Kartik Purnima 2020: कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त और इस दिन क्या करें और क्या ना करें

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Published: 29 Nov 2020, 06:13 PM IST

Kartik Purnima vrat : इस पूर्णिमा के व्रत से प्राप्त होता है सहस्त्र कोटि यज्ञों के समान पुण्य...

kartik purnima 2020 here is do and donts- इस पूर्णिमा के व्रत से प्राप्त होता है सहस्त्र कोटि यज्ञों के समान पुण्य

इस वर्ष यानि 2020 में 30 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा Kartik Purnima 2020 का दिन है। हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथों में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। पंडितों व धर्म के जानकारों के अनुसार श्री विष्णु पुराण और नारद पुराण में कार्तिक माह की पूर्णिमा के बारे में कहा गया है कि यह वर्ष की एकमात्र ऐसी पूर्णिमा है जो समस्त सुख, ऐश्वर्य प्रदान करने के साथ ही मृत्यु के पश्चात बैकुंठ लोक की प्राप्ति करवा सकती है। इस पूर्णिमा का व्रत जो व्यक्ति करता है उसे सहस्त्र कोटि यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। इसीलिए इस दिन अनेक प्रकार के उपाय किए जाते हैं जिनसे जीवन के समस्त अभावों को दूर किया जा सकता है।

कार्तिक पूर्णिमा पूजा शुभ मुहूर्त (Kartik Purnima Puja Shubh Muhurat)
पूर्णिमा तिथि आरंभ – 29 नवंबर, रविवार को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्‍त – 30 नवंबर, सोमवार को दोपहर 03 बजे तक।
कार्तिक पूर्णिमा संध्या पूजा का मुहूर्त – 30 नवंबर, सोमवार – शाम 5 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 37 मिनट तक।

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30 नवंबर 2020 को आ रही कार्तिक पूर्णिमा पर ऐसे ही कुछ सिद्ध उपाय आप भी करके अपने जीवन को संपन्न बना सकते हैं।

: आप वर्ष की किसी पूर्णिमा का व्रत न रखें, लेकिन मात्र कार्तिक पूर्णिमा का व्रत जरूर रखें। इस दिन व्रत रखकर रात्रि में बछड़ा दान करने से वंश वृद्धि होती है। उत्तम गुणों वाली संतान की प्राप्ति होती है।

: कार्तिक पूर्णिमा पर पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक अवश्य करना चाहिए। इससे समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। इससे वाजपेयी यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।

: कार्तिक पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध डालें और जड़ में से थोड़ी सी मिट्टी ले आएं। इसे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से घर में कभी लक्ष्मी की कमी नहीं होती।

: कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा में डुबकी जरूर लगाना चाहिए। जाने-अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित होता है। मोक्ष की प्राप्ति होती है। बुरे ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

: यदि जन्मकुंडली में चंद्र कमजोर है तो मानसिक पीड़ा आती है। चंद्र को मजबूत करने के लिए पूर्णिमा की रात्रि में निर्धन बालक-बालिकाओं को गर्म दूध पिलाएं।

: कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु की प्रतिमा को केसर के दूध से स्नान कराकर षोडशोपचार पूजन करें और विष्णु सहरुानाम का पाठ करें। इससे धन, सुख, वैभव, संपत्ति की प्राप्ति होती है।

: इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का लाल कमल या लाल गुलाब के पुष्पों से पूजन करें और उन्हें खीर का भोग लगाने से धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।

: कार्तिक पूर्णिमा के दिन पारद का श्रीयंत्र घर में स्थापित करने से जीवन के सारे अभाव दूर हो जाते हैं।

: इस दिन तुलसी पत्र ना तो तोड़ें और ना ही खाएं। केवल तुलसी का पूजन किया जा सकता है।

: कार्तिक पूर्णिमा के दिन हनुमानजी को 108 आंकड़े के पत्तों की माला पहनाएं, प्रत्येक पत्ते पर श्रीराम लिखें। यह माला हनुमानजी को पहनाने से रोग और शत्रु दूर हो जाते हैं।

: पुराणों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना बेहद लाभकारी होता है। इस दिन गंगा स्नान करने पर दस यज्ञ करने के बराबर पुण्य मिलता है, साथ ही इस दिन दान करने का भी बहुत महत्व है। इस दिन दान करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा हमेशा आपके ऊपर बनी रहती है। इस दिन भूलकर भी प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा व्रत विधि (Kartik Purnima Vrat Vidhi)...
: कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। साफ कपड़े पहनें।

: एक चौकी लें। उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर लक्ष्मीनारायण भगवान की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

: धूप, दीप और अगरबत्ती जलाकर ईश्वर का ध्यान करते हुए पूजा करें।

: फिर पूरा दिन सत्कर्म करते हुए व्यतीत करें।

: ध्यान रहे कि हिंसात्मक गतिविधियां ना करें और ना ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल करें।

: संभव हो तो ईश्वर का नाम या मंत्र जाप करें।

: फिर शाम होने पर संध्या आरती कर फलों का भोग श्री लक्ष्मी नारायण को लगाएं।

: इसके बाद प्रसाद बांटें और स्वयं भी प्रसाद खाकर व्रत संपन्न करें।

कार्तिक पूर्णिमा मंत्र (Kartik Purnima Mantra)
ॐ सों सोमाय नम:।
ॐ विष्णवे नमः।
ॐ कार्तिकेय नमः।
ॐ वृंदाय नमः।
ॐ केशवाय नमः।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व...
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान करना दस यज्ञों के समान पुण्यकारी माना जाता है. शास्त्रों में इसे महापुनीत पर्व कहा गया है. कृतिका नक्षत्र पड़ जाने पर इसे महाकार्तिकी कहते हैं. कार्तिक पूर्णिमा अगर भरणी और रोहिणी नक्षत्र में होने से इसका महत्व और बढ़ जाता है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही देव दीपावली भी मनाई जाती है.

श्रीहरि ने लिया था मतस्य अवतार
पुराणों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही भगवान विष्णु ने धर्म, वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।