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संघ और साधु-संतों ने दी चेतावनी! कहा - बात न मानी तो इस बार करेंगी भाजपा का विरोध..

By Amit Mishra

Sep, 12 2018 03:48:18 (IST)

सरकार ने 2008 से नहीं बढ़ाया मानदेय

भोपाल. विधानसभा चुनाव 2018 को लेकर राजनीतिक उठापटक तेजी होती जा रही। एक तरफ सरकार जन आशीर्वाद यात्रा से जनता का दिल जीतने का प्रयास में जुटी है तो वहीं दूसरी तरफ साधु संतों ने भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। साधु संतों का कहना है कि 2008 से सरकार द्वारा ने अब तक मिलने वाला मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। जिससे साधु संतों में प्रदेश के शिवराज सरकार के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है। वही मांगे पूरी ना होने पर उन्होंने उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी है।

 

मिल सकती है बड़ी चुनौती

बता दें कि संत समाज को सरकरार द्वारा राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने की बात कही गयी थी जिसके बाद भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। मध्य प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव 2018 से पहले एक बार फिर शिवराज सरकार के सामने संत-पुजारी एक बड़ी चुनौती के रूप में रास्ता रोकने का काम कर सकती है।

संत-पुजारियों ने बड़ा आरोप

संत पुजारी संघ ने बुधवार को बैठक में अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए चर्चा की। संत-पुजारियों का आरोप है कि लंबे समय से सरकार उन्हें नजर अंदाज करती आ रही है। मनरेगा बराबर भी उन्हें मासिक मानदेय नहीं दिया जा रहा है। साल में एक बार मिलने वाला अनुदान भी सरकार द्वारा रोक दिया गया है। संतों का कहना है कि प्रदेश सरकार सबकी मांगों को पूरा कर रही है, लेकिन संत-पुजारियों को सिर्फ आश्वासन दे रही है। यदि सरकार ने जल्द मांगों को पूरा नहीं किया तो चुनाव से पहले संत समाज द्वार प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

 

धरना प्रदर्शन पर बैठे सिंचाई संघ

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में जल सिंचाई संघ अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे गए है। धरना प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि दो महीने के अंदर यदि मांगे पूरी नहीं हुई तो जल उपभोक्ता संघ प्रदेशव्यापी स्तर पर अनिश्चित कालीन आंदोलन करेगा। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार मांगें पूरी नहीं करती तो चुनाव से पहले भाजपा के विरोध प्रचार करेगी। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल पुनः 5 साल किए जाए और नए अध्यक्षों की निर्वाचन प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए।