दवाओं का हिट या मिस फॉर्मूला

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Published: 15 Aug 2018, 05:05 AM IST

आजकल डॉक्टर एकसाथ कई दवाओं का प्रयोग यह सोचकर कर रहे हैं कि एक नहीं तो दूसरी दवा तो काम करेगी ही। लेकिन ये दवाएं कई बार...

आजकल डॉक्टर एकसाथ कई दवाओं का प्रयोग यह सोचकर कर रहे हैं कि एक नहीं तो दूसरी दवा तो काम करेगी ही। लेकिन ये दवाएं कई बार मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रही हैं।

केस : १

नन्हा कार्तिक अभी साल भर का भी नहीं हुआ। वह बुखार और डायरिया से परेशान था। मम्मी उसे शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले गईं। डॉक्टर साहब ने नीमसुलाइड और पैरासिटामोल के कॉम्बिनेशन वाली दवा दी। (भारत के अलावा यह कॉम्बिनेशन दुनिया में कहीं स्वीकार्य नहीं)। इतना ही नहीं डॉक्टर ने नाइट्राजोक्सानाइड, ओफ्लॉक्सासिन और ओंडांसीटेरॉन के कॉम्बिनेशन वाली दवा भी दे दी। ओफ्लॉक्सासिन 6 साल से कम के मरीजों के लिए नहीं होती इससे शारीरिक ढांचा गड़बड़ा सकता है। ओंडांसीटेरॉन सिर्फ कैंसर के रोगियों को जी मिचलाने और उल्टी की स्थिति में दी जाती है।

केस : २

न वीन कमर दर्द से परेशान था। अस्थि विशेषज्ञ को दिखाया। डॉक्टर ने पांच दवा लिख दीं। एक दवा में नीमसुलाइड था (अमरीका जैसे विकसित देशों में प्रतिबंधित)। दूसरी दवा में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाने वाला कंपाउंड था। तीसरी पेनकिलर थी, उसे आमतौर पर उपरोक्त दवाओं के साथ नहीं देते (रक्तचाप और लिवर फैल्योर के डर से)। चौथी दवा एक एंटी बैक्टीरियल थी (डायबिटीज का खतरा बढऩे के कारण विदेशों में नहीं दी जाती) और पांचवी दवा विटामिन बी कॉम्प्लेक्स थी। यह प्रिस्क्रिप्शन डॉक्टर की लापरवाही व गैरजिम्मेदारी का नतीजा था। शायद उनकी सोच थी कि एक नहीं तो दूसरी काम करेगी।

ये तो मात्र दो उदाहरण हैं डॉक्टरों की लापरवाही के। आपको ऐसे सैंकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे जिनमें डॉक्टरों ने एक साथ दो एंटीबायोटिक दवाएं, साथ में कोई आयुर्वेदिक दवा, दो-दो पेनकिलर और नुकसानदायक दवाएं मरीजों को दी हैं।

जरूरी है विश्लेषण

मंथली इंडेक्स ऑफ मेडिकल स्पेशलिटीज’ के संपादक डॉ. चन्द्रा गुलाटी कहते हंै कि डॉक्टरों को रोग का विश्लेषण करके जरूरी टेस्टों के बाद ही एंटीबायोटिक लेने की सलाह देनी चाहिए। दर्दनिवारक दवाओं का जरूरी होने पर ही प्रयोग करें।

सेहत पर भारी

डॉ. चंद्रा के अनुसार आजकल कई डॉक्टर हिट या मिस वाला फार्मूला अपना रहे हैं और एक साथ कई दवाओं का प्रयोग यह सोचकर कर रहे हैं कि एक नहीं तो दूसरी दवा तो काम करेगी ही। जबकि उनको मरीज की सेहत के लिहाज से इस प्रवृत्ति से बचना चाहिए। लिखी गई दवाओं पर शंका हो तो डॉक्टर से एक बार उनके बारे में पूछ लेना चाहिए।

ये करें मरीज

डॉक्टरी पर्चे को ध्यान से पढ़ें। उन्होंने जो दवाएं लिखी हैं उनके बारे में जान लें कि कौनसी दवा किस काम की है। उनसे रोग के बार में भी पर्चे पर लिखने को कहें। डॉक्टर जो जांच करवाने को कहे उन्हें करवा लें। आपको लगे कि दवाओं की संख्या ज्यादा है या कॉम्बिनेशन दवाएं लिखी गई हैं तो सेकेंड ओपिनियन लेने में हिचके नहीं।

सही कॉम्बिनेशन जरूरी

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक गुप्ता के अनुसार कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जिसमें बीमारियों के लक्षण एक-दूसरे से जुड़े होते हैं जैसे जुकाम होने पर बच्चे को अक्सर खांसी और बुखार हो जाता है। ऐसे में यह डॉक्टर की जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चे को उचित संयोजन (रेशनल कॉम्बिनेशन) वाली दवाएं ही लिखें। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया भी समय-समय पर डॉक्टरों को शिक्षित करती है कि वे मरीजों को कम से कम और सही दवाएं लिखें क्योंकि एक साथ कई दवाओं का गलत कॉम्बिनेशन शरीर को नुकसान पहुंचाता है और धीरे-धीरे दवाएं बेअसर होने लगती हैं।

इंट्रेक्शन ऑफ ड्रग्स

फिजिशियन डॉ. जी. डी. पारीक के अनुसार मरीज के लिए कोई भी दवाएं लिखने से पहले डॉक्टर को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उन दवाइयों में इंट्रेक्शन तो नहीं है क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो उनमें से किसी एक दवा का असर कम होगा या बढ़ जाएगा।