पारदर्शी कोच से निहारा प्राकृतिक सौंदर्य

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Published: 05 Aug 2021, 11:08 PM IST

गुरुवार से एक बार फिर महू-कालाकुंड हेरिटेज ट्रैक दोबारा आबाद हो गया। विस्टाडोम कोच के साथ शुरू हुई हेरिटेज ट्रेन में सफर को लेकर पर्यटकों में उत्साह ऐसा था कि तय समय एक घंटे पहले ही स्टेशन पहुंचे गए। जैसे ही ट्रेन हार्न दिया, पर्यटकों के चहरे खिल गए।

Natural beauty admiring the transparent coach

डॉ. आंबेडकर नगर(महू).

गुरुवार से एक बार फिर महू-कालाकुंड हेरिटेज ट्रैक दोबारा आबाद हो गया। विस्टाडोम कोच के साथ शुरू हुई हेरिटेज ट्रेन में सफर को लेकर पर्यटकों में उत्साह ऐसा था कि तय समय एक घंटे पहले ही स्टेशन पहुंचे गए। जैसे ही ट्रेन हार्न दिया, पर्यटकों के चहरे खिल गए। महू से पातालपानी, टांट्या भील, ब्रिज, चार सुरंग पार करते हुए ट्रेन कब कालाकुंड की हसीन वादियों में पहुंच गई, पर्यटकों को पता ही नहीं चला। कई माह बाद शुरू हुई इस ट्रेन में पहले दिन २५० से अधिक पर्यटकों ने सफर किया। इस सफर के लिए पर्यटक इंदौर, देवास व अन्य जिलों से पहुंचे थे।

सुबह 11.09 बजे जैसे ही ट्रेन अपने प्राकृतिक सौंदर्य से भरे सफर पर निकली तो पर्यटकों एक अलग ही आंनद की अनुभूति के साथ आंनदित होने लगे। पहली बार विस्टाडोज कोच में सफर कर रहे पर्यटक पातालपानी से लेकर कालाकुंड तक नदी, झरने व हरियाली की चादर ओड़े पहाड़ों को निहारते रहे। कई लोगों ने ट्रेन के भीतर से ही हसीन वादियों को अपने मोबाइल में कैद किया। यह ट्रेन महू से पातालपानी, ब्रिज व्यू पाइंट पर रूकते हुए दोपहर १.२५ बजे कालाकुंड स्टेशन पहुंची।

4 मिनट देरी हुई रवाना

महू स्टेशन से निर्धारित समय से 4 मिनट देरी से रवाना हुई ट्रेन 11 बजकर 27 मिनट पर पातालपानी रेलवे स्टेशन पर पहुंची। यहां पर कुछ देर तक रूकने के बाद ट्र्रेन रवाना होकर कुछ ही दूरी पर स्थित पातालपानी झरने के समीप रूकी। यह पर करीब एक घंटे तक ट्रेन रूकी रही। इस दौरान सभी यात्री यहां बने सेल्फी पाइंट पर सेल्फी ली। तो कई यात्री झरने के समीप पहुंचे और झरने को भी अपने मोबाइल में कैद किया। इस दौरान यात्रियों ने यहां की हसीन वादियों का खूब लुत्फ उठाया। कई यात्री घुड़ सवारी भी करते नजर आए। पर्यटक दो पहाडिय़ों के बीच बने ब्रिज पर पहुंचे और पटरियों पर फोटो शूट करते रहे। यहां से चलने के बाद जैसे ही ट्रेन बोगदे में पहुंची तो सभी यात्रियों ने एक सूर में जोर से आवाज लगाई। इस तरह चार बोगदे पार करने के बाद ट्रेन कालाकुंड रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां दो घंटे तक पर्यटक तफरी करते रहे। कई पर्यटक पास ही बह रही चोरल नदी पर भी पहुंचे। यहां बच्चों के लिए लगे झूले व अन्य संसाधनों पर बच्चें खेलते रहे। वापसी में इस ट्रेन में दो इंजन लगाए गए।

सुरंग आते ही लाइट बंद

कालाकुंड स्टेशन रवाना होने के बाद ट्रेन जैसे ही सुरंगों तक पहुंची तो ट्रेन की सभी लाईटें बंद कर दी गई। जिससे पूरी ट्रेन में अंधेर छा गया। इस अंधेरे में यात्रियों ने खूब शोर-शराबा किया।

15 अगस्त को पूरी ट्रेन बुक

आज इस ट्रेन ने नॉन एसी कोच पूरी तरह से फुल हो चुके है। वहीं शनिवार और रविवार को इस ट्रेन के विस्टाडोम कोच और नॉन एसी कोच पूरी तरह से बुक हो चुके है। 15 अगस्त के लिए भी सभी सीटे फूल हो चुकी है।