योगी सरकार ने ढहाया मुख्तार अंसारी के करीबी कारोबारी का करोड़ों का अस्पताल, कोई विरोध भी नहीं कर सका

|

Published: 24 Oct 2020, 08:12 PM IST

  • जिला प्रशासन ने अस्पताल को अवैध बताते हुए दिया था ध्वस्तीकरण का आदेश
  • आदेश को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती, जिसके बाद डीएम ने फिर से कराई जांच
  • जांच रिपोर्ट के आधार पर खारिज हुई अपील, प्रशासन ने जलवाई जेसीबी
  • कारोबारी साजिद सिद्दीकी के परिवार से 17 शस्त्र लाइसेंस भी हो चुके हैं निलंबित
  • गाजीपुर में गंगा किनारे है मुख्ता अंसारी के करीबी डाॅ. साजिद सिद्दीकी का अस्पताल
  • ध्वस्तीकरण के लिये रातों रात शिफ्ट किये गए मरीज, निकाला जा रहा है सामान

योगी सरकार ने ढहाया मुख्तार अंसारी के करीबी कारोबारी का करोड़ों का अस्पताल, कोई विरोध भी नहीं कर सका

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

गाजीपुर. हाईकोर्ट जाने केब बाद भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा, कुछ दिन बाद ही सही आखिरकार योगी सरकार ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कारोबारी का करोड़ों रुपये कीमत का शम्म ए हुसैनी अस्पताल, ट्राॅमा सेंटर और नर्सिंग इंस्टीट्यूटी जमींदोज करा ही दिया। डीएम कोर्ट द्वारा याची की अपील खारिज करने और एसडीएम कोर्ट के ध्वस्तीकरण के आदेश पर मुहर लगाने के बाद शनिवार को अस्पताल को गिरा दिया गया। उसके पहले रातों रात मरीज वहां से हटाकर जिला अस्पताल में शिफ्ट किये गए और रात भर अस्पताल का सामान वहां से हटाया जाता रहा। अधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पोकलेन मशीन और जेसीबी लगाकर इमारत को ध्वस्त करना शुरू किया गया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन ने आरोप लगाया कि मुख्तार अंसारी से जोड़कर उनके खिलाफ षड़्यंत्र के तहत कार्रवाई की जा रही है, हालांकि ध्वस्तीकरण में किसी तरह का विरोध नहीं हुआ।

 

 

 

डीएम कोर्ट ने जांच के बाद खारिज की अपील

मुख्तार अंसारी के करीबी कारोबारी आजमम सिद्दीकी के पुत्र डाॅ. साजिद सिद्दीकी के गंगा किनारे बने आलीशान अस्पताल को जिला प्रशासन ने जांच का हवाला देते हुए अवैध बताया था, जिसके बाद एसडीएम कोर्ट ने इसे गिराने का आदेश दिया था। पर इस आदेश के खिलाफ अस्पताल के मालिकान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां से उन्हें कुछ मोहलत मिल गई। हाईकोर्ट ने मामले में जिलाधिकारी कोर्ट को वादी की अपील सुनने का आदेश दिया था। इसके बाद डीएम ने आठ सदस्यी टीम का गठन कर उनसे इस मामले में जांच कर फिर से रिपोर्ट तलब की थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने शुक्रवार को अपील खारिज करते हुए एसडीएम के ध्वस्तीकरण के आदेश पर मुहर लगा दी। डीएम कोर्ट का आदेश मिलते ही अधिकारी हरकत में आ गए और आदेश के पालन के क्रम में तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।


रातों रात शिफ्ट किये गए मरीज

डीएम कोर्ट के आदेश के बाद कुछ ही घंटों में शुक्रवार की रात गंगा किनारे हमीद सेतु के नजदीक बने साजिद सिद्दीकी के शम्म ए हुसैनी अस्पताल व ट्राॅमा सेंटर में सीएमओ गिरीश चंद्र मौर्य पुलिस बल के साथ करीब 10 एंबुलेंस लेकर पहुंचे। वहां भर्ती मरीजों को जिला अस्प्ताल शिफ्ट किया गया। सुबह आठ बजे से हाॅस्पिटल को गिराया जाना था इसलिये पूरी रात अस्प्ताल से सामान निकाला जाता रहा।

 

शाम तक जारी रहा ध्वस्तीकरण

सुबह आठ बजे एडीएम राजेश सिंह के नेतृत्व में दो एसडीएम,एसपी सिटी, दो सीओ कई थानों की फोर्स व महिला सिपाहियों के साथ पहुंचे। एक पोकलेन और दो जेसीबी मंगाकर सुबह 9 बजे से ध्वस्तीकरण शुरू हुआ। परिसर की विशाल इमारतों को गिराने के लिये दो पोकलेन और मंगाई गई। शनिवार की शाम तक ध्वस्तीकरण का काम जारी रहा। छह बिघा के क्षेत्रफल में तीन बीघे में शम्म ए हुसैनी अस्पताल एवं ट्राॅमा सेंटर, नर्सिंग इंस्टीट्यूट व हाॅस्टल की विशाल बिल्डिंगें बनी थीं। इमारत के ऊपर का हिस्सा रेस्टोरेंट व बैंक जैसे काॅमर्शियल यूज के लिये दिया गया था।


षड़्यंत्र के तहत कार्रवाई

अस्पताल प्रशासन से जुड़े सदस्य शहाबुद्दीन ने बताया कि मुख्तार अंसारी बंधु से जोड़कर हमारे खिलाफ षड़यंत्र कर कार्रवाई की गई है। मामला 2010 से चल रहा था, उन्होंने नक्शा मांगा तो हमने उनको नक्शा दिया। हमने मास्टर प्लान को चैलेंज किया कि मास्टर प्लान में रौजा शाह बरखुरदार नहीं है। हम एसडीएम कोर्ट के खिलाफ हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने अपील दाखिल करने को कहा। हमारी कोई भी बात नहीं सुनी गई। रात में आदेश जारी होने के बाद ही कार्रवाई शुरू कर दी गई। यहां 100 छात्रों का भविष्य अधर में है और 100 से अधिक कर्मचारियों के रोजगार का संकट पैदा हो गया है।

 

परिवार से 17 शस्त्र लाइसेंस हो चुके हैं निलंबित

कारोबारी आजम सिद्दीकी, उनकी पत्नी, भाई व उसकी पत्नी और बेटों के नाम पर 17 असलहों के लाइसेंस को पुलिस जांच कर निलंबित कर चुकी है। सभी के असलहे भी थाने में जमा कराए जा चुके हैं। कहा जाता है कि आजम सिद्दीकी मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी और गाजीपुर के बड़े कारोबारियों में शुमार हैं।

By Alok Tripathi