नींद पूरी लें क्योंकि अनिद्रा लाती है बीमारियां

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Published: 20 Jun 2018, 05:02 AM IST

भागदौड़ भरी जीवनशैली और काम के बोझ का असर नींद पर पड़ रहा है। दिनभर की थकान के बावजूद तनाव का बढ़ता स्तर स्लीपिंग पैटर्न यानी सोने के समय और उसकी अवधि पर असर डाल रहा है।

भागदौड़ भरी जीवनशैली और काम के बोझ का असर नींद पर पड़ रहा है। दिनभर की थकान के बावजूद तनाव का बढ़ता स्तर स्लीपिंग पैटर्न यानी सोने के समय और उसकी अवधि पर असर डाल रहा है। कई शोध मेंं भी सामने आ चुका है कि अनिद्रा की समस्या वजन बढऩे और हार्ट डिजीज का कारण बन सकती है। ऐसे में जरूरी है इसके कारणों को जाना जाए ताकि लाइफस्टाइल में बदलाव किया जा सके। एक व्यक्ति को औसतन ८ घंटे की नींद जरूरी है ताकि वह स्वस्थ रह सके। जानते अनिद्रा से जुड़ी कुछ खास बातें...

क्यों जरूरी है नींद
जिस तरह मशीन लंबे समय तक चलते-चलते अपना संतुलन खो देती है, उसी तरह हमारा शरीर भी एक समय के बाद आराम चाहता है। दिनभर में हुई थकान को दूर कर तन-मन को तरोताजा करती है नींद। अगर शरीर को आराम न मिले तो शारीरिक और मानसिक सिस्टम पर असर पडऩे लगता है। इम्यून और नर्वस सिस्टम को नॉर्मल रखने, बीमारियों से लडऩे के लिए नींद जरूरी है।

नींद से जुड़ी कॉमन समस्याएं
अनिद्रा की स्थिति में कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। इनमें सिर और शरीर में दर्द होना, चिड़चिड़ा होना, जल्दी-जल्दी गुस्सा आना, काम की क्षमता पर असर पडऩा, मोटापा बढऩा, कब्ज रहने के लिए ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, ब्रेन हैमरेज जैसी समस्याएं शामिल हैं। सोने के लिए सबसे अच्छा वक्त है, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे का। इसमें एकाध घंटा आगे-पीछे भी ठीक है। लेकिन और देर से सोते हैं तो शरीर को फ्रेश होने के लिए और लंबी नींद की जरूरत होती है।

ये करें
तयरुटीन के अनुसार सोएं। इससे तय वक्त पर नींद आएगी और टूटेगी। साथ ही बेडरूम साफ-सुथरा हो और उसमें अंधेरा हो।
किसी भी शख्स के लिए सूरज की रोशनी और अंधेरा, दोनों देखना जरूरी है। स्लीप हॉर्मोन मेलाटॉनिन तभी निकलता है, जब सूरज की रोशनी में भी जाएं। यह स्लीप साइकल को मेंटेन करता है।
रोजाना सुबह एक्सरसाइज करें। इससे शरीर थकता है और रात में अच्छी नींद आती है।
अनिद्रा की समस्या है तो रात में कुछ अच्छा पढऩे से बचना चाहिए। बोरिंग-सी किताब पढ़ें। इससे नींद जल्दी आएगी।
सोने से पहले गुनगुना दूध पिएं।

ये न करें
बेडरूम में बाहर की आवाजें और तेज रोशनी न आए। तेज म्यूजिक सुनने और फास्ट डांस करने से बचें।
देर रात तक कंप्यूटर गेम्स न खेलें, न ही मोबाइल का इस्तेमाल न करें।