बाहुबली मुख्तार अंसारी के करीबी का करोड़ों का अस्पताल गिराने की कार्रवाई शुरू, शिफ्ट किये गए मरीज

|

Published: 24 Oct 2020, 10:47 AM IST

  • गाजीपुर में गंगा किनारे है मुख्ता अंसारी के करीबी डाॅ. साजिद सिद्दीकी का अस्पताल
  • ध्वस्तीकरण के लिये रातों रात शिफ्ट किये गए मरीज, निकाला जा रहा है सामान

बाहुबली मुख्तार अंसारी के करीबी का करोड़ों का अस्पताल गिराने की कार्रवाई शुरू, शिफ्ट किये गए मरीज

गाजीपुर. हाईकोर्ट से कुछ दिनों की मोहलत जरूर मिल गई, लेकिन आखिरकार योगी सरकार बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कारोबारी का करोड़ों रुपये कीमत का अस्पताल जमींदोज कराने से पीछे नहीं हटी। डीएम कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को अस्पताल को गिराए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। मरीजों को निकालकर दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया और अस्पताल के अंदर का सारा सामान भी निकाला जा रहा है। ध्वस्तीकरण के लिये जेसीबी और बुलडोजर मंगा लिये गए हैं। अधिकारियों की भी पहुंच चुकी है।

 

 

मुख्तार अंसारी के करीबी कारोबारी डाॅ. साजिद सिद्दीकी के गंगा किनारे बने आलीशान को जिला प्रशासन ने जांच का हवाला देते हुए अवैध बताया था, जिसके बाद एसडीएम कोर्ट ने इसे गिराने का आदेश दिया था। पर इस आदेश के खिलाफ के मालिकान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां से उन्हें कुछ मोहलत मिल गई। हाईकोर्ट ने मामले में जिलाधिकारी कोर्ट को वादी की अपील सुनने का आदेश दिया था। इसके बाद डीएम ने आठ सदस्यी टीम का गठन कर उनसे इस मामले में फिर से रिपोर्ट तलब की थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया।

डीएम कोर्ट का आदेश मिलते ही अधिकारी हरकत में आ गए और आदेश के पालन के क्रम में तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। गंगा किनारे हमीद सेतु के नजदीक बने साजिद सिद्दीकी के शम्म ए गौसिया अस्पताल में रातों रात पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पहुंचे। में भर्ती मरीजों को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की देखरेख में दूसरेेे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। मालिकान को खाली करने का समय दिया गया, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने भी हाॅस्पिटल से सामान निकलना शुरू कर दिया। हालांकि मालिकान और हाॅस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को अवैध बताया।

 

अस्पताल प्रशासन से जुड़े सदस्य शहाबुद्दीन ने बताया कि मुख्तार अंसारी बंधु से जोड़कर हमारे खिलाफ षड़यंत्र कर कार्रवाई की गई है। मामला 2010 से चल रहा था, उन्होंने नक्शा मांगा तो हमने उनको नक्शा दिया। हमने मास्टर प्लान को चैलेंज किया कि मास्टर प्लान में रौजा शाह बरखुरदार नहीं है। हम एसडीएम कोर्ट के खिलाफ हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने अपील दाखिल करने को कहा। हमारी कोई भी बात नहीं सुनी गई। रात में आदेश जारी होने के बाद ही कार्रवाई शुरू कर दी गई। यहां 100 छात्रों का भविष्य अधर में है और 100 से अधिक कर्मचारियों की रोजगार का संकट पैदा हो गया है।

By Alok Tripathi