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महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हरियाणा

By Shankar Sharma

Sep, 10 2018 10:03:53 (IST)

हरियाणा में सरकार भले ही किसी भी राजनीतिक दल की क्यों न हो लेकिन यहां महिलाएं कभी भी सुरक्षित नहीं रही।


संजीव शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा में सरकार भले ही किसी भी राजनीतिक दल की क्यों न हो लेकिन यहां महिलाएं कभी भी सुरक्षित नहीं रही। प्रदेश की पूर्व तथा मौजूदा सरकार महिला उत्पीडऩ की घटनाओं को रोकने के लिए भले ही महिला पुलिस थानों का विस्तार कर रही है लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में महिला उत्पीडऩ की घटनाएं कम होने की बजाए लगातार बढ़ रही हैं।


राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो अपनी रिपोर्ट में जहां हरियाणा को महिलाओं के लिए असुरक्षित इस राज्य को रेप की राजधानी मान चुका है वहीं राज्य सरकार ने भी सोमवार को विधानसभा के पटल पर रखी रिपोर्ट में यह स्वीकार कर लिया है कि प्रदेश में महिला उत्पीडऩ की घटनाओं में भारी वृद्धि हो रही है।


इस रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में रोजाना औसतन जहां नौ लड़कियों अथवा महिलाओं का अपहरण हो रहा है। वहीं आधा दर्जन लड़कियों अथवा महिलाओं को छेड़छाड़ का शिकार बनाया जा रहा है। यहां रोजाना औसतन चार महिलाओं/युवतियों के साथ बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। इसके बावजूद प्रदेश सरकार राज्य में स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रही है।


हरियाणा सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2014 से लेकनर अगस्त 2015 तक जहां दहेज हत्या के 260 केस सामने आए वहीं सितंबर 2017 से लेकर अब तक इनकी संख्या 202 तक पहुंच चुकी है। इसी अवधि के दौरान बलात्कार की 961 घटनाओं के मुकाबले इस वर्ष 1413 घटनाएं दर्ज की गई हैं।


इस अवधि के दौरान हरियाणा सरकार ने राज्य में महिला पुलिस थाने भी खोले और महिलाओं के अधिक आवागमन वाले क्षेत्रों में पीसीआर की गश्त भी बढ़ाई। इसके बावजूद सितंबर 2014 से लेकर अगस्त 2015 तक जहां 1833 महिलाओं व युवतियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं हुई वहीं सितंबर 2017 से लेकर अभी तक राज्य में महिला छेड़छाड़ की 2320 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। महिलाओं व युवतियों के साथ अपहरण की घटनाओं में चौंकाने वाली वृद्धि हुई है।

सितंबर 2014 से लेकर अगस्त 2015 तक हरियाणा में जहां महिला अपहरण की कुल 1664 घटनाएं हुई वहीं सितंबर 2014 से लेकर अब तक राज्य में महिला अपहरण की 3494 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। रिपोर्ट में निर्धारित अवधि के दौरान महिला उत्पीडऩ के जहां कुल 8126 मामले दर्ज किए गए हैं वहीं चालू वर्ष के दौरान इनकी संख्या बढक़र 10 हजार 325 तक पहुंच चुकी है।