एेतिहासिक निचले स्तर पर फिसला रुपया, डाॅलर के मुकाबले 78 पैसे टूटा भाव

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Published: 13 Aug 2018, 12:48 PM IST

आज डाॅलर के मुकाबले रुपया 66 पैसे लुढ़ककर 69.62 के स्तर पर खुला। फिलहाल अमरीकी डाॅलर के मुकाबले रुपए का भाव घटकर 69.61 के स्तर पर आ गया है।

एेतिहासिक निचले स्तर पर फिसला रुपया, डाॅलर के मुकाबले 78 पैसे टूटा भाव

नर्इ दिल्ली। सोमवार काे सप्ताह के पहले कारोबारी दिन रुपए में रिकाॅर्ड गिरावट देखने को मिला। आज डाॅलर के मुकाबले रुपया 66 पैसे लुढ़ककर 69.62 के स्तर पर खुला। फिलहाल अमरीकी डाॅलर के मुकाबले रुपए का भाव घटकर 69.61 के स्तर पर आ गया है। बता दें रुपए का ये अब तक का सबसे निचला स्तर है। डाॅलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी से देश में आयात की जाने वाली वस्तुएं आम आदमी के जेब पर बुरा असर डाल सकती हैं। हालांकि एक फायदा ये होगा देश से निर्यात किए जाने वाले सामानों के लिए पहले से अधिक पैसे मिलेंगे।


विदेशी मुद्रा भंडार 8 माह के निचले स्तर पर
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमरीकी डाॅलर में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। इसके बाद अब घरेलू विदेशी मुद्रा भंडार करीब 8 माह के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। भारतीय रुपए में कमजोरी का एक ये भी कारण है। डाॅलर इंडेक्स ने आज 96.50 के अपने उच्चतम स्तर को भी छुआ जो कि बीते 14 माह सबसे उच्चतम स्तर पर है। 3 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 402.70 अरब डाॅलर हो गया है। इसके पहले 15 दिसंबर 2018 को विदेश मुद्रा भंडार में इससे न्यूनतम स्तर पर दर्ज किया गया था।


आयात होने वाले सामानों पर खर्च करनें होंगे अधिक पैसा
रुपए में कमजाेरी के बाद सबसे बड़ा ये असर देखने को मिलेगा कि डाॅलर खरीदने के लिए अब पहले से अधिक रुपए चुकाने होंगे। इस प्रकार विदेश से आयात किए जाने वाले सामानों के लिए अधिक रुपए खर्च करने होंगे। बता दें कि भारत में बड़ी मात्रा में विदेशाें से सामान आयात किया जाता है। इसमें कच्चे तेल का अायात सबसे अधिक होता है। वहीं आयात होने वाली अन्य चीजों की बात करें तो इलेक्ट्राॅनिक आइटम्स, आैर सोना भी बड़ी मात्रा में भारत में आयात किया जाता है। इसके साथ ही विदशों में पढ़ार्इ करना आैर घूमना भी अब पहले से अधिक महंगा हो जाएगा।


लेकिन इन्हें मिलेगा फायदा
लेकिन रुपए के इस संकट से देश से निर्यातकों को बड़ा फायदा होने वाला है। डाॅलर में मजबूती से निर्यात होने वाले सामानों पर डाॅलर के बदले अधिक रुपए मिलेंगे। इस प्रकार निर्यात होने वाले सामानों पर निर्यातकों का ज्यादा फायदा होगा। भारत से बड़े मात्रा में आर्इटी सेवाआें के साथ-साथ इंजिनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स आैर कृषि अाधारित सामानों का निर्यात होता है। इस तरह रुपए में आर्इ कमजोरी से भारत के कर्इ सेक्टर्स को फायदा मिल सकता है।

 

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