हैल्दी डॉग की लार से सेप्सिस का अनोखा केस,सावधानी बरतें

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Published: 20 Aug 2018, 04:25 AM IST

उत्तरी अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य के रहने वाले ग्रेग मोंटेफेल को उनके पालतू डॉगी की लार से हुए संक्रमण के कारण दोनों हाथ-पांव गंवाने पड़े।

उत्तरी अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य के रहने वाले ग्रेग मोंटेफेल को उनके पालतू डॉगी की लार से हुए संक्रमण के कारण दोनों हाथ-पांव गंवाने पड़े। वहीं, उनकी पत्नी डॉन मोंटेफेल का कहना है कि संक्रमण के कारण ग्रेग की नाक में भी रक्त प्रवाह नहीं हो रहा है। इसकी भी सर्जरी करनी पड़ सकती है।

पहले तेज बुखार और उल्टी की हुई शिकायत
पहले ग्रेग को तेज बुखार और उल्टी की शिकायत हुई। उन्हें स्थानीय अस्पताल भर्ती कराया। घरों को पेंट करने वाले स्पोर्टी बाइक चलाने के शौकीन ४८ वर्षीय ग्रेग के दोनों पैर अस्पताल में भर्ती होने के सप्ताह भर के भीतर काटने पड़े। इसके बाद उनके हाथों में भी संक्रमण तेजी से फैल गया। इस वजह से उसे भी काटना पड़ा। इलाज कर रहे उनके डॉक्टर ने बताया कि ग्रेग के खून में उनके पालतू कुत्ते की लार से निकले हानिकारक बैक्टीरिया के कारण सेप्सिस हो गया था। इस घातक बैक्टीरिया के कारण उन्हें रक्त विषाक्तता हो गई।

इस कारण रक्त का प्रवाह इतना ज्यादा हो गया कि ऊतक और मांसपेशियां नष्ट होने लगे। चिकित्सक ने बताया कि कैप्नोसाइटोटोगा कैनिमोर्सस नामक बैक्टीरिया की वजह से इतनी जल्दी संक्रमण पूरी शरीर में फैल गया। ग्रेग का इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि कुत्ते की लार में पाया जाने वाले बैक्टीरिया मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं है। यह एक दुलर्भ केस है।

चाटने से पहुंचा बैक्टीरिया
ग्रेग की पत्नी ने बताया कि उनके यहां ८ डॉगी हैं। इनमें से किसी एक डॉगी के चाटने से यह बैक्टीरिया ग्रेग के शरीर में पहुंचा है। अब ग्रेग का पूरा जीवन एक इलेक्ट्रिक व्हील चेयर तक सिमट कर रह गया है। डॉन मोंटेफेल ने कहा कि इस स्थिति में उनके पास पॉजिटिव बने रहने के अलावा कोई चारा नहीं है।

मामला दुर्लभ, इंजेक्शन व साफ-सफाई का रखें ध्यान
दुलर्भ मामला है। कुत्ते की लार मानव शरीर के लिए खतरनाक नहीं है। मेरी जानकारी में ऐसा केस नहीं आया है। हमारे पास घर में पाले जाने वाले कुत्ते को एंटी रैबीज के इंजेक्शन और समय-समय पर उसकी स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। उसकी साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।

डॉ. गोवर्धन मीना, सीनियर प्रोफेसर व रेबीज विशेषज्ञ, एसएमएस अस्पताल, जयपुर