आज इन मुहूर्त में भूल कर भी न करें कोई शुभ काम, हो सकता है नुकसान

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Published: 01 Dec 2017, 09:38 AM IST

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योग: व्यतिपात नामक अत्यंत बाधाकारक अशुभ योग है। इसके बाद वरियान नामक नैसर्गिक शुभ योग है। व्यतिपात नामक योग में समस्त शुभ कार्य सर्वथा वर्जनीय है। विशिष्ट योग: सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग सूर्योदय से संपूर्ण दिवारात्रि है। करण: भद्रा संज्ञक विष्टि नामकरण प्रात: ९.२६ तक, इसके बाद बवादि करण हैं।

एकादशी नन्दा संज्ञक तिथि प्रात: ९.२६ तक, इसके बाद द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि प्रारंभ हो जाएगी। एकादशी तिथि में समस्त शुभ व मांगलिक कार्य, विवाह, जनेऊ, प्रतिष्ठा, वास्तु व देव कार्यादि शुभ सिद्ध होते हैं। द्वादशी तिथि में विवाहादि मांगलिक कार्य तथा जनेऊ आदि के कार्य शुभ होते हैं।

नक्षत्र: रेवती ‘मृदु व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र सायं ४.१३ तक, तदुपरान्त अश्विनी ‘क्षिप्र व तिङ्र्यंमुख’ नक्षत्र है। रेवती व अश्विनी दोनों ही गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र भी है। अत: २७ दिन बाद जब इन नक्षत्रों की पुनरावृत्ति हो, उस दिन विधिपूर्वक नक्षत्र शांति करा लेना जातकों के हित में होगा।

योग: व्यतिपात नामक अत्यंत बाधाकारक अशुभ योग है। इसके बाद वरियान नामक नैसर्गिक शुभ योग है। व्यतिपात नामक योग में समस्त शुभ कार्य सर्वथा वर्जनीय है। विशिष्ट योग: सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग सूर्योदय से संपूर्ण दिवारात्रि है। करण: भद्रा संज्ञक विष्टि नामकरण प्रात: ९.२६ तक, इसके बाद बवादि करण हैं।

शुभ विक्रम संवत् : 207४
संवत्सर का नाम : साधारण
शाके संवत् : 193९
हिजरी संवत् : 143९, मु.मास: रवि-उल-अव्वल-१०
अयन : दक्षिणायन
ऋतु : हेमन्त
मास : मार्गशीर्ष।
पक्ष : शुक्ल।

शुभ मुहूर्त: आज विवाह (व्यतिपात दोषयुक्त) गृहारंभ (नींव) व गृहप्रवेश के मुहूर्त (भद्रा व व्यतिपात दोषयुक्त) रेवती नक्षत्र में तथा विवाह कात्यायनोक्त व वधू प्रवेश के व्यतिपात के बाद अश्विनी नक्षत्र में यथाआवश्यक शुभ मुहूर्त हैं।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से प्रात: ८.२० तक शुभ, पूर्वाह्न १०.५७ से दोपहर बाद २.५२ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा सायं ४.११ से सूर्यास्त तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर ११.५४ से दोपहर १२.३६ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज मोक्षदा एकादशी व्रत सबका, व्यतिपात पुण्यं तथा सायं ४.१३ तक पंचक है। दिशाशूल: गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार सायं ४.१३ तक उत्तर दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है। इसके बाद पूर्व दिशा की यात्रा लाभदायक रहेगी।

चन्द्रमा: चन्द्रमा सायं ४.१३ तक मीन राशि में, इसके बाद मेष राशि में है।

राहुकाल: दोपहर बाद १.३० से अपराह्न ३.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (ची, चू, चे, चो, ला) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। सायं ४.१३ तक जन्मे जातकों की जन्म राशि मीन है। इसके बाद जन्मे जातकों की मेष राशि है। जन्म स्वर्ण पाद से हुआ है। सामान्यत: ये जातक कुछ संकुचित विचार वाले, पर धनवान, विद्यावान, पराक्रमी, बुद्धिमान, योग्य और राज समाज में मान-सम्मान पाने वाले होते हैं। क्रूर ग्रह की दशा में शुक्र, चन्द्र व राहु की अंतर्दशा में शत्रु कष्ट व कुछ शारीरिक कष्ट हो सकते हैं। मीन राशि वाले जातकों को शिक्षा क्षेत्र में अच्छी सफलता मिलेगी।