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न्याय मिला, स्वीकार्यता कब मिलेगी?

By Ankita Sharma

Sep, 12 2018 03:21:33 (IST)

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ही 2013 के दो सदस्यीय बेंच के फैसले को बदल दिया

इन दिनों देश में समलैंगिकता को लेकर बहस जारी है, एक तबका सुप्रीम कोर्ट के सेक्शन 377 पर आए फैसले से खुश है तो समाज का दूसरा तबका इसे अभी भी सामाजिक तौर पर स्वीकार नहीं कर पा रहा है। आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ही 2013 के दो सदस्यीय बेंच के फैसले को बदल दिया। इसके साथ ही बदल गई डेढ़ सौ साल पुरानी वह बंदिश, जो समलैंगिकता को अपराध साबित करती थी। संविधान पीठ के इस फैसले के बाद अब बालिगों के बीच समलैंगिकता अपराध नहीं होगी हालांकि बिना सहमति के बनाया गया समलैंगिक सम्बंध अब भी अपराध होगा। यहां सवाल ये उठता है कि समलैंगिकों को न्याय तो मिला है, लेकिन समाज का साथ कितना मिलेगा। इससे पहले भी कई ऐसे फैसले आए हैं, जब कोर्ट ने समाज की सकारात्मकता के लिए फैसले दिए , लेकिन समाज ने आज भी अपनी सोच नहीं बदली फिर बात चाहे डायन प्रथा की हो, दहेज प्रथा की हो या फिर बाल विवाह की।