किसानों की कमाई और रोजगार के लिए इस मंत्रालय ने खोला अपना खजाना

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Updated: 17 Feb 2021, 11:52 AM IST

  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय प्रसंस्करण उद्योग योजनाओं के लिए किया बजट का 10 फीसदी आवंटित
  • असम में 200 करोड़ रुपए की परियोजना लागत के साथ 15 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां कार्य कर रही हैं काम

नई दिल्ली। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने मंगलवार को कहा कि देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास पर केंद्र सरकार जोर दे रही है, क्योंकि इससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलने के साथ-साथ फसल कटाई के बाद के कचरे को कम करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। रामेश्वर तेली असम के गुवाहाटी में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग हितधारकों के साथ एक बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय प्रसंस्करण उद्योग के विकास के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए अपने बजट का 10 फीसदी आवंटित कर रहा है।

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असम में परियोजना को मंजूरी
उन्होंने बताया कि असम में इस समय करीब 200 करोड़ रुपये की परियोजना लागत के साथ 15 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां कार्य कर रही हैं। रामेश्वर तेली असम के डिब्रूगढ़ से सांसद हैं। उन्होंने बताया कि असम में लगभग 60 करोड़ रुपए के कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर्स की परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी गई है और इसी राशि की एक अन्य कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर्स-एपीसी परियोजना तैयार है, जिसे मंजूरी प्रदान की जानी है। उन्होंने कहा कि असम के नलबाड़ी जिले में मेगा फूड पार्क के माध्यम से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

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सब्सिडी भी दी जा रही है
तेली ने आगे कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की प्रमुख योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत, इस क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उच्च दर और अन्य छूटों के संदर्भ में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष लाभ उपलब्ध कराए गए हैं। मसलन, पूर्वोत्तर क्षेत्र में सब्सिडी की दर सामान्य क्षेत्रों की 35 प्रतिशत से 50 प्रतिशत की तुलना में 50 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक है। इस समय, पीएमकेएसवाई के तहत असम में 28 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें सात कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कृषि उद्यान योजना को विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र को ध्यान में रखकर बनाया गया है।