केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह पर जताई आपत्ति, नहीं मान सकते 'परिवार'

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Published: 25 Feb 2021, 09:45 PM IST

  • समलैंगिक विवाह के विरोध में सरकार
  • समलैंगिक विवाह भारतीय पारिवारिक व्यवस्था के अनुरुप नहीं है

नई दिल्ली। दुनियाभर में समलैंगिक विवाह(samesex marriage) पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं इसी बीच केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह(samesex marriage) पर अपना रुख दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष साफ कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट में समलैंगिक विवाह पर दायर अलग-अलग याचिकाओं पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह पर आपत्ति जताई है। सरकार ने साफ किया कि समलैंगिकों का विवाह कर जोड़े की तरह साथ रहना परिवार की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है।

केंद्र सरकार ने इस विषय पर दायर याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि संवैधानिक अदालत मौजूदा अधिकारों का आंकलन तो कर सकती है पर वह न्यायिक निर्णय का प्रयोग करते हुए नए अधिकार नहीं बना सकती है। हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग की थी जिसे केंद्र सरकार ने पूरी तरह से गलत बताया।

सरकार ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा और न्यायपालिका और विधायिका के अधिकारों को रेखांकित करते हुए कहा कि समलैंगिक रिश्तों के लिए अनुमति देना या नहीं देना पूरी तरह से विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा कभी नहीं हो सकता है।

सरकार ने इस विषय में दलील दी कि एक ही जेंडर के जोड़े का एक साथ जोड़े की तरह रहना और यौन संबंध बनाने को भारतीय परिवार से तुलना नहीं की जा सकती है।