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला सम्बंधित लोकसेवकों की कर्तव्यहीनता व उदासीनता का है। सड़क सुरक्षा के लिए अभियान चलाने के बावजूद इन उपकरणों को बांटे नहीं जाने को गंभीरता से लिया है। साथ ही, परिवहन विभाग की ओर से अब तक सड़क सुरक्षा के लिए की गई कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी है, वहीं परिवहन विभाग की ओर से आवंटित बजट से खरीदे गए रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप, सरकूलर रिफ्लेक्टिव व रेट्रो टेप के वाहनों पर उपयोग की स्थिति की जानकारी बताने को कहा है। इनसे जुडे़ दस्तावेज व रिपोर्ट भी तलब किए गए हैं।
8 तक मांगी पत्रावली
लोकायुक्त कोठारी ने पुलिस महानिदेशक से वह पत्रावली पेश करने को कहा है, जिसके जरिए परिवहन विभाग से जारी एक करोड़ रुपए के बजट से रिफ्लेक्टर आदि की खरीद की गई। इन उपकरणों के वितरण व उपयोग की पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट भी 8 अक्टूबर तक मांगी है।