रुपए से लेकर मजदूर आंदोलन तक आज पीएम मोदी के लिए बने यह चार सिरदर्द

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Published: 05 Sep 2018, 01:56 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोकर उठें होंगे उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि आज पूरे दिन चार तरीकों के सिरदर्द को झलेंगे। यह सिरदर्द नरेंद्र मोदी के लिए काफी खतरनाक हैं।

नर्इ दिल्ली। जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोकर उठें होंगे उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि आज पूरे दिन चार तरीकों के सिरदर्द को झलेंगे। यह सिरदर्द नरेंद्र मोदी के लिए काफी खतरनाक हैं। क्योंकि इनका जल्द ही इलाज नहीं कराया गया तो तो कुछ महीनों में यह नासूर भी बन सकते हैं आैर काफी नुकसान तक पहुंचा सकते हैं। आइए आपको भी बताते हैं आखिर वो कौन से चार सिरदर्द हैं जो उनके लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।

रुपए पहुंचा 72 के पास
उनका पहला आैर सबसे बड़ा सिरदर्द रुपए का लगातार निचले स्तर पर जाना है। अगर आज ही की बात करें तो रुपया डाॅलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले यह 21 पैसे टूटकर 71.79 पर पहुंच गया। जबकि मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 37 पैसे टूटकर 71.58 पर बंद हुआ था। इसके बाद सुबह इसमें सुधार देखा गया और यह 71.43 पर खुला। सुबह के कारोबार में रुपया अस्थिर रहकर डॉलर के मुकाबले 71.40 से 71.79 के बीच बना हुआ है। खास बात यह है कि अब सहयोगी पार्टी भी रुपए की गिरावट को लेकर बीजेपी के विरोध में आ गर्इ है आैर खुलेआम बयानबाजी भी कर रही है। अगर इस पर जल्द ही काम नहीं किया गया तो 2019 के लिए बड़ा नासूर बन सकता है।

राफेल डील पर याचिका
वहीं दूसरी आेर राफेल डील भी पीएम नरेंद्र मोदी के लिए बड़ा सिरदर्द बनती जा रही है। अब एक वकील ने राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दी है। जिसकी सुनवार्इ अगले सप्ताह तक होनी है। इससे पहले विपक्ष राफेल डील पर सरकार को घेरने में लगा हुआ है। पूरे देश में कांग्रेस नेता प्रस कांफ्रेंस कर राफेल डील पर अपने स्तर पर बयान दे रहे हैं। वहीं बीजेपी ने अनिल अंबानी के माध्यम से राफेल डील पर कांग्रेस को बैकफुट पर लाने की कोशिश की थी। मगर अब खुद अनिल अंबानी इसमें घिरते हुए नजर आ रहे हैं। एेसे में राफेल डील पर पीएम मोदी ने चुप्पी नहीं तोड़ी तो 2019 तक ये मुद्दा बड़ा नासूर साबित हो सकता है।

किसानों आैर मजदूरों का आंदोलन
देश के किसान आैर मजदूर पीएम मोदी के लिए बुधवार को सबसे बड़ा सिरदर्द लेकर आए हैं। नर्इ दिल्ली में लाखों की संख्या में किसान आैर मजदूर अपनी मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। जहां एक आेर मजदूर अपना न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी आेर किसान अपनी कर्ज माफी की डिमांड को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। मौजूदा समय में देश का किसान मोदी सरकार से सबसे ज्यादा नाराज है। एेसे में अगर इन्हें शांत नहीं कराया तो दोनों ही वर्ग देश की सरकार के लिए नासूर बनने में सक्षम हैं।

पेट्राेल-डीजल के दाम
वहीं पेट्रोल आैर डीजल के दाम ने देश में बड़ी आग लगार्इ हुर्इ है। आज पेट्रोल आैर डीजल के दाम अपने पीक पर हैं। वहीं दूसरी आेर पेट्रोलियम मंत्री भाजपा शासित राज्यों तक में ड्यूटी कम करने की बात नहीं मनवा पा रहे हैं। ना ही दोनों को जीएसटी के दायरे में लाया गया है। जिसकी वजह से देश की जनता में काफी नाराजगी है। क्योंकि जीएसटी का असली फायदा देश के लोगों को पेट्रोल आैर डीजल पर ही मिलेगा। लेकिन देश की केंद्र सरकार राज्यों को समझा पाने में नाकामयाब साबित हुर्इ है। जो 2019 में नासूर भी बन सकता है।

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