CJI Arvind Bobde ने कहा, न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के तौर तरीकों को बदलना होगा

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Published: 06 Mar 2021, 03:04 PM IST

-राज्य न्यायिक अकादमी के डायरेक्टर्स रिट्रीट के शुभारंभ के मौके पर बोले CJI Arvind Bobde

जबलपुर. CJI Arvind Bobde ने कहा, न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के तौर तरीकों को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि न्यायदान अनोखी प्रक्रिया है। न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षित करना और भी रोचक विषय है। वह राज्य न्यायिक अकादमी के डायरेक्टर्स रिट्रीट के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम एक संवाद स्थापित करेगा। इस मौके पर सीजेआई ने कोर्ट्स ऑफ इंडिया पुस्तक की प्रशंसा भी की।

सीजेआई शरद अरविंद बोबडे़ ने कहा, यह कार्यक्रम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। नई प्रक्रिया की शुरूआत है। संवाद नए आयाम को स्थापित करता है। न्याय एक अनोखी प्रक्रिया है। आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक व्यवस्था जरूरी है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को भी जज के कार्य को लेकर जिज्ञासा थी। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम एक बार हैदराबाद हाईकोर्ट पहुंचे, वहां रोचक अनुरोध किया। वे बोले कि मैं न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठना चाहता हूं। बार में खड़े होकर वकील की तरह बहस करना चाहता हूं। सीजेआई ने कहा कि एक न्यायधीश बनने के लिए क्या आवश्यक है? क्या केवल विधि का ज्ञाता ही अच्छा जस्टिस बन सकता है? मुझे बताया गया है कि कुछ प्रदेशों में चयनित न्यायाधीशों को पहले अकादमी बुलाया जाता है। कई न्यायालयों में कोर्ट में जाने के बाद प्रशिक्षण दिया जाता है। मेरे विचार से न्यायालय भेजने से पहले प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

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इस मौके पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक ने कहा कि न्यायाधीशों के प्रशिक्षण के लिए इस संस्थान को शुरू किया गया। देश के सभी न्यायिक अकादमी के सहयोग से इसे उत्कृष्ट बनाने का प्रयास है। 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती मनाई जा रही है। यह देश में आयोजित किया जाने वाला पहला कार्यक्रम है। 2003 में अकादमी का भवन तैयार हुआ। नया भवन 50 एकड़ भूमि में तैयार हो रहा है। भोपाल और ग्वालियर में भी इसकी बेंच खोलने का प्रस्ताव है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि, न्यायपालिका सरकार की रीढ़ है। न्यायपालिका का चेहरा और रीढ़ जिला स्तर की अदालतें हैं। इस स्तर के न्यायिक अधिकारी उच्च स्तर के प्रशिक्षण के हकदार हैं। राज्यपाल ने कहा कि किस स्तर पर, किस क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद लेनी है, इस पर विचार किया जाना चाहिए।

उन्होने कहा कि समाज की तस्वीर महिलाओं की दशा से उजागर होती है। ऐसे में महिलाओं के मामलों में न्यायदान के तरीकों पर विचार होना चाहिए। परिवारिक विवादों के समाधान में नारी अदालत, गणमान्य नागरिकों की समिति बनाकर समाधान करना कारगर हो सकता है। उन्होंने यौन हिंसा के मामले में और सशक्त दृष्टिकोण से न्यायिक प्रक्रिया को संचालित करने की सलाह भी दी।