अदालत ने जारी किया पुलिस अधिकारी दीपक ठाकुर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट

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Published: 19 Aug 2021, 01:12 AM IST

अदालत ने खारिज की अग्रिम जमानत अर्जी, महाराष्ट्र की महिला के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर रिश्वत मांगने का मामला

भोपाल. महाराष्ट्र निवासी महिला के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर मामले को रफा दफा करने के एवज में 500000 की रिश्वत के मामले में साइबर क्राइम सेल मैं पदस्थ रहे तत्कालीन डीएसपी और वर्तमान में स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में एआइजी दीपक ठाकुर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट ने ठाकुर की ओर से पेश अग्रिम जमानत अर्जी नामंजूर कर, गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। विशेष सत्र न्यायाधीश लोकायुक्त अमित रंजन समाधिया ने बुधवार को अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिए हैं। कोर्ट के अनुसार मामले में परिस्थितियों को देखते हुए ठाकुर को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को दीपक ठाकुर सहित चार आरोपियों के खिलाफ जिला अदालत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चालान पेश किया था । तत्कालीन डीएसपी दीपक ठाकुर चालान पेश होने की सूचना के बावजूद कोर्ट नहीं पहुंचे, उनकी ओर से अग्रिम जमानत अर्जी पेश की गई थी। चालान पेश होने की सूचना पर महिला हवलदार इशरत जहां और दोनों आरक्षक कोर्ट पहुंचे थे। कोर्ट ने मंगलवार को इन तीनों को जेल भेजने के आदेश दिए थे।

मंगलवार को चालान पेश होने की सूचना पर महिला हवलदार इशरत जहां और दोनों आरक्षक कोर्ट पहुंचे थे। अदालत में तीनों की ओर से जमानत की मांग को लेकर अर्जी दायर की गई। अदालत ने तीनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।कोर्ट के अनुसार मामला गंभीर प्रकृति का है ऐसे मामलों में जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने साइबर क्राइम में पदस्थ महिला हवलदार इशरत जहां, इंद्रपाल सिंह और सौरव भट्ट की जमानत अर्जी खारिज कर जेल भेज दिया था।मामले के अनुसार वर्ष 2015 में डीएसपी ठाकुर सहित अन्य आरोपियों ने साइबर क्राइम थाने में महाराष्ट्र निवासी महिला के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज किया था। बाद में इसे रफा-दफा करने के लिए फरियादी महिला से 500000 की रिश्वत मांगी थी। महिला की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।