यहां तो कोरोना से लडऩे का सिस्टम ही बिगड़ गया

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Published: 12 Sep 2020, 09:10 PM IST

जबलपुर जिले में कोरोना संक्रमित की संख्या बढ़ी तो पॉजिटिव बढ़े तो घटा दी सैम्पलिंग

यहां तो कोरोना से लडऩे का सिस्टम ही बिगड़ गया

जबलपुर। कोरोना जबलपुर में तेजी से फैल रहा है। संक्रमित बढऩे के साथ ही पॉजिटिविटी रेट में इजाफा हुआ है। वायरल बुखार फैलने के साथ ही कोरोना संदिग्ध की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे समय में कोरोना सैम्पलिंग बढऩे की जरूरत है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग ने सैम्पलिंग घटा दी है। कुछ दिन पहले ही भोपाल से अधिकारियों ने जिले में प्रतिदिन कम से कम दो हजार नमूने जांच के लिए भेजने को कहा था। पॉजिटिविटी रेट बीते महीने के मुकाबले करीब दोगुना से ज्यादा हो गया है। दस दिन में सिर्फ एक बार ही दो हजार से ज्यादा नमूने जांच के लिए भेजे गए। इससे प्रतिदिन भेजे जाने वाले सैम्पल का औसत अब सोलह सौ से भी कम रह गया है। इधर, पॉजिटिविटी रेट बढऩे के साथ जिले में कोरोना संक्रमित का आंकड़ा छह हजार पार कर गया है।
सबसे तेज गति से मिल रहा संक्रमण
लॉकडाउन के बाद जैसे-जैसे सड़क-बाजार में भीड़ बढ़ रही है, कोरोना के केस बढ़ते जा रहे हैं। अगस्त के मुकाबले अब सितंबर में कोरोना के नए केस ज्यादा गति से मिले हैं। अब तक की स्थिति सबसे कम समय में नए हजार कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। मार्च में जब कोरोना की दस्तक हुई थी तब से लेकर अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो कोरोना के नए एक हजार केस मिलने का समय घटता जा रहा है। एक्टिव केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दो महीने पहले एक्टिव केस सौ तक थे। अब वह बढ़कर डेढ़ हजार के करीब पहुंचने वाले हैं। जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुररिया के अनुसार अगले महीने संक्रमित और बढ़ेंगे। उनके आइसोलेशन और उपचार को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही है। फीवर क्लीनिक्स में नमूने लेने की व्यवस्था की गई है। अब लोग नजदीकी क्लीनिक में नमूना देकर जांच करा सकेंगे। नमूने की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर में कोरोना संदिग्धों की सैम्पलिंग में कमी को स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। जानकारों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग संक्रमित बढऩे के अनुमान लगाने के साथ अन्य प्रबंधन करने में पिछड़ गया। कोरोना पॉजिटिव के साथ संदिग्ध की संख्या बढऩे पर उनकी जांच के लिए व्यवस्था का विस्तार करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार नहीं किया। सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था और निजी अस्पतालों की मोटी फीस से घबराकर अब लोग संदिग्ध लक्षण पर भी भर्ती किए जाने के डर से नमूने देने से बच रहे हैं।