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जो मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग, उस पर विधानसभा में कैसे हो सकती है चर्चा-कटारिया

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Jan, 23 2020 06:43:27 (IST)

राजस्थान विधानसभा का सत्र 24 जनवरी से शुरू हो रहा है। इसे लेकर गुरुवार को भाजपा मुख्यालय पर विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में सत्र को लेकर चर्चा हुई। भाजपा ने विधानसभा सत्र को लेकर व्हीप भी जारी कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने व्हिप जारी करते हुए विधायकों को निर्देश दिए है कि किसी भी विषय पर यदि मतदान हो तो पार्टी के पक्ष में मतदान करें। बैठक में सत्ता पक्ष को घेरने की रणनीति भी बऩाई गई।

जयपुर।

राजस्थान विधानसभा का सत्र 24 जनवरी से शुरू हो रहा है। इसे लेकर गुरुवार को भाजपा मुख्यालय पर विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में सत्र को लेकर चर्चा हुई। भाजपा ने विधानसभा सत्र को लेकर व्हीप भी जारी कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने व्हिप जारी करते हुए विधायकों को निर्देश दिए है कि किसी भी विषय पर यदि मतदान हो तो पार्टी के पक्ष में मतदान करें। बैठक में सत्ता पक्ष को घेरने की रणनीति भी बऩाई गई।

बैठक के बाद कटारिया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केस पेंडिंग हैं, जिसमें चार सप्ताह का समय दे दिया है। न्यायालय में पेंडिंग केस पर किसी प्रकार की चर्चा विधानसभा में हो ही नहीं सकती। अब ये कर रहे हैं तो कानून तोड़ेंगे और जब कानून तोड़ेंगे तो इनसे कैसे फेस करना है ये हम वहीं तय करेंगे। बैठक में आरएलपी के विधायक नहीं पहुंचे। भाजपा के कुल 57 विधायक उपस्थित रहे। बैठक में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, राष्ट्रीय सह संगठन प्रभारी वी. सतीश, प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ भी मौजूद रहे।

विधानसभा सत्र बुलाना इनकी असफलता का द्योतक

कटारिया ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी असफलता का द्योतक है, कल का विधानसभा सत्र को बुलाना। एससी एसटी आरक्षण दिसंबर में ही लोकसभा और राज्यसभा में पारित कर दिया इसमें आधे राज्यों की भी सहमति आवश्यक होती है और वो सहमति दुर्भाग्य से राजस्थान की सरकार और राजस्थान का प्रशासनिक तंत्र नहीं दे पाया। मैं जिसकों शब्दों में क्या कहूं निर्लजता का काम किया है। इसे 25 जनवरी 2020 तक पास करवाना है। क्या राज्य सरकार इसको 15 दिन पहले नहीं कर सकती थी क्या राजस्थान की कांग्रेस सरकार नींद में थी जिसके कारण विधानसभा की सारी परम्पराओं को ताक में रखा गया और अब आनन फानन में सत्र बुलाया गया है।

अभिभाषण सुनो और घर चले जाओ

कटारिया ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण का सत्र 21 दिन के नोटिस पर बुलाया जाता है लेकिन इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि इतने शॉर्ट नोटिस पर सत्र आहूत किया गया है। विधायकों को इसी 21 दिन के अंदर अपने प्रश्नों को तैयार करने का समय मिलता है और ना तो विधायक प्रश्नों की तैयारी कर पाए और ना ही सरकार राज्यपाल के अभिभाषण की तैयारी कर पाई।

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