बदलाव :तकनीक के इस्तेमाल से खेती-बाड़ी ऑनलाइन, अपडेट हो रहे काश्तकार

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Published: 28 Mar 2021, 03:43 PM IST

समय के साथ अब सरकार भी कृषि क्षेत्र में तकनीकी की मदद से बदलाव लाने में जुटी है। इसका भरपूर इस्तेमाल करते हुए नई संभावनाएं खोजने और युवाओं को कृषि से जोडऩे के प्रयास किए जा रहे हैं।

जयपुर। समय के साथ अब सरकार भी कृषि क्षेत्र में तकनीकी की मदद से बदलाव लाने में जुटी है। इसका भरपूर इस्तेमाल करते हुए नई संभावनाएं खोजने और युवाओं को कृषि से जोडऩे के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही किसानों को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने की कवायद भी चल रही है, जिससे कि किसानों की समस्याओं का सामाधान तुरंत हो जाए। उन्हें नवाचार, खराबे, बीमा, बीमारी, दवा समेत नित नए प्रयोग के बारे में जानकारी मिलती रहे और वे योजनाओं का भी भरपूर लाभ उठा सकें। साफ है कि, खेती-किसानी को सरल बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। दरअसल, तकनीक के दौर में जहां हर कोई आगे बढ़ रहा है, वहीं किसान और खेती पीछे क्यों रहे। इसमें भी नई संभावनाएं खोजते हुए देशभर में नवाचार (इनोवेशन) को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग ने अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) शुरू किया है। इसके अंतगर्त कर्नाटक समेत कई राज्यों में निजी कंपनियां भी राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जुट गई है। हालांकि यहां भी राज्य सरकार ने इस क्षेत्र में कदम बढ़ाए हैं। तकनीक के प्रयोग से किसानों का सीधे सरकार एवं विभाग से जुड़ाव को लेेकर प्रयास जारी है। राज्य में लाखों किसान डिजिटल प्लेटफार्म पर जुड़ भी गए हैं। साफ है कि, खेती-बाड़ी में तकनीकी उपयोग किसानों के लिए संजीवनी साबित होगा।

ड्रोन से टिड्डी पर नियंत्रण
टिड्डी के प्रकोप से निपटने के लिए ड्रोन का प्रयोग किया गया। यह प्रयोग सबसे पहले यहीं हुआ है। यह फायदेमंद भी रहा। किसानों के खेत के नुकसान आदि की शिकायत व डेटा जुटना भी सब ऑनलाइन हो गया है। सैटेलाइट के माध्यम से विभिन्न फसलों के रकबे एवं खराबे की मेपिंग कराने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है ताकि बीमा दावों का ज्यादा पारदर्शी तरीके से निस्तारण हो। यह खेत से सीधे कर सकते हैं। स्प्रे भी स्वचालित मिलने लगे हैं। हालांकि कटाई-बुवाई में पहले तक तकनीकी इस्तेमाल हो रहा है।

व्हाट्सएप पर जुड़े पांच लाख से ज्यादा किसान
कृषि विभाग की विभागीय योजनाओं, खेती के उन्नत तरीकों एवं नवाचारों की जानकारी आम किसान तक तुरंत पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहा है। प्रदेशभर के किसानों को व्हाट्सएप पर जोड़ा गया है। पांच हजार व्हाट्सएप गु्रप बनाए गए हैं, जिनमें करीब 5 लाख से अधिक किसानों को इसमें जोड़ा गया है। इसमें सीकर और जयपुर जिले के किसान सर्वाधिक हैं। इन गु्रप्स के संचालन का जिम्मा पर्यवेक्षकों को दिया गया है।

तुरंत मिल रहा समस्याओं का समस्या
किसानों को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने की कवायद जोरों से जारी है। बीमा, मुआवजा या अन्य जानकारी एक ही स्थान पर मुहैया कराने के लिए यहां राज किसान साथी पोर्टल बनाया है। इस पेपरलेस प्रक्रिया के माध्यम से एक ही स्थान पर किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं की सम्पूर्ण जानकारी और लाभ लिया जा सकता है। आवेदनों की ऑनलाइन जांच, भौतिक सत्यापन, जियो टैगिंग और ऑनलाइन प्रशासनिक-वित्तीय स्वीकृति व डीबीटी आधारित भुगतान की प्रक्रिया आदि।

यह भी आया सामने
बीज उत्पादन के लिए किसानों के ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो गए हैं। उद्यान विभाग की ड्रिप, स्प्रिंकलर, रेनगन आदि के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया विकसित की गई है। बीटी कपास के विक्रेताओं व सिंगल सुपर फास्फेट के निर्माताओं के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया विकसित की गई। बीज के नमूनों के लिए राज एग्रीक्यूसी मोबाइल एप भी विकसित किए गए।

150 एप भी जल्द होंगे लॉन्च
खेती-बाड़ी के सरलीकरण के लिए 150 नए एप और बन रहे हैं, जो कृषि और किसान के लिए संजीवनी साबित होंगे। इसके तहत किसानों को फंड, मुआवजा, शिकायत, मौका-मुआयना आदि के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सबका समाधान ऑनलाइन हो जाएगा।