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खरीफ बीमा राशि में बड़ी विसंगतियां, किसानों को हो रहा आर्थिक नुकसान

By Sanjeev Dubey

Sep, 12 2018 11:58:23 (IST)

एक ही पटवारी हल्के में अलग अलग बीमा, जितना प्रीमियम उतनी भी नहीं मिली बीमा राशि

खिरकिया. पिछले वर्ष खरीफ अल्प बारिश के कारण किसानों खरीफ फसल बर्बाद होने से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। फसल का बीमा होने से किसानों को नुकसान के भरपाई की उम्मीद थी। लेकिन वर्तमान में किसानों को दी जा रही बीमा राशि में काफी विसंगतियां है। इससे किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है। जानकारी के अनुसार सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों की क्षतिपूर्ति के रूप मेें बीमा राशि किसानों को दी जा रही है। लेकिन यह बीमा राशि किसानों नुकसान के अनुरूप नहीं मिल रही है। जिसको लेकर किसानों द्वारा रोष जताया जा रहा है। विकासखंड के कई ऐसे गांव है, जहां एक भी किसान को बीमा राशि नहीं मिला है, वहीं कुछ गांव ऐसे है जहां सिर्फ चार छ: किसानों को ही राशि मिली है। कई किसान ऐसे भी जिनका प्रीमियम अधिक काटा गया और बीमा राशि उससे भी कम मिली है।

मेढ़ पड़ोसी कृषकों की भी बीमा राशि में अंतर -
एक ही पटवारी हल्के के किसानों को अलग अलग बीमा राशि दी गई। दामोदरपुरा में 5 एकड़ के किसान शंकरलाल को 213 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से बीमा प्रदान किया गया है। वहीं उनके खेत के मेढ़ लगे किसान गोपालप्रसाद रठूर को 1 हजार रूपए प्रति एकड़ बीमा दिया गया है। वहीं संतोष भेरूलाल को भी 213 रूपए प्रति एकड़ बीमा राशि दी गई है। ऐसे में एक ही पटवारी हल्का और आसपास के खेतों में ही विसंगति देखने को मिल रही है। जिसे किसान द्वारा सर्वे और अनावरी रिपोर्ट में लापरवाही बता रहे है।

प्रीमियम से भी कम मिला बीमा -
किसानों की फसल का बीमा करने के लिए बैंकों द्वारा हजारों रुपए का प्रीमियम काटा गया है, लेकिन उन्हें उनकी प्रीमियम राशि से भी कम बीमा मिला है। गोपालपुरा, प्रतापपुरा सहित कई गांव ऐसे है, जहां यह स्थिति बन रही है। प्रतापपुरा के कृषक दीपक तोमर की खरीफ की फसल के लिए प्रीमियम राशि 6 700 रुपए काटी गई थी, लेकिन उन्हें महज 4700 रुपए ही बीमा मिला है। पीपल्या के किसान अंतरसिंह सूरजसिंह को 15 एकड़ की नुकसानी का मात्र 16 हजार रुपए बीमा दिया गया है। वहीं संतोष को 13 एकड़ नुकसानी का 7 हजार रूपए बीमा दिया गया है। किसानों ने बताया कि नुकसान के अनुसार बीमा प्रदान नहीं किया गया है।

कई ग्रामों को नहीं किया शामिल-
विकासखंड के सोनपुरा, टेमलावाड़ी, जयमलपुरा, हीरापुर, खेड़ी, चारूवा, पड़वा, छीपाबड़, खिरकिया, खमलाय, काल्याखेडी सहित अन्य कई गांव ऐसे है, जहां एक भी किसान को बीमा राशि नहीं मिली है। लोधियाखेड़ी, बडऩगर सहित अन्य गांव ऐसे है, जहां पर इक्का दुक्का किसानों को ही बीमा मिला रहा है। ऐसे में किसान बीमा राशि के लिए बैंकों के चक्कर लगा रहे है। लेकिन उन्हें बीमा राशि नहीं मिल रही है।

एक दूसरे पर मढ़ रहे विसंगति -
बीमा राशि में हुई विसंगतियों को एक दूसरे पर मढ़ा जा रहा है। बीमा कंपनी द्वारा बैंक द्वारा जमा कराए गए प्रीमियम के आधार पर बीमा दिए जाने की बात कही जा रही है। वहीं बैंकों द्वारा सर्वे व अनावरी रिपोर्ट के आधार पर किसानों की बीमा प्रीमियम की जमा करने बात कही जा रही है। जबकि किसान सर्वे एवं अनावरी रिपोर्ट में ही गड़बड़ी किए जाने की बात कह रहे है। सर्वे कार्य में लापरवाही बरती गई, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड रहा है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसानी भी उठानी पड़ रही है। किसानों द्वारा पुन: जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की भी जा रही है। लेकिन उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो रहा है।

इनका कहना है-
बीमा राशि में विसंगति को लेकर किसानों से शिकायतें मिल रही है। खरीफ फसल बीमा राशि को लेकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर जानकारी ली जाएगी। किसान हित में बेहतर किए जाने का प्रयास किया जााएगा।
वीपी यादव, एसडीएम, खिरकिया