मेष संक्रांति 2020 : 13 अप्रैल को सूर्य का मेष में प्रवेश, जानिये आपकी राशि पर इसका असर

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Published: 11 Apr 2020, 10:37 AM IST

13 अप्रैल से अपनी उच्च राशि में चले जाएंगे सूर्य देव, जानें किसके लिए होंगे शुभ और किसके लिए अशुभ...

Mesh sankranti will highly affects all zodiac signs- know what your rashi and horoscope says- 13 अप्रैल से सूर्य देव किसके लिए होंगे शुभ और किसके लिए अशुभ...

साल 2020 में मेष संक्रांति 13 अप्रैल को है। सूर्य का किसी राशि में गोचर होना ही संक्रांति कहलाता है। नवसंवत्सर 2077 यानि वर्ष 2020 में 13 अप्रैल को सूर्य ग्रह मेष राशि में गोचर करेगा और 14 मई तक यह इसी राशि में स्थित रहेगा। मेष राशि को जहां मंगल का स्वामित्व प्राप्त है, वहीं यह सूर्य ग्रह की उच्च राशि है। ज्योतिष के अनुसार इस राशि में सूर्य प्रबल होता है और अच्छे परिणाम देता है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस साल 2020 में 13 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही मेष संक्रांति मनाई जाएगी। इसे विषपत संक्रांति / विषुपत संक्रांति या वैशाख संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। वैशाख को हिन्दू नववर्ष का दूसरा माह माना जाता है।

साल में आने वाली 12 संक्रांति में मेष संक्रांति का भी महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन जगत के प्राण दाता भगवान सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में चले जाएंगे। इस शुभ दिन यानी की मेष संक्रांति पर लोग भगवान सूर्य नारायण की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। इस मेष संक्रांति को वैशाख संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है।

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एक ओर जहां पूरे देश में इस दिन को वैशाख संक्रांति या मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, वहीं देवभूमि उत्तरांचल में इस दिन को विषपत या विषुवत संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, देवभूमि में मान्यता है कि इस दिन वहां मिलने वाली कहरू नाम घास, जिसमें कि नीम के समान औषधीय गुण होते हैं, उसे पानी में डाल कर स्नान करने से शरीर के सभी प्रकार के विष नष्ट हो जाते हैं या बाहर निकल जाते हैं।

विष व रोगों का हो जाता है नाश, इसलिए कहते हैं विषपत संक्रांति
मेष संक्रांति को विषपत या विषुपत संक्रांति भी कहा जाता है, इसके इस नाम के पीछे कुछ कारण हैं। दरअसल इस दिन स्नान का खास महत्व माना गया है, वहीं मान्यता के अनुसार इस दिन नीम के पानी से नहाना अति उत्तम माना जाता है, इस संबंध में पंडित सुनील शर्मा के मुताबिक हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन नीम के जल से स्नान करने से सभी प्रकार के रोगों का नाश हो जाता है। वहीं इस दिन स्नान द्वारा शरीर से विषाक्तता निकलने के चलते इसे विषपत या विषुपत संक्रांति भी कहते हैं।

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मान्यता के अनुसार इस दिन अरिष्ट निवारण के लिए स्नान और दान का विशेष महत्व होने के साथ ही चांदी और अन्य सामग्री के दान का भी महत्व बताया जाता है।

वहीं धर्म के जानकारों के अनुसार इस समय कोरोना COVID-19 latest news वायरस को देखते हुए इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

कब होगा ये परिवर्तन..
पं. शर्मा के अनुसार सूर्य का मेष राशि में गोचर 13 अप्रैल, सोमवार को रात्रि 8 बज कर 14 मिनट (20:14 बजे) पर होगा, जब सूर्य देव अपने परम मित्र मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में प्रवेश करेंगे। यह एक अग्नि तत्व की राशि है और सूर्य इस राशि में अपनी उच्च अवस्था में माना जाता है। इस प्रकार एक अग्नि तत्त्व प्रधान सूर्य ग्रह का प्रवेश अग्नि तत्व प्रधान मेष राशि में होगा, जिससे जीवन में खुशहाली और तरक्की आएगी और गर्मी के मौसम में बढ़ोत्तरी होगी।

 

मेष संक्रांति / विषवत संक्रांति: सभी 12 राशियों पर प्रभाव...

01. मेष राशि
इस दौरान सूर्य का गोचर आपकी ही राशि में हो रहा है, प्रथम भाव को लग्न भी कहा जाता है। वहीं सूर्य आपके पांचवें भाव के स्वामी हैं और इस समय इसके प्रथम भाव में होने से आपको संतान की तरफ से पूर्ण रूप से सुख मिलेगा और आपकी संतान को कोई बड़ी उपलब्धि इस समय में मिल सकती है, चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र में हो या उनके करियर के क्षेत्र में। इस समय आपको प्रेम जीवन में भी सफलता मिलेगी और आपका प्रियतम खुलकर अपने मन की बात आपसे कहेगा और अपने प्यार को स्वीकार करेगा, जिससे आपको बहुत खुशी होगी, लेकिन इस समय काल में आप जरूरत से ज्यादा अभिमानी हो सकते हैं।

वहीं यदि आप अभी तक शादीशुदा नहीं हैं तो शिक्षा के क्षेत्र में आपको भी जबरदस्त नतीजे मिल सकते हैं और आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। यदि किसी इंजीनियरिंग या अन्य प्रतियोगी परीक्षा में आपने भाग लिया है तो उसमें सफल होने की पूरी संभावना होगी। यदि आप शादीशुदा हैं तो यह गोचर आपको धैर्य रखने के लिए मजबूर करेगा क्योंकि अभिमान से नुकसान होने के योग बनेंगे।

उपायः आपको श्रीआदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए।

02. वृषभ राशि
आपकी राशि के लिए सूर्य देव का गोचर बारहवें भाव में होगा, यह भाव ज्योतिष में व्यय भाव भी कहलाता है। इस गोचर के प्रभाव से आपकी नौकरी में स्थानांतरण के योग भी बन सकते हैं लेकिन वह योग आपके लिए अच्छे ही होंगे, इसलिए आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इस गोचर के प्रभाव से आपको अपने शत्रुओं पर विजय मिलेगी और यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसमें भी नतीजा आपके पक्ष में आने की पूरी उम्मीद रहेगी।

वहीं इस दौरान आपके खर्चे काफी बढ़ेंगे। यदि आपने कहीं नौकरी के लिए आवेदन किया हुआ है तो इस गोचर काल में आपको अच्छी नौकरी मिल सकती है। इस दौरान सूर्य देव के कारण आपके विदेश जाने के प्रबल योग बनेंगे। यह समय आपको बाहरी भूमि पर खूब मान सम्मान और सफलता देगा।

उपायः रविवार के दिन किसी गौशाला अथवा मंदिर में गेहूं, तांबा एवं गुड़ का दान करें।

03. मिथुन राशि
सूर्य देव का गोचर मिथुन राशि के लोगों के एकादश भाव में होगा, इस भाव को आय भाव भी कहते हैं। इस समय सूर्य उच्च अवस्था में होगा तो आपके लिए ख़ुशियों की बरसात होगी। आपकी आमदनी बहुत अच्छे तरीके से बढ़ेगी और आपका व्यापार भी आप को समुचित लाभ प्रदान करेगा। इस समय में आपके संपर्क बढ़ेंगे।

सरकारी क्षेत्र से इस समय में अच्छे लाभ के योग बनेंगे और आपको अपने विरोधियों पर जीत मिलेगी, जिससे आपके आत्म बल में बढ़ोतरी होगी और आपके रुके हुए सभी काम बनने लगेंगे। यदि आप नौकरी करते हैं तो आप के वरिष्ठ अधिकारियों से आपके संबंध बहुत ही मजबूत बनेंगे। वहीं यदि आप व्यापार करते हैं तो इस दौरान आपको आशातीत लाभ होने की पूरी संभावना होगी और आपका नाम भी खूब होगा।

उपायः आपको हर रोज कम से कम 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।


04. कर्क राशि
इस समय में सूर्य आपके दशम भाव में होंगे, ज्योतिष में यह भाव कर्म व विद्या का घर माना जाता है। इस दौरान सूर्य के अपनी उच्च राशि में दिगबल से युक्त होने के चलते आपकी नौकरी में जबरदस्त पदोन्नति के योग बनाएंगे। आपको काम के क्षेत्र में अधिकार अधिक दिए जाएंगे और आपकी आय भी बढ़ेगी। आपकी नौकरी मजबूत होगी आपके काम की चारों ओर प्रशंसा होगी, यहां तक की विरोधी भी आप के गुण गाएंगे। आप के वरिष्ठ अधिकारी भी आपसे प्रसन्न होंगे।

गोचर काल में आप परिवार को समय कम दे पाएंगे। दूसरे भाव का स्वामी सूर्य आपके दशम भाव में प्रवेश करेगा, जिससे आप अपने व्यापार को विस्तार देंगे और अपनी जमा पूंजी को अपने बिज़नेस में निवेश कर सकते हैं। पैतृक व्यवसाय में इस दौरान बहुत लाभ मिलने के योग बनेंगे। पिताजी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

उपायः आपको सूर्य देव के मंत्र “ॐ घृणि सूर्याय नमः’’ का जाप करना चाहिए।

05. सिंह राशि
आपकी राशि का स्वामी सूर्य अपने इस गोचर के समय आपकी राशि से नवम भाव में होगा,नवम भाव को भाग्य भाव भी कहा जाता है। इस भाव में सूर्य के गोचर से आपके मान सम्मान में खूब बढ़ोतरी होने के चलते आप बहुत लोकप्रिय होंगे। वहीं इस गोचर काल में आपको किसी तीर्थ स्थान पर जाने का मौका मिलेगा, जिससे मानसिक शांति की प्राप्ति होगी और आप खुश होंगे। यात्राओं के लिए यह गोचर काफी अच्छा रहने वाला है और सुदूर स्थानों की यात्रा करने का मौका मिलेगा।

इस गोचर काल में आपका नौकरी में स्थानांतरण हो सकता है और आपको किसी दूसरी जगह भेज कर वहां का प्रमुख बनाया जा सकता है। यदि व्यापार की बात की जाए तो इस गोचर काल में आप अधिक रिस्क लेने की प्रवृत्ति में होंगे लेकिन काफी सोच विचार कर ही निर्णय लें। इस समय पिता को अपने स्वास्थ्य के कारण कुछ समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए आपको विशेष रूप से उनका ध्यान रखना चाहिए। आपके निर्णय लेने की क्षमता बढ़िया होगी और अपनी मेहनत के बल पर आप अच्छे लाभ अर्जित करेंगे। इस दौरान आपको किसी पुरानी बीमारी से निजात मिल सकती है।

उपायः रात्रि में तांबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें और अगले दिन प्रातः काल में उसे पियें।


06. कन्या राशि
कन्या राशि के लिए सूर्य का गोचर अष्टम भाव में होगा, ज्योतिष में यह भाव आयु भाव माना जाता है। अष्टम भाव में सूर्य का गोचर अधिक अनुकूल नहीं माना जाता, इसलिए यह गोचर आपके लिए ज्यादा अनुकूल नहीं कहा जा सकता। इस गोचर की अवधि में आपको धन हानि होने के योग बनेंगे और इस समय में आपको कहीं भी धन का निवेश करने से बचना चाहिए। इस दौरान आपको थोड़ा सावधान रहना चाहिए क्योंकि आपके विरोधी उसका लाभ उठा सकते हैं। इसको गोचर का सबसे अच्छा लाभ यह हो सकता है कि आपको अपने कर्ज़ों से मुक्ति मिल सकती है।

इस समय में आपकी वाणी में गर्व बढ़ेगा, इसलिए आपको सोच समझकर बोलना चाहिए क्योंकि बात का बतंगड़ बनने से स्थिति बिगड़ सकती है। इस दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा क्योंकि आप बीमार पड़ सकते हैं। तेज बुखार या सिर दर्द होने की भी संभावना रहेगी। इस समय खंड में आपका स्वास्थ्य खराब होने के चलते आपका धन भी व्यर्थ खर्च होगा। आप पर मानसिक रूप से काफी तनाव हावी रह सकता है और आपके पिताजी को भी इस दौरान धन की हानि हो सकती है।

उपायः हर रोज भगवान श्री हरि विष्णु की उपासना करें और उन्हें चन्दन अर्पित करें।

07. तुला राशि
आपकी राशि के ग्यारहवें भाव का स्वामी सूर्य इस दौरान आपकी राशि से सातवें भाव में गोचर करेगा, यह विवाह का भाव है। इस गोचर काल में आपको आमदनी के एक से अधिक जरिए मिल सकते हैं। आपका व्यापार बढ़ेगा और कुछ लोगों को शादी होने की भी संभावना रहेगी। वहीं यदि आप शादीशुदा हैं तो इस गोचर काल में आपके दांपत्य जीवन में तनाव और टकराव दोनों बढ़ेगा। आपके जीवनसाथी के स्वभाव में बदलाव आएगा और संभव है कि आप दोनों में अहम का टकराव हो। यह स्थिति आपके रिश्ते के लिए अच्छी नहीं होगी, इसलिए आपको धैर्य का परिचय देना ही बेहतर होगा।

यह समय सूर्य व्यापार के सिलसिले में आशातीत सफलता के मार्ग खोल कर रख देगा और आप बिज़नेस में काफी आगे बढ़ेंगे। आपके बड़े भाइयों से आपको सहयोग मिलेगा। वहीं यदि आप नौकरी पेशा व्यक्ति हैं तो इस गोचर से आपको अच्छी पदोन्नति मिल सकती है। आपका स्वास्थ्य बढ़िया होगा लेकिन फिर भी किसी प्रकार की छोटी मोटी शारीरिक समस्या आपको परेशान कर सकती है।

उपायः प्रातः काल सूर्योदय के पूर्व उठें और लाल रंग के पुष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल दें।


08. वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर छठे भाव में होगा, ज्योतिष में यह भाव शत्रु व रोग भाव कहलाता है। इस समय काल में आपको अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा क्योंकि छठे भाव में सूर्य कई बार अचानक से स्वास्थ्य समस्याएं दे सकता है। वहीं यदि आपका कोई कोर्ट कचहरी का मामला लंबित है तो वह भी आपके पक्ष में आने से आपका फायदा होगा।

यहां सूर्य उच्च राशि में होने से आपको सरकारी क्षेत्र से जबरदस्त फायदा होगा और आपके खर्चों पर भी लगाम लगेगी। आपकी नौकरी में भी यह समय बेहतरीन रहेगा। आपके काम में आपकी महारत रहेगी और लोग आपके काम को खूब तवज्जो देंगे। इस समय आपके पिताजी को किसी सम्मान की प्राप्ति हो सकती है। इसके अलावा आपको सुदूर यात्रा पर जाने के योग बनेंगे। यात्रा अधिक अनुकूल समय नहीं है और आपको थोड़ा सा ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इससे आपको शारीरिक समस्याओं के साथ-साथ आर्थिक तौर पर हानि का सामना भी करना पड़ सकता है।

उपायः रविवार की प्रातः अपनी कलाई पर मौली अर्थात कलावा छह बार लपेट कर बांधे।

09. धनु राशि
आपकी राशि के लिए सूर्य का गोचर पंचम भाव में होगा, यह भाव बुद्धि व पुत्र का माना गया है। ऐसे में यह गोचर आपके लिए मिले जुले परिणाम लेकर आएगा। आपको अपने पूर्व संचित पुण्य कर्मों का अच्छा फल मिलेगा, जिससे आपको समाज में ख्याति मिलेगी और आप लोकप्रिय बनेंगे और आपकी आमदनी में भी जबरदस्त वृद्धि होगी तथा व्यापार के सिलसिले में किए गए आपके प्रयास सार्थक साबित होंगे और आपको सरकारी क्षेत्र से जुड़कर काम करने में मदद मिलेगी।

वरिष्ठ अधिकारियों से आप के संपर्क अच्छे होंगे और इस समय में आपकी जॉब में ट्रांसफर हो सकता है। यदि आपका जीवन साथी भी कोई कार्य करता है तो इस दौरान उन्हें भी अच्छा लाभ मिलने की संभावना होगी। इस गोचर के दौरान आपका प्रियतम किसी अहम भावना में बह कर आपको बुरा भला कह सकता है। ऐसे में आपको रिश्ते को बनाए रखने के लिए संयम का परिचय देना पड़ेगा। यदि आप विद्यार्थी हैं तो शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।

उपायः लाल गाय को रविवार के दिन दोपहर के समय दोनों हाथों में गेहूं भरकर खिलाएं।


10. मकर राशि
इस गोचर काल में सूर्य आपके चतुर्थ भाव में अपनी उच्च राशि मेष में गोचर करेगा,चतुर्थ भाव को सुख व माता का भाव कहा गया है। इस दौरान आपके जीवन में अचानक से अनेक बदलाव आएंगे। यह बदलाव बड़े हो सकते हैं। यदि आप नौकरी करते हैं तो नौकरी में आपको अच्छा इंक्रीमेंट और पदोन्नति मिल सकती है और यदि आप व्यापार करते हैं तो उसमें भी समय सुखद रहेगा। लेकिन इस समय काल में आपकी माताजी का स्वास्थ्य पीड़ित रहेगा और वे अपने खराब स्वास्थ्य के कारण परेशान हो सकती हैं।

इसके अलावा यदि आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति अनुकूल है तो यह गोचर आपके लिए बहुत ही बढ़िया साबित होने वाला है। इस गोचर में अचानक से आपको मान सम्मान के साथ साथ कोई पुरस्कार मिल सकता है तथा समाज में आपका नाम मजबूत हो सकता है। इस समय अचानक से आपके चारों ओर का वातावरण सकारात्मक हो जाएगा और आपको यह बदलाव बहुत पसंद आएगा। वरिष्ठ अधिकारियों से आपको अच्छे संबंधों का लाभ मिलेगा और आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।लेकिन आपको किसी प्रकार की वाहन दुर्घटना से चोट लगने की संभावना हो सकती है, इससे आपको सावधान रहना चाहिए।

उपायः अपने पिता जी का सम्मान करें और प्रातः काल जल्दी उठने की आदत डालें।

11. कुंभ राशि
आपकी राशि के लिए सूर्य का गोचर तीसरे भाव में होगा, यह पराक्रम व भाई बहनों का भाव है। इस समय में आपके व्यापार का विस्तार होगा और यह वह समय होगा, जब आप मार्केट में अच्छी छाप छोड़ेंगे और आपके काम की तूती बोलेगी। वहीं आपको कुछ नए लोगों से मिलने का मौका मिलेगा, जो आपके व्यापार को नई दिशा देने में मदद करेंगे। इस समय में आपकी सामाजिक छवि मजबूत होगी।

यह समय आपके निजी जीवन के लिए बहुत अच्छा होगा और आप तरक्की की राह पर आगे बढ़ेंगे लेकिन दांपत्य जीवन के लिहाज से कुछ परेशानियों भरा समय हो सकता है। इस समय में आप और आपके जीवनसाथी के बीच भावनाओं और अहम का टकराव हो सकता है और एक दूसरे को समझ पाने में समस्या हो सकती है। आपके प्रयास आपको सफलता दिलाएंगे और आपके जीवनसाथी का भाग्य भी आपके भाग्य में वृद्धि का कारण बनेगा, जिससे आप दोनों ही काफी उत्साहित होंगे।

उपायः रविवार के दिन तांबे के लोटे से लाल चन्दन मिले हुए जल से सूर्य देव को अर्घ्य दें।


12. मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए सूर्य आपके छठे भाव का स्वामी है और अपने गोचर काल में आपके दूसरे भाव में अपनी उच्च राशि में इस में स्थित होगा, ज्योतिष में दूसरा भाव संपत्ति व व्यवहार का भाव कहलाता है। इस दौरान आर्थिक तौर पर आप काफी मजबूत बनेंगे और आपकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। मातृ पक्ष के लोगों से आपको कोई अच्छी खबर मिलेगी और आपको लाभ होगा। आपको इस समय में अपने किसी बहुप्रतीक्षित लोन के पास हो जाने से बड़ी खुशी होगी, जिससे आपके अटके हुए काम भी बनने लगेंगे।

वहीं इस गोचर के प्रभाव से आपकी वाणी में सहसा ही गुस्सा और कर्कशता दोनों की बढ़ोतरी हो सकती है और यह दोनों ही चीजें आपके पारिवारिक जीवन को प्रभावित करेंगी। इसकी वजह से आपके कुटुंब में किसी बात को लेकर असहमति और मनमुटाव की संभावना बन सकती है। आपको वाद-विवाद या किसी मुकदमे में लाभ होगा और आपकी धन की स्थिति मजबूत होगी।

उपायः लाल चंदन को घिस कर स्नान के जल में मिलाकर स्नान करें।