शर्मनाक: नगर निगम के 70 में से सिर्फ एक मनोनीत पार्षद ने उठाया मनमर्जी के स्पीड ब्रेकरों का मुद्दा

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Published: 20 Apr 2021, 03:11 PM IST

-आमजन बोले: जिन्हें वोट देकर चुना खुद वो ही आमजन के मुद्दों से भटक रहे
-शीशम तिराहे के पास कुछ स्थानों पर सही कराए स्पीड ब्रेकर

भरतपुर. शहर की विभिन्न सड़कों पर नियमों को तोड़ते हुए स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। इससे जहां पीठ दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, वहीं इससे वाहनों की रिपेयरिंग का खर्च भी बढ़ा है। इसके बाद भी सड़कों पर बने इन ब्रेकरों को हटाने पर विभागों के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने 18 अप्रेल के अंक में सुनिए शहरी सरकार...गलत डिजाइन से बने स्पीड ब्रेकर हर माह ले रहे चालकों की जान, ये कैसा विकास है शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले का खुलासा किया था।
खास बात यह भी है कि सोमवार को नगर निगम की साधारण सभा की बैठक में शहर के 65 वार्डों के पार्षद व पांच मनोनीत पार्षदों में से सिर्फ एक पार्षद मनोनीत पार्षद विजेंद्र चीमा ने मनमाने तरीके से बने स्पीड ब्रेकरों का मुद्दा उठाया। नियमानुसार हाइवे या गलियों में कहीं भी स्पीड ब्रेकर बनाने का नियम नहीं है। अमानक और ऊंचे ब्रेकर खासतौर पर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए घातक हैं। इससे मिलने वाले झटके दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेकर के झटके से गर्भवती महिलाओं को नुकसान हो सकता है। शहर की सड़कों पर घटिया क्वालिटी और नियम विरुद्ध बने स्पीड ब्रेकर्स से गुजरने पर वाहन चालकों की रीढ़ की हड्डी को झटका लगता है। इससे हड्डियां क्रेक या मसल्स डेमेज हो सकती है जो धीरे-धीरे करके कुछ दिनों बाद कमर दर्द के रूप में सामने आती है।

बनाने के लिए लेनी पड़ती है स्वीकृति

स्पीड ब्रेकर ट्रैफिक पुलिस व लोगों की मांग पर नगरीय निकाय भी बनवाती है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी को आवेदन देना होता है। विभाग के अधिकारी ब्रेकर की आवश्यकता जांच करने के बाद परमिशन देते हैं, जबकि शहर में मनमर्जी से ब्रेकर बनेे हैं।

मोहल्लों की सड़कों पर ब्रेकर गैर कानूनी

विशेषज्ञों के अनुसार मोहल्लों में अपने-अपने घर के सामने ब्रेकर बनवा लेते हैं। यह गैर कानूनी है। यह सड़क निर्माण एजेंसी या स्थानीय नगरीय निकाय की जमीन में अतिक्रमण जैसा है। इस पर जुर्माना भी ठोका जा सकता है।

ब्रेकर निर्माण के लिए यह है गाइड लाइन

भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) की ब्रेकर निर्माण को लेकर गाइड लाइन है। इसमें यह ध्यान दिया गया है कि सड़क पर स्पीड ब्रेकर की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई का स्लोप इस तरह बनाया जाए, इससे वाहन की स्पीड तो कम करनी पड़े, लेकिन चालकों को हिचकोले या झटके नहीं लगें।

आमजन बोले: अब तो सुनिए साहब, देरी बढ़ा रही पीर

-पुलिस चौकी के सामने ब्रेकर पर हादसे हो रहे हैं। रविवार सुबह साढ़े नौ बजे किले की दीवार से ब्रेकर पर छाया होने से नहीं देखा। मैं बाइक सहित गिर गया। इसके कारण 15 लीटर दूध फैल गया और चोट भी आ गई। पीछे आने वाले एक बुजुर्ग भी चोटिल हो गया वह भी मेरे साथ गिर गया।

रामेश्वर शर्मा, निवासी गांव मौरोली

-मैं पहले दिन ही गिर गया था। स्पीड ब्रेकर दिखाई नहीं दिया था। स्कूटर पर जा रहा था। उसी दौरान उछलकर गिर गया। स्पीड ब्रेकर सुविधा के लिए बनाए हैं या परेशान करने के लिए।

दयानंद, नदिया मोहल्ला


-किला स्थित चौबुर्जा पुलिस चौकी के पास क्रॉसिंग से वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। इसको लेकर आसपास के लोगों ने ब्रेकर के ऊपर पुलिस का डिवाइडर लगा दिया है। इससे लोग आए दिन गिर रहे हैं।

सत्तार, चाय विक्रेता चौबुर्जा पुलिस चौकी के पास

-शहर में कॉलोनियों में आए दिन नए स्पीड ब्रेकर बन जाते हैं। इनकी स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। अगर ऐसे ही रहा तो किसी दिन हादसे में आमजन की जान भी जा सकती है।

प्रवीण, निवासी जवाहर नगर

-रात को स्पीड ब्रेकर दिखते तक नहीं है। इससे लोग गिरकर चोटिल हो जाते हैं। एक बार तो खुद भी गिरने से बच गया। स्पीड ब्रेकरों के मामले में कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।

शंकरलाल गुप्ता, निवासी कृष्णा नगर कॉलोनी

-ब्रेकर पर रंग होना चाहिए। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। कुछ स्थानों पर तो स्पीड ब्रेकर इतने ऊंचे हैं कि लगता है किसी अयोग्य इंजीनियर ने इनका निर्माण कराया है।

ओमप्रकाश सिंघल, निवासी कोतवाली बाजार

-रविवार सुबह ब्रेकर से एकदम गाड़ी उतर गई थी। स्पीड ब्रेकर दिखा ही नहीं था। आए दिन कोई न कोई हादसे का शिकार हो जाता है। यह मनमर्जी से बनाए गए स्पीड ब्रेकर हैं।

राहुल अग्रवाल, मोरीचार बाग बाजार

-शहर में जितने भी स्पीड ब्रेकर हैं उन सभी पर कलर होना चाहिए। कुछ स्थानों पर अंधेरा होता है तो स्पीड ब्रेकर दिखते ही नहीं है। जरूरी है कि इन पर चमकीला कलर कराया जाए।

सुरजीत फौजदार, नसवारिया गंगा मंदिर के पास