Recession : आर्थिक प्रयासों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था क्यों हिचकौले खा रही है, इन बातों से जानिए

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Published: 13 Oct 2019, 07:37 PM IST

-वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम (world economic forum) की प्रतिस्पर्धात्मक रिपोर्ट (Competitive report) में भारत 58वें स्थान पर है। हालांकि 2017 के बाद इसने पांच स्थानों की छलांग लगाई है। ये छलांग जी-20 (G-20) समूह के अन्य देशों में सबसे ज्यादा है।

वैश्विक मंदी (global recession) और भारत के मजबूत प्रयासों के बावजूद अभी भारतीय अर्थव्यवस्था (indian economy) उस ऊंचाई पर नहीं आई, जितना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) ने अनुमान लगाया है। आइएमएफ ने 2019 में 7 और 2020 में 7.2 फीसदी वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम के अध्ययन में सामने आया है कि भारत की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव से ही अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

गति धीमी, लेकिन दुनिया में सबसे तेज
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का कहना है कि घरेलू और बाहरी मांग कमजोर होने से विकास की गति मंद पड़ी है, जिसके चलते विकास अनुमानों को 7 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है। फिर भी विश्व बैंक का अनुमान है कि देश अभी भी अन्य अर्थव्यवस्थाओं को पछाड़ देगा और आइएमएफ के अनुमान के अनुरूप बढ़ेगा। आइएमएफ ने 2020 में 7.2 फीसदी तक की वृद्धि का अनुमान लगाया है।

कुछ ही लोग अमीर हो रहे हैं
अफ्रोएशियन बैंक की वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुछ लोगों की संपत्ति ही तेजी से बढ़ी है। दस वर्ष में चीन सहित अन्य देशों की तुलना में भारत में निजी धन वृद्धि 180 फीसदी तेज हो सकती है।

प्रतिस्पर्धा में 5 रैंक सुधरी
वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम की प्रतिस्पर्धात्मक रिपोर्ट में भारत 58वें स्थान पर है। हालांकि 2017 के बाद इसने पांच स्थानों की छलांग लगाई है। ये छलांग जी-20 समूह के अन्य देशों में सबसे ज्यादा है। भारत नवाचार के रास्ते विकास करने में सबसे ज्यादा सक्षम है। रिपोर्ट कहती है कि व्यापार में खुलेपन और आइसीटी प्रौद्योगिकियों के बल पर भारतीय कंपनियां दुनिया के तीसरे सबसे बड़े बाजार तक पहुंच बना सकती हैं।

नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा
आइटी ट्रेड एसोसिएशन नेसकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप बेस है। यह 4750 से अधिक प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के बराबर है, जो 2018 में 1500 था।

लैंगिक असमानता
फोरम की जेंडर गैप रिपोर्ट के अनुसार भारत में 33 फीसदी लैंगिक अंतर है, जिसे अभी पाटना बाकी है। यह महिलाओं के लिए स्वास्थ्य और जीवन रक्षा के मामले में अभी भी दुनिया में नीचे से तीसरे स्थान पर है।

सबसे अधिक आबादी वाला देश
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2027 तक चीन को पीछे छोडक़र भारत दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। यह भी बताया है कि 2050 तक भारत सहित नौ देशों में दुनिया की आधी आबादी निवास करेगी। ये हैं अमरीका, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कांगो गणराज्य, इथियोपिया, तंजानिया, इंडोनेशिया और मिस्र। इसके अलावा दुनिया में भारतीय प्रवासी सबसे ज्यादा हैं। भारत के करीब 1.80 लाख लोग अन्य देशों में रहते हैं।

गरीबी पर अभी काम करना बाकी
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने गरीबी को कम करने में सफलता पाई है। 2015 में गरीबी दर 15 फीसदी घटी है। आंकड़ों के मुताबिक 2015 में 17.6 करोड़ भारतीय अत्यधिक गरीबी में जी रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक भले ही पांच वर्ष में गरीबी कम हुई है। लेकिन अब भी 10 में से 6 भारतीय प्रतिदिन 227 रुपए पर जीवन यापन कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत में श्रम कानूनों के अलावा अन्य उपायों को मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार ढालने पर बल दिया है।