Violence Against Women: महिलाएं बोलीं गलतियां बर्दाश्त न करें उठाएं आवाज

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(अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस पर मध्यप्रदेश की  महिलाओं ने पत्रिका के साथ शेयर की मन की बात...। कहा- मिलकर लड़ना होगा, तभी खत्म होगा महिलाओं पर अत्याचार...।)
भोपाल/इंदौर/जबलपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस 25 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिन का चयन 1981 में हुआ था और संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 1999 में इसे अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता दी थी।

यह दिन इसलिए चुना था कि इस दिन डोमेनिकन गणराज्य की तीन सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं की निर्दयता से हत्या कर दी गई थी।

महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न, फब्तियां कसने, छेड़खानी, वैश्यावृत्ति, गर्भधारण के लिए विवश करना, महिलाओं और लड़कियों को ख़रीदना-बेचना आदि अपराधों को बचाना है। आइये जानते हैं प्रदेश की महिलाएं इस बारे में क्या सोचती हैं...।

बड़े अफसर के खिलाफ आवाज उठाईडॉ. रूमा भट्टाचार्या 15 सालों से युवाओं और बच्चों की मानसिक परेशानी पर काम कर रही हैं। वे राजधानी की वरिष्ठ मनोचिकित्सक भी हैं। वे पिछले दिनों उस समय चर्चा में आई जब एक बड़े शासकीय अफसर ने उनके साथ वाहन चलाने को लेकर दुर्व्यवहार किया था। इस पर रूमा ने शासकीय अधिकारी पर यातायात नियमों के उल्लघंन करने और धमकाने के मामले पर रिपोर्ट तक दर्ज कराई। एक महिला का आवाज उठाने की घटना को सभी ने सराहा था। 



संस्कारवान बच्चे अत्याचार नहीं करतेएक बात हम महिलाओं को समझ लेनी चाहिए कि अत्याचार करने वालों को हमने ही जन्म दिया है। हम न होते तो ये धरती पर आ ही नहीं पाते। यदि इनसे मुक्ति चाहिए तो जन्मदात्री को बच्चों में संस्कारों का रोपण करना होगा,क्योंकि संस्कारवान बच्चे महिलाओं पर कभी अत्याचार नहीं किया करते हैं।- रीना गुजराल, पूर्व सदस्य, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग



अत्याचार के खिलाफ महिलाएं आगे नहीं आतींमहिलाओं पर बढ़ रहे अत्याचार के खिलाफ जब तक वे स्वयं आगे नहीं आएंगी, तब तक उन्हें न्याय के लिए दूसरों पर ही आश्रित रहना पड़ेगा। ऐसे में अत्याचारों पर जल्द लगाम लगाने की बात केवल चर्चाओं तक ही सीमित रहेगी।-अंजूलता गुप्ता



जैंडर इक्वेलिटी की जरूरतनारी सृष्टि की बनाई अनमोल कृति है। महिलाओं के प्रति वायलेंस इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि पूरे विश्व में जैंडर इक्वेलिटी नहीं है। किसी को महत्वपूर्ण और किसी को कमतर मानना, बस यहीं से वॉयलेंस शुरू हो जाता है। सृष्टि एक पंछी की तरह है और स्त्री-पुरुष उसके पंख। एक को नोंच दिया जाए तो परवाज कैसे पूरी होगी। इसलिए हमें सबसे पहले जैंडर इक्वेलिटी लानी होगी।जनक पलटा, पदमश्री




गलती बर्दाश्त नहीं करना चाहिएमुझे गर्व है कि मैंने एक लड़की के रूप में जन्म लिया है। नारी, ममता और त्याग की मूरत है। मेरे परिवार ने मुझे हर गलत का विरोध करना सिखाया है। हमें जहां भी महिला के साथ अन्याय हो रहा है वहां आवाज उठानी होगी। मैं हर गलत का विरोध करती हूं आप भी कीजिए। हमें अधिकार मांगने की जरूरत नहीं बराबरी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।सुनीरा सोनी, यंग आर्किटेक्ट



अच्छा बर्ताव समाज के सामने लाएमहिलाओं पर अत्याचार तभी रूकेंगे जब हमारी सोच बदलेगी। ज्वाला के जरिए हमने लगातार महिलाओं को न्याय दिलाने की कोशिश की है। अब हम एक नया आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। मैं रक्षक। इसमें हम लड़कों को लड़कियों की रक्षा के लिए तैयार करेंगे। उन्हें सिर्फ शपथ ही नहीं दिलाएंगे बल्कि उनके द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्यों और बर्ताव को समाज के सामने लाएंगे ताकि लोगों की बुनियादी सोच में बदलाव आए।दिव्या गुप्ता, समाजिक कार्यकर्ता, ज्वाला प्रमुख



वीडियो में देखें क्या कहती हैं महिलाएं