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भगवान वामन जयंती 21 सितंबर 2018, पूजा एवं कथा महत्व

By Shyam Kishor

Sep, 11 2018 02:00:00 (IST)

भगवान वामन जयंती 21 सितंबर 2018, पूजा एवं कथा महत्व

भादो माह के शुक्लपक्ष की द्वादशी को भगवान श्री विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया था तभी से वामन द्वादशी के रुप में वामन जयंती मनाई जाती है । साल 2018 में वामन जयंती, 21 सितंबर 2018 को मनाई जाएगी । जाने पूजा विधि एवं वामन अवतार की कथा महत्व ।

 

वामन द्वादशी पूजा


पूजा की विधि –
इस खास दिन प्रातःकाल भगवान श्री वामन जी का पंचोपचार विधि एवं षोडषोपचार पूजन करने से पहले चावल, दही आदि जैसी वस्तुओं का दान करने का विधान सबसे उत्तम माना गया है । व्रत रखकर शाम के समय भगवान वामन का पूजन करें और व्रत की कथा का श्रवण करने से जीवन की सभी समस्याओं का निराकरण हो जाता हैं, अर्थात भगवान वामन जी अपने भक्तों की हर मनोकामनाएं पूरी करते हैं ।

 

वामन द्वादशी कथा
शास्त्रों में वामन अवतार को भगवान विष्णु का महत्वपूर्ण अवतार माना जाता है, श्रीमद्भगवद पुराण में वामन अवतार का उल्लेख मिलता है । वामन अवतार कथा अनुसार देव और दैत्यों के युद्ध में देव पराजित होने लगते हैं, असुर सेना अमरावती पर आक्रमण करने लगती है, तब इन्द्र भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं । भगवान विष्णु उनकी सहायता करने का आश्वासन देते हैं और वामन रुप में माता अदिति के गर्भ से जन्म लेते हैं । भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन अदिति के गर्भ से प्रकट हो अवतार लेते हैं तथा ब्राह्मण-ब्रह्मचारी का रूप धारण करते हैं।

 

वामन अवतार और बलि की कथा
महर्षि कश्यप ऋषियों के साथ उनका उपनयन संस्कार करते हैं वामन बटुक को महर्षि पुलह ने यज्ञोपवीत, अगस्त्य ने मृगचर्म, मरीचि ने पलाश दण्ड, आंगिरस ने वस्त्र, सूर्य ने छत्र, भृगु ने खड़ाऊं, गुरु देव जनेऊ तथा कमण्डल, अदिति ने कोपीन, सरस्वती ने रुद्राक्ष माला तथा कुबेर ने भिक्षा पात्र प्रदान किए तत्पश्चात भगवान वामन पिता से आज्ञा लेकर बलि के पास जाते हैं राजा बली नर्मदा के उत्तर-तट पर अन्तिम अश्वमेध यज्ञ कर रहे होते हैं ।

 

भगवान वामन जी ब्राह्माण वेश धर कर, राजा बलि के पास भिक्षा मांगने पहुंते हैं, और भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं, राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए, तीन पग भूमि दान में दे देते हैं । वामन रुप श्री भगवान ने एक पग में स्वर्ग ओर दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लेने के बाद तीसरा पैर रखने के लिए ब्रह्मांड में कोई जगह ही नहीं बची तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के पैर के नीचे रखते हुए कहा हे भगवन तीसरा पग मेरे सिर पर रखे । राजा बलि के द्वारा वचन का पालन करने पर, भगवान वामन अत्यन्त प्रसन्न होते हैं और बलि को पाताललोक का स्वामी बना देते हैं इस तरह भगवान वामन देवताओं की सहायता कर उन्हें पुन: स्वर्ग का अधिकारी बनाते हैं ।

 

वामन द्वादशी व्रत का फल
कहा जाता हैं कि अगर इस दिन श्रावण नक्षत्र हो तो इस व्रत की महत्ता और भी बढ़ जाती है, भक्तों को इस दिन उपवास करके वामन भगवान का पंचोपचार सहित पूजन करना चाहिए । जो भक्ति श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक वामन भगवान की पूजा करते हैं वामन भगवान उनको सभी कष्टों से उसी प्रकार मुक्ति दिलाते हैं जैसे उन्होंने देवताओं को राजा बलि के कष्ट से मुक्त किया था ।