राजस्थान: लॉकडाउन 4 के बीच गहलोत सरकार की किसानों को बड़ी राहत, जानें क्या लिया फैसला

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Updated: 22 May 2020, 09:03 AM IST

राजस्थान की गहलोत सरकार ने कृषक कल्याण शुल्क को लेकर खाद्य पदार्थ से जुड़े प्रदेशभर के व्यापारियों एवं उद्योगों की चिंताओं को समझते हुए उन्हें राहत देने का महत्वपूर्ण निर्णय किया है।

जयपुर। राजस्थान की गहलोत सरकार ने कृषक कल्याण शुल्क को लेकर खाद्य पदार्थ से जुड़े प्रदेशभर के व्यापारियों एवं उद्योगों की चिंताओं को समझते हुए उन्हें राहत देने का महत्वपूर्ण निर्णय किया है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निर्देश दिए हैं कि ज्वार, बाजरा, मक्का, जीरा, ईसबगोल सहित जिन कृषि जिंसों पर मंडी शुल्क पचास पैसा प्रति सैकड़ा है, उन पर कृषक कल्याण शुल्क की वर्तमान दर दो रूपए प्रति सैकड़ा के स्थान पर पचास पैसा प्रति सैकड़ा लगाई जाए।

इसी तरह से तिलहन-दलहन, गेहूं सहित जिन कृषि जिंसों पर मंडी शुल्क की दर एक रूपया तथा एक रूपया 60 पैसा प्रति सैंकड़ा है उन पर भी वर्तमान में लगाई जा रही दो रूपए प्रति सैकड़ा के स्थान पर एक रूपया प्रति सैकड़ा किया जाए। ऊन को कृषक कल्याण शुल्क से मुक्त रखा जाएगा।

सीएम गहलोत ने गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर खाद्य पदार्थ के कारोबार से जुड़े प्रदेशभर के व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद यह निर्णय किया। इससे पहले इस संबंध में उन्होंने बीते दिनों हुई वीडियो कॉफ्रेंस के दौरान मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, उद्यमियों से भी राय जानी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषक कल्याण शुल्क के कारण उद्योगों एवं व्यापारियों को हो रही तकलीफ का एहसास राज्य सरकार को है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के खाद्य पदार्थ से जुड़े कारोबारियों एवं कृषि प्रसंस्करण उद्योगों को राहत मिलेगी। प्रतापगढ़, झालावाड़, बांसवाड़ा, जालौर, सिरोही, कोटा, बारां, भरतपुर, धौलपुर, अलवर सहित प्रदेश के अन्य सीमावर्ती जिलों में पड़ोसी राज्यों के मुकाबले दरों का अंतर कम होगा और उन्हें प्रतिस्पद्र्धात्मक रूप से व्यापार करने में आसानी होगी। व्यापार बढ़ने से राज्य सरकार का राजस्व बढ़ेगा साथ ही करापवंचन भी रूक सकेगा।

गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषि प्रसंस्करण उद्योगों एवं कृषि व्यवसाय को प्रोत्साहित किए जाने की दृष्टि से राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति लाई गई है। कृषि जिंसों पर प्रभारित होने वाली दरों को औचित्यपूर्ण किए जाने से कृषि प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और वे अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पद्र्धात्मक हो सकेंगे। इन उद्योगों को बढ़ावा मिलने से किसानों को भी अपनी उपज उचित दरों पर बेचने के अधिक अवसर मिल सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के इस दौर में प्रदेश के व्यापारी वर्ग ने हमारे ‘कोई भूखा न सोए‘ के संकल्प को साकार करने में पूरी मदद की है। राज्य सरकार ने मंडी व्यापारियों के हित में पूर्व में कई निर्णय किए हैं। हमारा हमेशा यह प्रयास रहा है कि प्रदेश में कारोबार को बढ़ावा मिले और ईमानदारी से व्यापार करने वाले लोगों को प्रोत्साहन मिले।

चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि आढ़तियों की वाजिब मांगों के प्रति सरकार का नजरिया संवेदनशील है। मुख्यमंत्री कोरोना से निपटने के लिए लगातार सभी वर्गों के हित में निर्णय ले रहे हैं। यह उनके कुशल प्रबंधन का ही परिणाम है कि राजस्थान ऎसी चुनौती का मजबूती से सामना कर पा रहा है।