अच्छा है कि स्कूल खुल गए, लेकिन पाठ्यक्रम भी भी तो बना लो

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Published: 22 Sep 2020, 08:28 PM IST

जबलपुर जिले में भी 9वीं से 12वीं के छात्र और शिक्षक संशय में, विभाग ने लिया था पाठ्यक्रम 30 फीसदी कम करने का निर्णय

 

 

अच्छा है कि स्कूल खुल गए, लेकिन पाठ्यक्रम भी भी तो बना लो

जबलपुर। लम्बे समय से बंद स्कूल जबलपुर जिले में भी शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन स्कूल शुरू करने से पहले विभाग की तैयारी अधूरी नजर आ रही है। दरअसल सिलेबस तय किए बिना ही स्कूल खोल दिए गए हैं। जबकि, स्कूल शिक्षा विभाग ने लम्बे समय स्कूल बंद रहने के चलते इस सत्र में पाठ्यक्रम को 30 फीसदी कम करने का निर्णय लिया था। ऐसे में शिक्षकों से लेकर छात्र भी संशय में हैं। वहीं सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में 30 जुलाई को ही पाठ्यक्रम कम किए जाने के सम्बंध में आदेश जारी कर दिए गए थे। सूत्रों का कहना है कि लोक शिक्षण संचालनालय ने कोर्स कम करने के लिए विषय विशेषज्ञों की एक समिति बनाई थी। समिति ने 9वीं से 12वीं तक की कक्षा में सिलेबस में कटौती को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। माध्यमिक शिक्षा मंडल इस पर निर्णय लेगा।
स्थायी समिति में फंसा पेंच
जानकारों का कहना है कि पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए पाठ्य पुस्तक स्थायी समिति से अनुमोदन लेना आवश्यक होता है। समिति का गठन न हो पाने के कारण भी इस पर निर्धारण नहीं हो पा रहा है।

'नौनिहालों को आपदा में मत डालो
स्कूलों को खोलने के फैसले पर जबलपुर कम्यूनिस्ट पार्टी ने कड़ा विरोध जताया है। सीपीआई के जिला सचिव राजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि एक माह से कोरोना का संकट तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में नौनिहालों की जान के लिए खतरा होगा। सरकार शिक्षकों से सलाह के नाम पर और अभिभावकों से दबाव की सहमति लेकर स्कूलों को खोल रही है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के दबाव में लिए गए इस निर्णय का विरोध करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग सरकार से की है

आंशिक रूप से खुले स्कूल, जानकारी लेने के लिए कुछ बच्चे भी पहुंचे

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अधारताल में बच्चों की जिज्ञासा और समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई थी। प्राचार्य संजय परिहार एवं उनकी टीम भी मौजूद थी। स्कूल में 10 से 12 बच्चे ही पहुंचे, जो छात्रवृत्ति एवं अन्य जानकारी पहुंचे थे। उत्कृष्ट मॉडल स्कूल में पहले दिन अलग तरह की व्यवस्था की गई थी। यहां पहले दिन 11वीं एवं 12वीं के बच्चों को बुलाया था। करीब 15 बच्चे स्कूल पहुंचे। एकाउंट, मैथ्स, बायोलॉजी के डाउट को डॉ. गिरीश मेराल, डॉ अलका जैन, सतीश उपाध्याय ने ब्लेक बोर्ड पर समझाया। प्राचार्य वीणा वाजपेयी ने बताया कि कोरोना के डर के चलते बेहद कम बच्चे आए। शासकीय कन्या उमावि रानी दुर्गावती स्कूल गंगानगर में कक्षाएं खाली थीं। जानकारी लेने के लिए एक-दो छात्राएं ही पहुंचीं। प्रबंधन ने बताया कि मार्गदर्शन लेने के लिए छात्राएं आ सकती हैं। शिक्षा अधिकारी ने शासकीय उमावि सहशिक्षा गढ़ा, रानी दुर्गावती स्कूल आदि का निरीक्षण किया। स्कूलों में पहुंचे कुछ अभिभावकों, शिक्षकों का कहना था कि कोरोना संक्रमण के कारण फिलहाल स्थितियां अनकूल नहीं हैं। ऐसे में मार्गदर्शन कक्षाएं के लिए स्कूल खोलना समझ से परे है। इससे बेहतर है कि बच्चों से ऑनलाइन वन टू वन कॉनसेप्ट पर बात की जाए। शासकीय उमावि लोहकारी में स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से सहमति मांगी थी, लेकिन अभिभावकों ने सहमति ही नहीं दी। प्राचार्य डॉ. राजेश पांडे ने कहा कि सभी अभिभावकों को पहले ही मैसेज कर जानकारी दी गई थी।