हे भगवान, जबलपुर में इनकी मनमानी से फैल रहा है कोरोना, जांच में हो रही है आनाकानी

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Published: 02 Oct 2020, 10:42 AM IST

कोरोना रोकथाम की प्रशासन की कवायद पर मनमानी पड़ रही भारी

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जबलपुर। शहर कोरोना संदिग्धों को घर के पास जांच की सुविधा देने के लिए शुरू किए गए फीवर क्लीनिक की व्यवस्थाएं फिर लडखड़़ा गई हैं। मोहल्लों में खुली ज्यादातर फीवर क्लीनिक में आने वाले मरीजों की जांच में आनाकानी की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र-पीएचसी में संचालित फीवर क्लीनिक में संदिग्ध के नमूने लेने के लिए डॉक्टर्स की नियुक्ति की गई है। ये डॉक्टर्स मरीजों की शंका का निराकरण नहीं कर रहे हैं। संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों के नमूने लेने के बजाय दवा की खुराक देकर लौटा रहे हैं। परेशान मरीज जांच के लिए विक्टोरिया और मेडिकल अस्पताल पहुंच रहे हैं। लगातार निगरानी नहीं होने से पीएचसी में स्टाफ भी मनमाने समय पर उपस्थित हो रहे हैं। यह लापरवाही प्रशासन की कोरोना संदिग्ध की जल्दी पहचान करके संक्रमण के रोकथाम की कवायद पर भारी पड़ रही है।

फीवर क्लीनिक की व्यवस्था लडखड़़ाई कोरोना संदिग्ध की जांच में आनाकानी

प्रशासन ने कोरोना संदिग्ध सहित अन्य मरीजों को घर के नजदीक जांच और प्रारंभिक उपचार सुविधा देने के लिहाज से फीवर क्लीनिक के बेहतर तरीके से संचालन की योजना बनाई थी। ताकि प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की भीड़ कम की जा सकें। संदिग्ध की जल्दी पहचान हो सकें।

क्लीनिक में हालात

- शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में संचालित फीवर क्लीनिक में सुबह के समय डॉक्टर उपस्थित रहते हैं। लेकिन दोपहर बाद ज्यादातर क्लीनिक में डॉक्टर को ढूंढना पड़ रहा है।
- नमूने लेने के लिए कुछ दंत चिकित्सकों को संविदा आधार पर नियुक्त करने के बाद संबंधित पीएचसी के प्रभारी व एमबीबीएस डॉक्टर्स के आने-जाने का समय बदल गया है।
- दंत चिकित्सक अपनी मनमर्जी अनुसार संदिग्ध को चुनकर नमूने ले रहे हैं। क्लीनिक से दूसरे क्षेत्र में रहने वाले अपने पहचान वालों को बुलाकर क्लीनिक में नमूने ले रहे है।
- कुछ क्लीनिक में मरीजों के पहुंचने पर रेपिड एंटीजन टेस्ट की लिमिट बताकर जांच से मना कर रहे हैं। कमाई के फेर में कुछ मरीजों के घर जाकर नमूने लेकर आ रहे हैं।
- प्राइवेट अस्पताल और लैब के साथ मिल-जुलकर भी कुछ क्लीनिक में संदिग्ध की सेम्पलिंग हो रही है। इससे सीधे क्लीनिक में आने वाले मरीजों को भटकाया जा रहा है।
- कोरोना संदिग्ध लक्षण पर दहशत में पहुंचने वाले मरीजों की काउंसिलिंग नहीं की जा रही है। मरीज के सवाल पूछने पर सामुदायिक और जिला अस्पताल भेज रहे है।
- ज्यादातर फीवर क्लीनिक मोहल्लें, कॉलोनियों में गलियों में बनी हुई है। दिशा संकेतक और बोर्ड के बिना नए मरीजों को इन क्लीनिक तक पहुंचने का रास्ता ढूंढना पड़ता है।

 

 

सामने आ रहीं कई तरह की खामियां

केस-1: सरकारी विभाग में कार्यरत एक व्यक्ति संदिग्ध लक्षण पर जांच के लिए एक यूपीएचसी में गया। प्राथमिक जानकारी लेने के बाद संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार के एक सदस्य का नमूना जांच के लिए लिया गया। चार दिन तक रिपोर्ट नहीं आयी तो पूछताछ में पता चला कि डॉक्टर ने उनके नमूने लेने के बाद क्लीनिक में ही छोड़ दिए। लैब भेजा ही नहीं था। इस बीच परिवार में एक सदस्य को सांस लेने में समस्या बढ़ गई। अस्पताल में भर्ती कराने पर पॉजिटिव पाई गई।
केस-2: यादव कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित एक परिवार के सम्पर्क में आ गया। तीन दिन बाद हल्का बुखार आने पर एहतियातन जांच के लिए नजदीकी फीवर क्लीनिक में गया। क्लीनिक में संदिग्ध लक्षण और कॉन्टेक्ट हिस्ट्री को लेकर करीब 5-7 मिनट तक पूछताछ की गई। उसके बाद बुखार के लिए कुछ दवाइयां देकर घर में जाकर क्वारंटीन होने की नसीहत दी गई। कोरोना टेस्ट के लिए नमूने देने की बात पर गम्भीर लक्षण ना होने का हवाला देते हुए मना कर दिया।
केस-3: एक व्यक्ति को सांस लेने में हल्की समस्या महसूस होने और सर्दी-खांसी होने पर जांच के लिए स्नेह नगर फीवर क्लीनिक में गया। पहले तो पीएचसी के स्टाफ ने मरीज की जानकारी ली। उसके बाद डॉक्टर के आने पर नमूने होने की जानकारी दी। दोपहर बाद दो चक्कर काटने पर भी क्लीनिक में नमूने लेने के लिए डॉक्टर उपलब्ध नहीं मिलें। परेशान होकर मरीज विक्टोरिया अस्पताल गया। वहां भीड़ होने पर निजी लैब में जाकर कोविड टेस्ट के लिए नमूना दिया।