सोमनाथ मंदिर के नीचे की खुदाई में मिली 3 मंजिला इमारत, मिले बौद्ध गुफाओं के निशान

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Published: 30 Dec 2020, 09:16 PM IST

सोमनाथ महादेव के नीचे है तीन मंजिला इमारत , आईआईटी गांधीनगर और आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के जरिए किए गए संशोधन में हुआ खुलासा

नई दिल्ली- देश में कई स्थान ऐसे हैं जहां ज़मीन के गर्भ में कई रहस्य छिपे हैं। ऐसा ही है 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर के नीचे। यहां मंदिर के नीचे खुदाई में तीन मंजिला इमारत की जानकारी मिली है। इस बात का खुलासा हुआ है आईआईटी गांधीनगर और आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के सम्मिलित रिसर्च से।

पुरातत्व विभाग और आईआईटी गांधीनगर के द्वारा एक रिसर्च साल 2017 में किया गया । इस रिसर्च से पता चला कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर परिसर में ज़मीन के नीचे एक तीन मंजिला L-आकार की इमारत दबी हुई है।

2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की विजिट के दौरान ट्रस्ट के लोगों से सोमनाथ में पुरातत्व का अध्ययन करने की सलाह दी। इसके बाद आईआईटी गांधीनगर और पुरातत्व विभाग ने इतिहास के पन्नों को बारीकी से खंगाला तो वहां कई रहस्यमयी जानकारी मिली, जिसे सोमनाथ ट्रस्ट को दी गई।

जो रिपोर्ट दी गई उसमें सोमनाथ और प्रभास पाटन के कुल 4 इलाकों की जीपीआर से पड़ताल की गई जिसमें गोलोकधाम, सोमनाथ मंदिर के दिग्विजय द्वार के रूप में पहचाने जाने वाले मुख्य द्वार से सरदार पटेल की स्टैच्यू तक और बौद्ध गुफा को भी शामिल किया गया।

इस सर्वेक्षण में ज़मीन के नीचे तीन मंजिला इमारत होने की पुष्टि हुई। खोज में पता चला कि ज़मीन के नीचे की पहली मंजिल ढाई मीटर, दूसरी मंजिल 5 मीटर और तीसरी मंजिल 7.30 मीटर की गहराई में स्थित है।

इस कार्य के लिए आईआईटी गांधीनगर के विशेषज्ञो ने 5 करोड़ से भी ज्यादा की भारी-भरकम मशीन लगा कर अलग-अलग इलाकों में रिसर्च किया । इस कार्य के लिए मेटल डिटेक्टर का भी सहारा लिया गया, साथ ही सभी चिन्हित स्थानों पर 2 मीटर से लेकर 12 मीटर तक जीपीआर की मदद से मुआयना किया गया। पड़ताल के दौरान जिस जमीन के नीचे से वाइब्रेशन आया उसी वाइब्रेशन को आधार बना कर रिसर्च को आगे बढ़ाया गया तब जा कर रिपोर्ट तैयार की गई।

विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का निर्माण गुजरात के वेरावल में स्वयं राजा चंद्रदेव ने कराया था। इस मंदिर का वर्णन ऋगवेद, स्कंदपुराण और महाभारत में भी है। सोमनाथ मंदिर के वैभव को देखते हुए इसे कई बार खंडित किया गया था, लेकिन बार-बार पुनर्निर्माण कराने की वजह से सोमनाथ मंदिर का अस्तित्व कायम रहा।