'ऑक्सीजन की कमी से औद्योगिक इकाइयों की टूट रही सांस

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Published: 18 Sep 2020, 07:55 PM IST

जबलपुर जिले में 150 से ज्यादा इंडस्ट्री में होता है फेब्रीकेशन इंडस्ट्री

'ऑक्सीजन की कमी से औद्योगिक इकाइयों की टूट रही सांस

यह है स्थिति
- 150 से अधिक इकाइयां ऑक्सीजन पर निर्भर जिले में।
-50 से अधिक इकाइयां रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में।
- 150 से 180 सिलेंडर की रोजाना होती है आवश्यकता।
- 01 एयर सेपरेशन और तीन रिफिलिंग प्लांट शहर में।

जबलपुर। ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई पर रोक के कारण जबलपुर जिले की कई औद्योगिक इकाइयों की हालत पतली होने लगी है। कटिंग और फेब्रीकेशन से जुड़ा काम लगभग ठप है। ऐसी 150 से ज्यादा इकाइयां हैं जो रिछाई, अधारताल और उमरिया-डुंगरिया औद्योगिक क्षेत्र में संचालित हैं। कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या और ऑक्सीजन की कमी के कारण प्रशासन ने इंडस्ट्रीयल सप्लाई पर रोक लगा दी थी। अब उद्योगपति प्रशासन से वैकल्पिक इंतजाम की मांग कर रहे हैं। जिले में 60 से 70 फीसदी औद्योगिक इकाइयां ऐसी हैं, जिनमें फेब्रीकेशन का काम होता है। रिछाई में सबसे ज्यादा फैक्ट्री हैं। इनकी संख्या 50 से अधिक है। गैस कटर मशीन और प्रोफाइल गैस कटिंग मशीन में ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है। मेटल सीट से लेकर दूसरे कलपुर्जों को तैयार करने के लिए ऑक्सीजन से कटिंग की जाती है। जहां पहले से स्टॉक था, वहां तो अब तक काम चल गया लेकिन कुछ जगह इससे जुड़ा काम पूरी तरह बंद हो गया है। ऑक्सीजन की कमी के कारण अब जिन भी इंडस्ट्री में काम बंद हो रहा है, वहां मजदूरों को भी बेरोजगार होना पड़ा है। उन्हें कुछ दिनों के लिए बिठा दिया गया है। इनमें मशीन चलाने वाले श्रमिक ज्यादा हैं। हालांकि सीओ2 गैस की कमी नहीं है, ऐसे में बेल्डिंग वर्ग चल रहा है। अब विकल्प के तौर पर कुछ श्रमिकों को वहां शिफ्ट किया जा रहा है।

150 से ज्यादा सिलेंडर की जरूरत
जिलें में औद्योगिक इकाइयों को रोजाना 150 से 180 सिलेंडर की जरूरत होती है। अभी एक भी सिलेंडर नहीं मिल रहा। रिछाई स्थित एयर सेपरेशन प्लांट से तो एक भी सिलेंडर उन्हें नहीं दिया जा रहा है। उद्योग विभाग ने यहां पर अधिकारियों की 24 घंटे तैनाती की है। बाकी तीन रिफिलिंग प्लांट हैं। वहां से भी अस्पतालों में सिलेंडर भेजा जा रहा है। जबलपुर में ऑक्सीजन की मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। यहां एक एयर सेपरेशन और दो रिफिलिंग प्लांट हैं। इन सभी की क्षमता करीब 15 सौ सिलेंडर रोज की है। अभी की स्थिति में अकेले मेडिकल कॉलेज में 300 से 500 सिलेंडर प्रतिदिन जा रहे हैं। विक्टोरिया तथा निजी अस्पताल में भी इससे ज्यादा सिलेंडर लगते हैं। आसपास के कुछ जिलों में भी सप्लाई इन्ही प्लांट से होती है। ऐसे में इंडस्ट्री के लिए कुछ बचता ही नहीं है। महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र देवब्रत मिश्रा ने बताया कि जिले में अभी अस्पताल की आवश्यकताओं के अनुरूप ही ऑक्सीजन का उत्पादन हो पा रहा है। प्लांट संचालकों को उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है। चिकित्सकीय आवश्यकता की प्रतिपूर्ति हो जाएगी, तो बाकी ऑक्सीजन इंडस्ट्री को देने का प्रयास किया जाएगा। महाकोशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रवि गुप्ता ने बताया कि अस्पतालों को ऑक्सीजन की सप्लाई निश्चित रूप से होनी चाहिए। लेकिन, कुछ मात्रा इंडस्ट्री को मिलेगी तो उनका उत्पादन बंद नहीं होगा। भोपाल के लिए भिलाई से जबलपुर होते हुए 35 टन से ज्यादा ऑक्सीजन कैप्सूल जा रहा है। प्रशासन ऐसी व्यवस्था कर दे कि उसमें से कुछ ऑक्सीजन इंडस्ट्री को मिल सके।