उपचुनाव: भाजपा-कांग्रेस में नेता पुत्र ने संभाली प्रचार की कमान, जातिगत समीकरण साधने पर फोकस

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Published: 24 Oct 2020, 01:12 PM IST

भाजपा के नेता पुत्रों के लिए उपचुनाव राजनीतिक प्रशिक्षण के तौर पर भी देखा जा रहा है।

भोपाल. मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए प्रचार अब जोरों पर है। भाजपा-कांग्रेस की टीम बी के नेताओं ने भी संभाल लिया है। उपचुनाव में टीम बी यानी नेता पुत्रों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। भाजपा के नेता पुत्रों के लिए उपचुनाव राजनीतिक प्रशिक्षण के तौर पर भी देखा जा रहा है।

इन युवाओं को इन्हीं सीटों पर भेजा रहा जा रहा है जहां परिवार की पकड़ है और जातिगत समीकरण भी साधा जा सके। दिमनी, मेहगांव, करैरा जैसी विधानसभा सीटों पर नेता पुत्रों की सक्रियता ज्यादा है। कांग्रेस में नेता पुत्रों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगाया हालांकि कांग्रेस के नेता राजनीति में नए नहीं है बल्कि विधायक मंत्री तक बन चुके हैं। इनके लिए चुनाव संगठनात्मक व रणनीतिक कुशलता साबित करने की कसौटी बना हुआ है।

भाजपा: इन नेता पुत्रों ने संभाली कमान
अक्षय भंसाली: मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के बेटे हैं। उन्होंने पोहरी विधानसभा में सभा की है। इससे पहले अक्षय अपनी मां यशोधरा राजे सिंधिया के लिए ही प्रचार करते थे। पहली बार उन्होंने दूसरे प्रत्याशी के लिए प्रचार किया है। इस क्षेत्र में यशोधरा राजे का खासा प्रभाव है जातिगत समीकरण की बात करें तो यहां पर धाकड़ और ब्राह्मण मतदाता अधिक हैं।

कार्तिकेय चौहान: शिवराज सिंह चौहान के बेटे हैं। वह फरवरी 2018 में भी कोलारस उपचुनाव में प्रचार के लिए गए थे। हाल ही में कार्तिकेय चौहान, पोहरी विधानसभा में जनसंपर्क करने पहुंचे थे। यहां धाकड़ मतदाता अधिक हैं। 2018 के चुनाव में कार्तिकेय के चुनाव लड़ने की चर्चा भी थी तब उन्होंने खारिज कर दिया था।

देवेंद्र तोमर: केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे हैं। देवेंद्र ग्वालियर पूर्व, दिमनी और अंबाह में क्षत्रिय वोटरों को लुभान के लिए मैदान में हैं। इन विधानसभा सीटों में बड़ी संख्या में क्षत्रिय वोटर हैं। इसे लेकर वह सक्रिय भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस में इन नेता पुत्रों ने संभाली कमान
जयवर्धन सिंह: दग्विजय सिंह के बेटे हैं। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह की छवि अब नेता के रूप में है। उनके पास उपचुनाव में आगर विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी है। उनके लिए यह उपचुनाव प्रबंधकीय को साबित करने में सिद्ध होगा। बता दें कि जयवर्धन सिंह कमलनाथ सरकार में मंत्री भी थे।

सचिन यादव: पूर्व मंत्री सचिन यादव अब नेता पुत्र की छवि से बाहर आ चुके हैं। उन्हें उपचुनाव में यादव बहुल क्षेत्र मुंगावली की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यादव वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए सचिन कोई कमी नहीं कर रहे हैं। वो लगातार विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं।