परम एकादशी 2020 : पुरुषोत्तम मास की इस एकादशी पर होती है परम दुर्लभ सिद्धियों की प्राप्ति, भगवान विष्णु का मिलता है विशेष आर्शीवाद

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Updated: 11 Oct 2020, 10:12 AM IST

: परम एकादशी 2020 कब है?
: इस दिन किसकी पूजा होती है?
: परम एकादशी 2020 का शुभ मुहूर्त क्या है?
: परम एकादशी व्रत के क्या फायदे हैं?
: परम एकादशी क्यों मनाई जाती है?

What are the benefits of Param Ekadashi fast- परम एकादशी व्रत के क्या फायदे हैं

सनातन धर्म में एकादशी का व्रत सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। भगवान कृष्ण ने महाभारत में स्वयं युधिष्ठिर और अर्जुन को एकादशी व्रत के बारे में बताया था। एकादशी का व्रत सभी प्रकार के पापों को दूर करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला व्रत माना गया है। ऐसे में आने वाले मंगलवार यानि 13 अक्टूबर को एकादशी है, जिसे हम पुरुषत्ता एकादशी ( परम एकादशी ) के नाम से भी जानते हैं।

परम एकादशी व्रत मुहूर्त (Param Ekadashi fasting muhurat): 13 अक्तूबर : मंगलवार : अधिक मास – आश्विन कृष्ण पक्ष – पुरुषत्ता एकादशी ( परम एकादशी )...
12 अक्टूबर 2020: एकादशी तिथि प्रारंभ 04 बजकर 38 मिनट से
13 अक्टूबर 2020: एकादशी तिथि समाप्त दोपहर 02 बजकर 35 मिनट तक
14 अक्टूबर 2020: परम एकादशी पारणा मुहूर्त प्रातः 06:17:07 से 08:36:43 तक

Importance of Param Ekadashi : परम एकादशी का महत्व
मान्यता है कि परम एकादशी पर विधि पूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष आर्शीवाद प्राप्त होता है। यह एकादशी परम दुर्लभ सिद्धियों को प्रदान करती है, इसीलिए इसे परम एकादशी कहा जाता है। परम एकादशी का व्रत रखने से जीवन में आने वाली सभी परेशानियों को दूर करता है और सुख समृद्धि लाता है। परम एकादशी के दिन दान का भी विशेष महत्व है इस दिन स्वर्ण, विद्या संबंधी दान, अन्न, भूमि, और गौदान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

परमा एकादशी व्रत की विधि : vrat vidhi of Param Ekadashi
इस एकादशी व्रत की विधि कठिन है। इस व्रत में पांच दिनों तक पंचरात्रि व्रत किया जाता है। जिसमें एकादशी से अमावस्या तक जल का त्याग किया जाता है। केवल भगवत चरणामृत लिया जाता है। इस पंचरात्र का भारी पुण्य और फल होता है। मान्यता है कि परमा एकादशी व्रत को विधि पूर्वक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। परम एकादशी व्रत एक कठिन होने के ािरण इसे इसे निर्जला व्रत भी कहा गया ह।. व्रत के दौरान भगवत चरणामृत लिया जाता है। एकादशी की तिथि पर व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। व्रत का पारण करने से पूर्व दान आदि का कार्य करना चाहिए।

Parma Ekadashi fasting method : परमा एकादशी व्रत विधि

1. इस दिन प्रात:काल स्नान के उपरांत भगवान विष्णु के समक्ष बैठकर हाथ में जल व फल लेकर संकल्प करना चाहिए। इसके पश्चात भगवान का पूजन करना चाहिए।
2. इसके बाद 5 दिनों तक श्री विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का पालन करना चाहिए।
3. पांचवें दिन ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा सहित विदा करने के बाद व्रती को स्वयं भोजन करना चाहिए।

परमा एकादशी व्रत कथा : Parma Ekadashi fasting story
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को परमा एकादशी व्रत का महत्व और कथा का वर्णन सुनाया।

प्राचीन काल में काम्पिल्य नगर में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसकी स्त्री का नाम पवित्रा था। वह परम सती और साध्वी थी। वे दरिद्रता और निर्धनता में जीवन निर्वाह करते हुए भी परम धार्मिक थे और अतिथि सेवा में तत्पर रहते थे। एक दिन गरीबी से दुखी होकर ब्राह्मण ने परदेश जाने का विचार किया, किंतु उसकी पत्नी ने कहा- ‘’स्वामी धन और संतान पूर्वजन्म के दान से ही प्राप्त होते हैं, अत: आप इसके लिए चिंता ना करें।’’

एक दिन महर्षि कौडिन्य उनके घर आए। ब्राह्मण दंपति ने तन-मन से उनकी सेवा की। महर्षि ने उनकी दशा देखकर उन्हें परमा एकादशी का व्रत करने को कहा। उन्होंने कहा- ‘’दरिद्रता को दूर करने का सुगम उपाय यही है कि, तुम दोनों मिलकर अधिक मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत तथा रात्रि जागरण करो। इस एकादशी के व्रत से यक्षराज कुबेर धनाधीश बना है, हरिशचंद्र राजा हुआ है।’’

ऐसा कहकर मुनि चले गए और सुमेधा ने पत्नी सहित व्रत किया। प्रात: काल एक राजकुमार घोड़े पर चढ़कर आया और उसने सुमेधा को सर्व साधन, संपन्न, सर्व सुख समृद्ध कर एक अच्छा घर रहने को दिया। इसके बाद उनके समस्त दुख दर्द दूर हो गए।