महाशिवरात्रि पर अद्भुत योग: इस बार 2021 में बस ये एक काम कर देगा महादेव को प्रसन्न..

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Published: 28 Feb 2021, 09:09 AM IST

शिव और शक्ति के मिलन का पर्व...

सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद ही खास माना जाता है, यह शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष दिन है। मान्यता के अनुसार इस दिन जो लोग सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करते हैं, उनको सच्चा जीवन साथी मिल जाता है और हर कामना पूर्ण हो जाती है।

शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का एक महान पर्व है, उत्तर भारतीय पंचांग के मुताबिक़ फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का आयोजन होता है। ऐसे में इस साल महाशिवरात्रि का पावन पर्व 11 मार्च, गुरुवार के दिन आ रहा है। इस दिन सुबह 09 बजकर 22 मिनट तक महान कल्याणकारी ‘शिवयोग’ भी विद्यामान रहेगा। इसके बाद ‘सिद्धयोग’ आरम्भ हो जाएगा।

महाशिवरात्रि मुहूर्त...
निशीथ काल पूजा मुहूर्त :- 24:06:41 से 24:55:14 तक
अवधि :- 00 घंटे 48 मिनट
महाशिवरात्री पारणा मुहूर्त :- 06:36:06 से 15:04:32 तक 12, मार्च को

ज्योतिष में ‘सिद्धयोग’ को काफी शुभ माना जाता है और इस योग के दौरान किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। इन योगों के दौरान शिव भगवान की पूजा करने से फल की प्राप्ति जरूर होती है और मन चाहिए चीज भी मिल जाती है। इन योगों के दौरान रुद्राभिषेक, शिव नाम कीर्तन, शिवपुराण का पाठ व शिव जी के मंत्रों का जाप करने से उत्तम फल मिलता है। इतना ही नहीं इस दौरान दान पुण्य करना व ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना अतिशुभ माना गया है।

शिवलिंग पूजा-
शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है और शिव का अर्थ है– कल्याणकारी और-लिंग का अर्थ है सृजन, सर्जनहार के रूप में-लिंग की पूजा होती है. संस्कृत में—लिंग का अर्थ है प्रतीक। भगवान शिव अनंत काल के प्रतीक हैंआ मान्यताओं के अनुसार, लिंग-एक विशाल लौकिक अंडाशय है, जिसका अर्थ है ब्रह्माण्ड, इसे ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है।

: कुवांरी कन्याएं रखें व्रत
महाशिवरात्रि का दिन कुवांरी कन्याओं के लिए शुभ माना जाता है और इस दिन व्रत करने से सच्चा जीवन साथी मिलता है। कुवांरी कन्या सुबह के समय मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल जरूर अर्पित करें व गौरी मां की पूजा करें। मान्यता है कि ऐसा करने से एक साल के अंदर ही विवाह हो जाएगा और सच्चा जीवन साथी मिल जाएगा।

शिवरात्रि व्रत की पूजा-विधि
1. मिट्टी के लोटे में पानी या दूध भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के फूल, चावल आदि डालकर ‘शिवलिंग’ पर चढ़ाना चाहिए। अगर आस-पास कोई शिव मंदिर नहीं है, तो घर में ही मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया जाना चाहिए।

2. शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप इस दिन करना चाहिए। साथ ही महाशिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है।

3. शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार शिवरात्रि का पूजन ‘निशीथ काल’ में करना सर्वश्रेष्ठ रहता है। हालाँकि भक्त रात्रि के चारों प्रहरों में से अपनी सुविधानुसार यह पूजन कर सकते हैं।

: नव ग्रह दोष हो शांत
जिन लोगो की कुंडली में नवग्रह दोष है। वो दोष भी शांत हो जाता है। नवग्रह दोष होने पर जीवन कष्टों से भर जाता है और मानसिक अशान्ति बनीं रहती है। ऐसे में जो लोग भी इस दोष से ग्रस्त हैं वो महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक कर दें।

: बढ़ती है पति की आयु
इस दिन शिव की पूजा करने से विवाहित स्त्रियों का वैधव्य दोष भी नष्ट हो जाता है और पति की आयु बढ़ जाती है। सुहागिन महिलाएं इस दिन माँ पार्वती की पूजा शिव जी के साथ करें। उसके बाद मां का श्रृंगार करें। मां को पूरा श्रृंगार का सामान चढ़ाया। उसके बाद पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भोले नाथ का स्नान करेँ।

फिर बेलपत्र पर अष्टगंध, कुमकुम, अथवा चन्दन से राम-राम लिखकर ॐ नमःशिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय’ कहते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके अलावा आप भांग, धतूर और मंदार पुष्प तथा गंगाजल भी शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं।

: बेलपत्र जरूर चढ़ाएं
अगर कोई मनोकामना है जो कि पूरी नहीं हो रही है तो आप इस दिन शिव जी का व्रत रखें और साथ में ही इन्हें बेलपत्र चढ़ाएं। ऐसा करने से भोले नाथ आपकी हर कामना को पूरा कर देंगे और जो आप चाहते हैं वो आपको मिल जाएंगी।

: शनि ग्रह रहे शांत
जिन लोगों की कुंडली में शनि ग्रह भारी है वो लोग इस दिन शिव की पूजा करते हुए उन्हें शमीपत्र चढ़ाएं। शमीपत्र चढ़ाने से शनि ग्रह शांत रहता है। साथ में ही शाढ़ेसाती, मारकेश तथा अशुभ ग्रह-गोचर से हानि नहीं होती है।

: इस तरह से करें भगवान शिव की पूजा
शिवरात्रि के दिन मंदिर जाकर आप सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें। उसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर शिव जी को चढ़ा दें। फिर साफ पानी से शिवलिंग को साफ करें। अब शिवलिंग पर दूध अर्पित करें और फिर से जल डाल दें।
शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाए और उन्हें फल, फूल और शमीपत्र अर्पित कर दें। शिवलिंग के सामने एक घी का दीपक जाल दें और शिव के मंत्र का जाप करें।
अगर आप इस दिन व्रत रखते हैं तो मन में व्रत रखने का संकल्प धारण करें। पूरे दिन केवल फल और दूध का सेवन ही करें।

शिव से जुड़े मंत्र...
– ओम साधो जातये नम:।।

– ओम वाम देवाय नम:।।

– ओम अघोराय नम:।।

– ओम तत्पुरूषाय नम:।।

– ओम ईशानाय नम:।।

-ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

रूद्र गायत्री मंत्र...

ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।।

महामृत्युंजय गायत्री मंत्र...

– ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्‌।

महाशिवरात्रि व्रत के नियम...
महाशिवरात्रि व्रत कब मनाया जाए, इसके लिए शास्त्रों के अनुसार निम्न नियम तय किए गए हैं -

1. चतुर्दशी पहले ही दिन निशीथव्यापिनी हो, तो उसी दिन महाशिवरात्रि मनाते हैं। रात्रि का आठवाँ मुहूर्त निशीथ काल कहलाता है। सरल शब्दों में कहें तो जब चतुर्दशी तिथि शुरू हो और रात का आठवाँ मुहूर्त चतुर्दशी तिथि में ही पड़ रहा हो, तो उसी दिन शिवरात्रि मनानी चाहिए।

2. चतुर्दशी दूसरे दिन निशीथकाल के पहले हिस्से को छुए और पहले दिन पूरे निशीथ को व्याप्त करे, तो पहले दिन ही महाशिवरात्रि का आयोजन किया जाता है।

3. बताईं गईं इन दो स्थितियों को छोड़कर बाक़ी हर स्थिति में व्रत अगले दिन ही किया जाता है।